यूक्रेन के दक्षिणी ज़ापोरिजिया क्षेत्र में मानवीय सहायता वितरण केंद्र के रूप में उपयोग किए जा रहे एक स्थानीय स्कूल पर हुए भीषण हवाई हमलों में कम से कम 18 नागरिकों की जान चली गई है। यह दुखद घटना कोमिशुवाखा गांव में उस समय घटी जब स्थानीय निवासी अपनी नियमित साप्ताहिक राहत सामग्री लेने के लिए कतारों में खड़े थे। राहत और बचाव दल लगातार मलबे के भारी ढेरों के बीच खोज अभियान चला रहे हैं, क्योंकि कई लोग अब भी कंक्रीट के नीचे दबे हुए हैं।
कोमिशुवाखा में भारी तबाही और हताहतों का विवरण
क्षेत्रीय प्रमुख मिखाइलो सेमकिन ने घटना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि कोमिशुवाखा गांव को निशाना बनाकर कम से कम नौ 3,000 किलोग्राम वजनी हवाई बम गिराए गए। इन अत्यधिक शक्तिशाली विस्फोटकों के गिरने से पूरा परिसर मलबे में तब्दील हो गया। इस हमले में अब तक 18 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि पांच नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त 27 लोग अभी भी लापता दर्ज हैं, जिनकी तलाश में राहत एजेंसियां युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं।
मिखाइलो सेमकिन ने पुष्टि की कि घटना स्थल पर बचाव कर्मी मलबे को हटाने और फंसे हुए नागरिकों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जिस स्कूल की इमारत को निशाना बनाया गया, वह स्थानीय आबादी की बुनियादी जरूरतों और राशन आपूर्ति के वितरण का मुख्य केंद्र बन चुकी थी। मलबे के नीचे दबे लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए इस भीषण त्रासदी में हताहतों का अंतिम आंकड़ा और अधिक बढ़ने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
दोहरे हमले का क्रम और बड़े गड्ढे
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस हमले को पूरी तरह से वीभत्स करार दिया है। उन्होंने बताया कि यह हमला दो चरणों में अंजाम दिया गया। पहला हमला उस स्थानीय स्कूल पर हुआ जिसका इस्तेमाल मानवीय जरूरतों के लिए किया जा रहा था। इसके तुरंत बाद, जब घबराए हुए लोग शरण लेने के लिए एक सुरक्षित स्थान की ओर भागे, ठीक उसी शरण स्थल पर दूसरा हमला कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में सोमवार के इस हमले के बाद जमीन पर बना एक विशालकाय गड्ढा दिखाई दे रहा है, जो 3,000 किलोग्राम के बमों की विनाशकारी शक्ति को दर्शाता है। वीडियो में आपातकालीन कर्मी धूल और बिखरे पत्थरों के बीच जीवित बचे लोगों की तलाश करते नजर आ रहे हैं। इस दोहरे हमले की रणनीति से स्पष्ट होता है कि इसका उद्देश्य सहायता लेने आए लोगों और पहले हमले के बाद जान बचाने की कोशिश कर रहे नागरिकों को भारी क्षति पहुंचाना था।
राहत वितरण की जानकारी और शांति प्रयासों पर असर
राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वहां मौजूद सैनिकों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि कोमिशुवाखा में बचे हुए स्थानीय नागरिक हर हफ्ते उसी स्थान पर मानवीय सहायता प्राप्त करते थे। उन्होंने कहा कि नागरिकों के ऐसे नियमित जमावड़े से अनभिज्ञ होना संभव नहीं था। ज़ेलेंस्की के अनुसार, सहायता केंद्र पर यह हमला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि तनाव घटाने की कोई वास्तविक इच्छा नहीं दिखाई जा रही है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने हाल ही में हुए एक संयुक्त मानवीय अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि रूसी कब्जे वाले दक्षिणी शहर ओलेश्की से नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक सफल संयुक्त यूक्रेनी-रूसी अभियान चलाया गया था। उस अभियान के बाद एक ऐसा अवसर बना था जब अगले कदमों से यह संकेत मिल सकता था कि शांति संभव है। हालांकि, ज़ेलेंस्की ने कड़े शब्दों में कहा कि इस तरह की हत्याओं को अंजाम देकर इसके ठीक विपरीत संदेश दिया गया है और आगे भी ऐसे हमलों को जारी रखने का रुख अपनाया गया है।
युद्ध की पृष्ठभूमि और आधिकारिक स्थिति
इस पूरे मामले पर रूसी सेना की तरफ से कोई सार्वजनिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है। जमीनी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और आपातकालीन सेवाएं लगातार जीवित लोगों को बाहर निकालने के प्रयास में जुटी हुई हैं।
गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य आक्रमण शुरू किया था। तब से लेकर अब तक दोनों पक्षों के बीच लगातार भीषण संघर्ष चल रहा है, जिसने यूक्रेन के बड़े हिस्से में नागरिक जीवन, बुनियादी ढांचे और राहत कार्यों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कोमिशुवाखा की यह घटना दर्शाती है कि युद्धग्रस्त इलाकों में जीवनयापन कर रहे आम नागरिकों के लिए बुनियादी राशन जुटाना भी जानलेवा साबित हो रहा है।

















