यूरोपीय देशों और फ्रांस के खिलाफ रूस की ओर से हाइब्रिड हमलों का खतरा हाल के हफ्तों में काफी तेज हो गया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बढ़ते संकट को लेकर आगाह करते हुए देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और रक्षा उद्योग से जुड़े संवेदनशील ठिकानों की हिफाजत के लिए एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस को निशाना बनाकर किए जा रहे इन गुप्त और गैर-पारंपरिक हमलों को बिना ठोस जवाब दिए बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एलिसी पैलेस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी युद्धों के व्यापक सुरक्षा प्रभावों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हुई बैठक का ब्योरा साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान यूरोपीय महाद्वीप और विशेष रूप से फ्रांस पर मंडराता रूसी हाइब्रिड खतरा बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है, जिसका मुख्य मकसद पश्चिमी सहयोगियों के हौसले को तोड़ना है।
पश्चिमी संकल्प को कमजोर करने की कोशिश
इमैनुएल मैक्रों के अनुसार, इन हमलों के पीछे का छिपा हुआ इरादा यूरोपीय देशों को डराना और यूक्रेन को मिल रही सैन्य व रणनीतिक सहायता को बाधित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आक्रामक रुख का परिणाम बिल्कुल उल्टा साबित होगा, क्योंकि पश्चिमी देश किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। मैक्रों ने कहा कि यूरोप अच्छी तरह समझता है कि यूक्रेन में केवल एक देश की नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।
यूरोप के कई अन्य प्रमुख नेताओं ने भी ऐसी ही आशंकाएं जताई हैं। कई देशों का मानना है कि रूस संभवतः यह परखने के लिए इन हमलों की रूपरेखा तैयार कर रहा है कि पश्चिमी सहयोगी यूक्रेन के समर्थन में किस हद तक मजबूती से टिके रह सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह तनाव सीधे टकराव के बजाय परोक्ष दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
पोलैंड की चेतावनी और मिसाइल हमलों का जोखिम
गुरुवार को पोलिश संसद में सांसदों को संबोधित करते हुए पोलैंड के नेता टस्क ने खुलासा किया कि रूस की आगामी योजनाओं में यूक्रेन का सहयोग कर रहे देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने की तैयारी भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि नाटो सदस्य देशों की जमीन पर इस तरह के हमलों का एक वास्तविक खतरा लगातार बना हुआ है।
टस्क ने विस्तार से समझाया कि मॉस्को की चाल यह हो सकती है कि वह नाटो की सीमा में मिसाइल या ड्रोन गिराकर बाद में उसे महज एक आकस्मिक दुर्घटना या तकनीकी खराबी बता दे। ऐसी रणनीति का सीधा उद्देश्य पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के भीतर आपसी फूट पैदा करना और सहयोगी देशों की एकजुटता को कमजोर करना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव पहले से ही बढ़ रहा है, जैसा कि यूक्रेन के याहोदिन में देखने को मिला, जहां ट्रेन के इंजन पर हुए हमले से चंद मिनट पहले ही सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
हाइब्रिड युद्ध के तरीके और रूस का कड़ा रुख
हाइब्रिड युद्ध शैली में पारंपरिक सैन्य शक्ति के अलावा कई गैर-पारंपरिक तौर-तरीकों का सहारा लिया जाता है। इसके तहत कंप्यूटर नेटवर्क पर साइबर हमले, बड़े पैमाने पर फर्जी सूचनाएं और दुष्प्रचार फैलाना तथा आर्थिक दबाव बनाकर विरोधी राष्ट्र को आंतरिक रूप से अस्थिर करना शामिल होता है। इस बहुआयामी रणनीति का मकसद सीधे युद्ध की घोषणा किए बिना लक्षित देश की सामान्य व्यवस्था को पंगु बनाना होता है।
दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि रूस की यूरोप पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूरोपीय देशों को यूक्रेन में अपनी सेनाएं भेजने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। लावरोव ने दो टूक कहा कि अगर किसी यूरोपीय देश ने यूक्रेन में सैनिक भेजे, तो रूस इसे सीधे अपने खिलाफ युद्ध की घोषणा मानेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर यूरोप रूस पर हमला करता है, तो वह पूरी तरह से एक अलग किस्म का युद्ध होगा और बहुत ही कम समय में समाप्त हो जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा और जी7 की आपात बैठक
सुरक्षा खतरों के अलावा मैक्रों ने यूरोप की नाजुक ऊर्जा स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि फ्रांसीसी सरकार को ऊर्जा ग्रिड, अहम बुनियादी ढांचे और तकनीकी रूप से सबसे संवेदनशील रक्षा उद्योग स्थलों को ड्रोन हमलों और घातक साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रखने का जिम्मा सौंपा गया है।
इमैनुएल मैक्रों ने यह भी घोषणा की कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मसलों पर विचार-विमर्श करने और यूरोपीय आयोग के समक्ष गैस के मौजूदा भंडारों का मुद्दा उठाने के लिए फ्रांस आने वाले हफ्तों में जी7 देशों की एक विशेष बैठक बुलाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी हफ्तों में जी7 की यह बैठक ऊर्जा चुनौतियों के समाधान, आपसी सहयोग को सशक्त करने और प्रमुख साझेदारों के बीच अनावश्यक मतभेदों को रोकने के लिए आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही, बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक तेल व गैस भंडारों को जारी करने या उनके इस्तेमाल के विभिन्न विकल्पों पर भी इस मंच पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी।



















