ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच खाद्य और कृषि उत्पादों के सीमा पार व्यापार पर लगे ब्रेक्सिट दौर के कड़े नियमों और जांच प्रक्रियाओं को समाप्त करने को लेकर एक अहम मसौदा समझौता तैयार हो गया है। इसी महीने दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाले द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन से पहले इस सहमति को अंतिम रूप दिया गया है। 200 पन्नों वाले इस मसौदा दस्तावेज को स्वच्छता और पादप स्वच्छता यानी एसपीएस समझौते के तहत ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के विचारार्थ भेजा गया है, जिस पर राजदूतों की बैठक में आगे की चर्चा की जाएगी।
प्रस्तावित समझौते के साथ ही उत्सर्जन व्यापार प्रणाली और युवाओं के लिए यात्रा व कार्य योजना पर भी अलग-अलग मसौदे सदस्य देशों के साथ साझा किए गए हैं। इसके अतिरिक्त दोनों पक्षों के प्रमुख नेताओं की ओर से जारी किए जाने वाले 15 पन्नों के साझा बयान की रूपरेखा भी तैयार की गई है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ के एकल बाजार से बाहर निकलने के बाद निर्यातकों को जिन जटिल प्रक्रियाओं और भारी शुल्क का सामना करना पड़ रहा था, उससे राहत दिलाने की दिशा में यह खाद्य समझौता अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक प्रगति मानी जा रही है।
सर्टिफिकेट शुल्क और कागजी कार्रवाई से मिलेगी राहत
इस नए समझौते के प्रभावी होने के बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले आयात और निर्यात पर लगने वाले कई प्रकार के अतिरिक्त खर्च समाप्त हो जाएंगे। इसमें प्रत्येक खेप के लिए जरूरी 200 पाउंड का एक्सपोर्ट हेल्थ सर्टिफिकेट और 25 पाउंड का फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट शामिल है। इसके अलावा खाद्य निरीक्षकों की फीस, जैविक प्रमाणन शुल्क, बंदरगाहों पर लगने वाले कुछ विशेष प्रभार और अनिवार्य सैंपलिंग जांच की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी।
कागजी कार्रवाई और जांच हटने से ब्रिटेन के घरेलू जलक्षेत्र से निकलने वाली शेलफिश, ताजा सॉसेज, बर्गर और बीज वाले आलू का यूरोपीय संघ के देशों में दोबारा निर्यात शुरू हो सकेगा। ब्रेक्सिट के बाद लागू हुई व्यवस्था के कारण इन उत्पादों के सीमा पार भेजने पर पूर्ण प्रतिबंध जैसी स्थिति बन गई थी, जिससे ब्रिटिश उत्पादकों को भारी व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
नेतृत्व परिवर्तन और यूरोपीय संघ के प्रति नीतिगत बदलाव
इस समझौते के सभी प्रमुख बिंदुओं पर पहले कीर स्टारमर के नेतृत्व में भी विमर्श चल रहा था। यदि जुलाई में लेबर पार्टी ने अपना नेता न बदला होता, तो यह शिखर सम्मेलन अब तक आयोजित हो चुका होता। नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के कार्यकाल में यूरोपीय संघ के साथ ब्रिटेन के संबंधों को लेकर दृष्टिकोण में एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखा गया है। कीर स्टारमर ने जहां अपने जीवनकाल में ब्रिटेन के दोबारा यूरोपीय संघ में शामिल न होने की बात कही थी, वहीं एंडी बर्नहैम ने स्पष्ट किया है कि वे अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को वापस यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं।
ब्रिटिश सरकार के आर्थिक आकलन के अनुसार, इस समझौते के लागू होने से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 5.1 अरब पाउंड का वित्तीय लाभ प्राप्त होगा। समझौते के तहत पालतू जानवरों के लिए पेट पासपोर्ट की सुविधा भी दोबारा बहाल की जा सकेगी, जिससे ब्रिटेन के नागरिक अपने पालतू जानवरों को आसानी से यूरोपीय संघ के देशों में ले जा सकेंगे। इसके बदले में ब्रिटेन ने पेड़-पौधों, जानवरों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े व्यापार मानकों पर यूरोपीय संघ के मौजूदा नियमों का पालन करने और उनके अनुसार सामंजस्य बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसे नीतिगत भाषा में डायनेमिक अलाइनमेंट कहा जाता है।
नियमों में सामंजस्य और उत्तरी आयरलैंड पर असर
हालांकि ब्रिटेन के अधिकांश नियम अभी भी यूरोपीय संघ के मानकों के काफी करीब हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इंग्लैंड यूरोपीय संघ की नियमावली से अलग रास्ते पर चला गया था। इसका एक प्रमुख उदाहरण पौधों के सटीक प्रजनन यानी जीन एडिटिंग की तकनीक है। यूरोपीय संघ के नए नियमों के पूरी तरह लागू होने तक इस अंतर को पाटने के लिए हाल के हफ्तों में एक अंतरिम संक्रमण व्यवस्था पर सहमति बनाई गई है।
ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के राजदूतों की समिति कोरेपर की बैठक में इन समझौतों के मसौदे पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रस्तावित यूथ एक्सपीरियंस स्कीम में प्रतिभागियों की संख्या को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक स्तर पर फैसला लिया जाएगा। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ के छात्रों के लिए विदेशी छात्र शुल्क में छूट और दोनों पक्षों के बिजली बाजारों को दोबारा जोड़ने की योजना को अगले साल तक के लिए टाले जाने की संभावना है।
इस खाद्य समझौते का सबसे बड़ा राजनीतिक और व्यापारिक प्रभाव उत्तरी आयरलैंड पर पड़ेगा। उत्तरी आयरलैंड के लिए किए गए ब्रेक्सिट समझौते के तहत उसे यूरोपीय संघ के वस्तुओं के एकल बाजार में बनाए रखा गया था। इसके चलते ब्रिटेन के अन्य हिस्सों से उत्तरी आयरलैंड के बंदरगाहों पर आने वाले खाद्य पदार्थों को कागजी औपचारिकताओं और भौतिक जांच से गुजरना पड़ता था, जिससे आयरिश सागर के आर-पार एक आंतरिक व्यापारिक सीमा बन गई थी। नए समझौते के लागू होने से यह आंतरिक सीमा बाधा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
कारोबारी जगत का रुख और राजनीतिक आपत्तियां
सुपरमार्केट श्रृंखलाओं और किसान संगठनों ने खाद्य व्यापार के इस नए समझौते का पुरजोर समर्थन किया है, जबकि ब्रेक्सिट का समर्थन करने वाले कुछ राजनीतिक गुटों ने यूरोपीय संघ के नियमों को फिर से स्वीकार करने की आलोचना की है। बोरिस जॉनसन की सरकार द्वारा किए गए पूर्ववर्ती व्यापार समझौते में नियामक बाधाओं, जांच और देरी को टालने के बजाय ब्रिटेन की नियामक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी गई थी।
ब्रिटिश चैंबर ऑफ कॉमर्स यानी बीसीसी के व्यापार नीति प्रमुख विलियम बैन ने कहा कि कारोबारी जगत साझा नियमों का पालन करने को एक उचित कदम मानता है, क्योंकि इससे कंपनियों को लागत में कमी, कम देरी और बाजार तक व्यापक पहुंच का वास्तविक लाभ मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रत्येक मालवाहक ट्रक के लिए एक्सपोर्ट हेल्थ सर्टिफिकेट लेने में हजारों पाउंड का खर्च आता है, जिसके साथ बंदरगाहों और सीमाओं पर कई दिनों की देरी झेलनी पड़ती है। इस आपूर्ति श्रृंखला में भारी लागत वृद्धि और देरी के कारण ब्रिटिश निर्यात में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी।
ब्रिटिश चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अपने सदस्य व्यवसायों के विचारों का एक नया विश्लेषण जारी करते हुए संबंधों को और अधिक घनिष्ठ बनाने के विकल्पों की रूपरेखा प्रस्तुत की है। कारोबारी संगठन का कहना है कि ब्रेक्सिट के छह साल बीत जाने के बाद भी मौजूदा व्यापार व्यवस्था परिणाम देने में विफल रही है और कंपनियां जटिल लालफीताशाही में उलझ कर रह गई हैं। बीसीसी ने सरकार से नौ अलग-अलग विकल्पों पर विचार करने का आग्रह किया है, जिनमें सीमा शुल्क संघ, स्विट्जरलैंड मॉडल का एकल बाजार संबंध और कनाडा मॉडल की एसोसिएट सदस्यता शामिल है।
बीसीसी की महानिदेशक शेवॉन हैविलीलैंड ने कहा कि व्यवसायों के प्रमाण बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने यूरोप के साथ भविष्य के संबंधों पर संवाद शुरू करके बिल्कुल सही कदम उठाया है और इसके लिए वे सराहना के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापार के हर विकल्प की बारीकी से जांच करनी चाहिए और शुरुआत से ही उद्योग जगत को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदार बनाना चाहिए। बीसीसी के सर्वेक्षण के अनुसार, 56 प्रतिशत निर्यातक कंपनियां विकास के लिए सीमा शुल्क कागजी कार्रवाई और देरी को खत्म करना चाहती हैं, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में यह मांग 58 प्रतिशत कारोबारियों ने उठाई है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे इस महीने होने वाले सम्मेलन का उपयोग भविष्य में यूरोपीय संघ के साथ पूर्ण पुनर्एकीकरण के विकल्पों पर चर्चा शुरू करने के लिए करना चाहते हैं।



















