रूस ने पिछले कुछ समय से अपने सैन्य अभियानों में एक बड़ा बदलाव करते हुए उन्नत जेट-संचालित ड्रोन्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यूक्रेन वायु सेना के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि अगस्त महीने में रूस ने हर दिन इन नए और तेज रफ्तार ड्रोन्स से हमले किए। यूक्रेन की राजधानी कीव के आसमान में मंडरा रहे इस नए खतरे को लेकर राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने गहरी चिंता व्यक्त की है और इसे एक भयानक स्थिति करार दिया है।
हर महीने तेजी से बढ़ती हमलों की संख्या
यूक्रेन के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि जेट इंजन वाले इन ड्रोन्स से होने वाले हमलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून के महीने में इस तरह के 350 हमले रिकॉर्ड किए गए थे, जिनकी संख्या जुलाई में बढ़कर 1,600 और अगस्त में सीधे 2,800 तक पहुंच गई। अगस्त के महीने में ऐसे पांच दिन भी आए जब इन आधुनिक ड्रोन्स की संख्या पारंपरिक और धीमी गति वाले पुराने मॉडलों से काफी ज्यादा थी।
रूस ने क्यों चुना जेट इंजन वाला विकल्प
किंग्स कॉलेज लंदन में सैन्य तकनीक की विशेषज्ञ डॉ. मरीना मिरोन के अनुसार, रूस द्वारा जेट-संचालित ड्रोन्स अपनाने का सबसे बड़ा कारण इनकी अत्यधिक गति है। पुरानी पीढ़ी के ड्रोन्स की तुलना में ये नए हथियार बहुत तेज उड़ते हैं, जिसकी वजह से यूक्रेनी सेना के लिए इन्हें बीच रास्ते में रोकना बेहद पेचीदा और चुनौतीपूर्ण हो गया है। इन उन्नत हथियारों की क्रूज गति 300 मील प्रति घंटा से भी अधिक है, जो पुराने ड्रोन्स के मुकाबले काफी तेज है और कीव के इंटरसेप्टर विमानों की अधिकतम गति सीमा से भी ऊपर है।
तकनीकी और आर्थिक पहलू
यूक्रेनी सैन्य खुफिया एजेंसियों का कहना है कि इन ड्रोन्स को संचालित करने के लिए टर्बोजेट इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें से कुछ इंजन चीन से प्राप्त किए गए हैं। डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज फाउंडेशन के थिंक टैंक से जुड़े जॉन हार्डी ने बताया कि रूस के पास इन ड्रोन्स में निवेश करने के पीछे एक मजबूत आर्थिक प्रोत्साहन भी था। इन मॉडलों की बढ़ती रफ्तार और पैंतरेबाज़ी ने इन्हें महंगे क्रूज मिसाइलों के करीब लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे दोनों के बीच की महीन रेखा अब लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने इसे गरीबों की क्रूज मिसाइल करार देते हुए कहा कि जैसे-जैसे ड्रोन में क्षमताएं जोड़ी जाती हैं, वैसे-वैसे ड्रोन और कम श्रेणी की क्रूज मिसाइल के बीच का फर्क कम होता जाता है। हालांकि, कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च नामक विश्लेषक संगठन का यह भी कहना है कि ये जेट-ड्रोन अभी पूरी तरह से क्रूज मिसाइलों जितने उन्नत नहीं हैं। इनकी मारक क्षमता कम है, इनमें छोटे वारहेड लगते हैं और ये जैमिंग सिस्टम के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
उत्पादन और नए बुनियादी ढांचे का विकास
कीव के अधिकारियों ने हाल ही में मीडिया को जानकारी दी कि चार यूक्रेनी कंपनियों ने ऐसे नए मिसाइलों का परीक्षण शुरू कर दिया है, जो इन नए गेरान ड्रोन्स को आसमान में ही ढेर कर सकती हैं। देश के नए रक्षा मंत्री येवेनी खमारा ने इन कंपनियों को जल्द से जल्द हजारों की संख्या में इनका उत्पादन करने का सख्त निर्देश दिया है। इसके अलावा, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि मास्को ने यूक्रेन युद्ध से जुड़े अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों को इन नए ड्रोन्स के संचालन के लिए फिर से तैयार किया है। ओरियोल क्षेत्र के त्सिम्बुलोवा नामक एक बिल्कुल नए बेस पर लंबी रेलिंग और कई लॉन्च साइट्स देखी गई हैं, जो यूक्रेनी सीमा से लगभग 109 मील यानी 175 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रणनीतिक बदलाव और मिसाइलों का संयोजन
जब से त्सिम्बुलोवा बेस चालू हुआ है, यह रूसी ड्रोन हमलों का एक मुख्य केंद्र बन गया है। सितंबर 2024 से पहले वायु सेना की रिपोर्टों में ओरियोल क्षेत्र का जिक्र लॉन्च साइट के तौर पर नहीं होता था, लेकिन अगस्त 2026 तक यह लगभग हर हमले की रिपोर्ट में शामिल हो चुका है। रैंड थिंक टैंक के विश्लेषक माइकल बोहर्ट ने बताया कि हमलों के आकार में यह बढ़ोतरी इसलिए हो रही है क्योंकि मास्को अब जेट-संचालित और डिकॉय ड्रोन्स के साथ-साथ महंगी बैलिस्टिक मिसाइलों का भी एक साथ इस्तेमाल कर रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि चार साल पहले की तुलना में मास्को अब प्रति हमला 15 गुना से ज्यादा ड्रोन्स का उपयोग कर रहा है। अमेरिकी-इजराइली संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर वायु रक्षा प्रणालियों की कमी और जटिल हमलों की वजह से यूक्रेन की इंटरसेप्शन दरों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जुलाई के अंत तक बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के आंकड़े सामने आ रहे थे, लेकिन अगस्त के दौरान कीव ने इन आंकड़ों को प्रकाशित करना लगभग बंद कर दिया।


















