आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 'परम प्रज्ञा' सुपरकंप्यूटर का करेंगे उद्घाटनदलीप ट्रॉफी में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तानी सौंपने पर शुरू हुई बहस, पूर्व कप्तान की सलाह पर उठे सवालसीरिया में शिकारियों के चंगुल से छूटा दुर्लभ पूर्वी शाही गरुड़ 'फेलिक्स', सर्बिया के जंगलों में वापस लौटासंजय दत्त और नगमा पर फिल्माया 1992 का रोमांटिक गाना आखिर तुम्हें आना है आज भी क्यों माना जाता है खाससोने के गहने गिरवी रखकर कर्ज लेने की होड़, एनबीएफसी का गोल्ड लोन 69 फीसदी बढ़कर 3.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचानागपुर में नाबालिग के साथ बर्बरता के बाद सोशल मीडिया खातों के लिए अनिवार्य ई-केवाईसी की मांग तेजई20 पेट्रोल नीति पर राहुल गांधी ने उठाया सवाल, वाहनों को नुकसान का दावा करते हुए अभियान चलाने का किया ऐलानद लास्ट हाउस रिव्यू (2026): एक मकान में कैद परिवार की साइंस-फिक्शन कहानी में कितना है दमओडिशा के कटक में भीषण हादसा: स्कॉर्पियो ने इंडसइंड बैंक कर्मचारी सस्मिता को घसीटा, हालत नाजुक12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देश भर में आयोजन, शशि थरूर ने रेखांकित किए रोजगार और महिला भागीदारी के आंकड़े
लाइपज़िग हवाई अड्डे पर यूक्रेनी मालवाहक विमानों के पास मिला विस्फोटक भरा ड्रोन, यूरोप में हाइब्रिड वारफेयर का बढ़ा खतरायूरोप
7 अग॰ 2026, 2:51 pm (14 घंटे पहले)· 0

लाइपज़िग हवाई अड्डे पर यूक्रेनी मालवाहक विमानों के पास मिला विस्फोटक भरा ड्रोन, यूरोप में हाइब्रिड वारफेयर का बढ़ा खतरा

जर्मनी के लाइपज़िग हवाई अड्डे पर यूक्रेनी एंटोनोव मालवाहक विमानों के पास विस्फोटक से लैस ड्रोन मिलने से हड़कंप मच गया है। अधिकारियों को संदेह है कि यह यूरोप में चल रही गुप्त हाइब्रिड तोड़फोड़ की साजिशों का हिस्सा हो सकता है।

जर्मनी के लाइपज़िग हवाई अड्डे पर उस समय सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया, जब रनवे पर खड़े यूक्रेनी मालवाहक विमानों के पास विस्फोटक से भरा एक क्वॉडकोप्टर ड्रोन हवा में तैरता हुआ देखा गया। मंगलवार देर रात हुई इस घटना के बाद हवाई अड्डे के एक मुख्य रनवे को तुरंत बंद कर दिया गया और पूरे इलाके को सील कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बम निरोधक दस्ते ने एक विशेष रोबोट को रनवे पर उतारा, जिसने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए ड्रोन में लगे डिटोनेटर को सफलतापूर्वक बाहर निकालकर निष्क्रिय कर दिया। यह विस्फोटक ड्रोन जिस जगह पर मिला, वहां यूक्रेन के विशाल एंटोनोव मालवाहक विमान खड़े थे। इन विमानों की बॉडी पर यूक्रेन के राष्ट्रीय ध्वज के नीले और पीले रंग की पट्टियां बनी हुई थीं, और उन पर "बी ब्रेव लाइक खेरसॉन" लिखा हुआ था, जो रूस के आक्रमण का सामना कर रहे दक्षिणी यूक्रेन के सीमावर्ती शहर खेरसॉन के सम्मान में लिखा गया एक संदेश है। हवाई अड्डे के कर्मचारियों ने सबसे पहले इन यूक्रेनी विमानों के बीच एक छोटे ड्रोन को हवा में मंडराते देखा और सुरक्षा अधिकारियों को अलर्ट किया।

जमीन पर विस्फोटक ड्रोन मिलने के लगभग उसी समय, हवा में भी एक संदिग्ध घटना घटी जिसने यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी। लाइपज़िग हवाई अड्डे पर उतरने में असमर्थ रहने के बाद आसमान की ओर उड़ान भर रहे डीएचएल के एक मालवाहक विमान से कोई अज्ञात वस्तु टकरा गई। विमानन विशेषज्ञ और जांच दल इस बात की तकनीकी जांच कर रहे हैं कि क्या हवा में हुई यह टक्कर किसी दूसरे ड्रोन से हुई थी। इस बीच, जर्मनी की जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि नियंत्रित हवाई क्षेत्र में विस्फोटक ड्रोन किसने और कहां से लॉन्च किया था। जर्मनी के गृह मंत्री ने इस घटना पर कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यूरोपीय बुनियादी ढांचे पर "खतरे का एक नया स्तर" मंडरा रहा है, जिसमें विदेशी शक्तियों का हाथ होने की पूरी संभावना है।

ये भी पढ़ें

लाइपज़िग हवाई अड्डे पर सुरक्षा लॉकडाउन और त्वरित कार्रवाई

यूरोप के एक प्रमुख रसद और मालवाहक केंद्र के भीतर एक हथियारबंद ड्रोन का मिलना पश्चिमी परिवहन व्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है। लाइपज़िग हवाई अड्डा मध्य यूरोप में अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और सैन्य सामग्री के परिवहन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। जब सुरक्षाकर्मियों ने एंटोनोव विमानों के बेड़े के पास मंडराते हुए क्वॉडकोप्टर को देखा, तो हवाई अड्डे का संचालन तुरंत रोक दिया गया। रनवे को बंद करने से अन्य उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई और बम निरोधक विशेषज्ञों को विस्फोटक का आकलन करने का समय मिला। मौके पर भेजे गए रोबोट में उच्च तकनीक वाले मैकेनिकल हाथ लगे थे, जिनकी मदद से तकनीशियनों ने बिना किसी धमाके के मुख्य डिटोनेटर को ड्रोन से अलग कर दिया। हालांकि इस त्वरित कार्रवाई से विमानों और रनवे को भौतिक नुकसान होने से बचा लिया गया, लेकिन हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में विस्फोटक उपकरण के पहुंचने से जर्मनी के सभी हवाई अड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा शुरू हो गई है।

ड्रोन की मौजूदगी के स्थान और वहां खड़े विमानों के रणनीतिक महत्व को लेकर रक्षा जानकार कई तरह के कयास लगा रहे हैं। एंटोनोव एयरलाइंस लाइपज़िग से भारी मालवाहक विमानों का संचालन करती है, जो पूरे यूरोप में लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करते हैं। इनमें से कई विमानों पर रूसी सैन्य बलों के खिलाफ यूक्रेनी प्रतिरोध से जुड़े प्रतीक और संदेश चित्रित हैं। "बी ब्रेव लाइक खेरसॉन" का संदेश इन परिवहन विमानों के प्रतीकात्मक महत्व को रेखांकित करता है, जिनका उपयोग मानवीय और रसद सामग्री पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है। यद्यपि अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि एंटोनोव विमान ही उस विस्फोटक ड्रोन का मुख्य निशाना थे, लेकिन उनके ठीक पास विस्फोटक उपकरण मिलने से उन संपत्तियों को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ गई है जो सीधे तौर पर यूक्रेन से जुड़ी हैं।

एंटोनोव विमानों के पास मिले क्वॉडकोप्टर के अलावा, उड़ान भर रहे डीएचएल मालवाहक विमान से हुई टक्कर ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। यह मालवाहक विमान लैंडिंग रद्द करने के बाद हवा में ऊपर उठ रहा था, तभी चालक दल को किसी चीज से टकराने का अनुभव हुआ। फॉरेंसिक टीमें और विमानन जांचकर्ता रडार डेटा, मलबे की स्थिति और विमान की बाहरी सतह पर लगे निशानों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टकराने वाली वस्तु वास्तव में कोई दूसरा ड्रोन थी या नहीं। यदि यह साबित हो जाता है कि एक ही समय में लाइपज़िग के ऊपर दो ड्रोन सक्रिय थे, तो यह एक सुनियोजित और जटिल हमले की ओर इशारा करेगा जिसका उद्देश्य हवाई यातायात को बाधित करना और व्यावसायिक विमानन को संकट में डालना था।

पिछली यूरोपीय तोड़फोड़ की साजिशों और प्रोक्सी नेटवर्क से संबंध

हालांकि जांचकर्ताओं ने लाइपज़िग के इस ड्रोन को सीधे तौर पर किसी विदेशी सरकार से जोड़ने का कोई प्रत्यक्ष सबूत अभी सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटना पिछले दो वर्षों में यूरोप में देखी गई गुप्त तोड़फोड़ की घटनाओं से काफी मिलती-जुलती है। रूस हमेशा से हाइब्रिड वॉरफेयर में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों ने रूसी खुफिया तंत्र के लिए काम करने वाले प्रोक्सी नेटवर्क द्वारा की गई गुप्त तोड़फोड़ का एक लंबा पैटर्न दर्ज किया है। इससे पहले साल 2024 की गर्मियों में लाइपज़िग हवाई अड्डे के डीएचएल कार्गो हब में एक पार्सल के भीतर रखा अत्याधुनिक आग लगाने वाला उपकरण अचानक जल उठा था। वह पार्सल मालवाहक विमान में लादे जाने से ठीक पहले जल गया था। इसके तुरंत बाद यूनाइटेड किंगडम और पोलैंड में भी इसी तरह के पार्सल फटने और जलने की घटनाएं हुई थीं, जिनसे भारी नुकसान हुआ था और कई देशों की आतंकवाद निरोधी एजेंसियों को संयुक्त जांच शुरू करनी पड़ी थी।

साल 2024 के उन आगजनी वाले पार्सल हमलों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई इस समय लिथुआनिया और पोलैंड की अदालतों में चल रही है। वहां के अभियोजकों ने कई ऐसे लोगों पर आरोप तय किए हैं जो रूसी सैन्य खुफिया तंत्र के लिए भाड़े के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। अदालती कार्यवाही से एक बड़े तोड़फोड़ नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसका काम यूरोपीय परिवहन तंत्र को आगजनी और विस्फोटों के जरिए निशाना बनाना था। पार्सल बमों के अलावा, लिथुआनिया के सरकारी अभियोजकों ने सितंबर 2024 में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादी हमलों के लिए एकत्र किए गए सैन्य-ग्रेड विस्फोटक की एक बड़ी खेप जब्त की थी, जिसमें 6 किलोग्राम टीएनटी के बराबर तबाही मचाने वाला आरडीएक्स (RDX) शामिल था। अभियोजन के दस्तावेजों के अनुसार, कुछ विस्फोटकों को इस तरह से डिजाइन किया गया था ताकि वे धमाके के प्रभाव और शॉकवेव को कई गुना बढ़ा सकें।

अदालती दस्तावेजों में इस बात का विस्तार से उल्लेख है कि इस नेटवर्क के सदस्यों को यूरोपीय संघ के भीतर खतरनाक सामग्री पहुंचाने के लिए पैसे दिए जाते थे। ये एजेंट सैन्य आरडीएक्स विस्फोटक को मीठी मकई (स्वीटकॉर्न) और कटे हुए टमाटर के डिब्बों के भीतर छिपाकर ले जाते थे। इलेक्ट्रॉनिक्स डिटोनेटरों को हेडफोन के डिब्बों में छिपाया जाता था। इसके अलावा, मामले के दस्तावेजों में विशेष रूप से बताया गया है कि संदिग्धों के पास ड्रोन के ऐसे कलपुर्जे और ब्रैकेट पाए गए थे जिन्हें बम पकड़ने और ले जाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था। अभियोजकों का आरोप है कि इन बम बनाने वाली सामग्रियों और विस्फोटकों को रूस के कलिनिनग्राद क्षेत्र से अवैध रूप से यूरोपीय संघ की सीमाओं के भीतर लाया गया था, ताकि पोलैंड, लिथुआनिया और जर्मनी में सक्रिय गुप्त ठिकानों तक पहुंचाया जा सके।

हालांकि पोलैंड और लिथुआनिया में लगभग दो दर्जन लोगों पर आतंकवाद के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य हैंडलर अभी भी फरार हैं और माना जाता है कि वे रूस में छिपे हुए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि मुख्य मास्टरमाइंड कभी पकड़े नहीं गए, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि पूरा तोड़फोड़ नेटवर्क खत्म हो चुका है या यूरोप में अब भी विस्फोटकों के गुप्त ठिकाने मौजूद हैं। साल 2024 की साजिश में जिस तरह की कार्यप्रणाली का इस्तेमाल किया गया था, वह लाइपज़िग हवाई अड्डे पर हाल ही में मिले विस्फोटक ड्रोन से काफी मेल खाती है, जो इस बात का संकेत है कि पुराना नेटवर्क अभी भी सक्रिय हो सकता है।

एजेंट का कबूलनामा: यूरोप भर में विस्फोटकों और ड्रोन पार्ट्स की तस्करी

पोलैंड में आरोपी बनाए गए मुख्य संदिग्धों में से एक के विस्तृत कबूलनामे से यह साफ होता है कि यह प्रोक्सी नेटवर्क यूरोपीय सीमाओं के पार किस तरह काम करता था। पोलैंड में मुकदमे का सामना कर रहे व्लादिस्लाव डी. नाम के एक यूक्रेनी नागरिक ने जांच अधिकारियों को दिए बयानों में जुलाई 2024 के दौरान की गई कई गुप्त यात्राओं की जानकारी दी। हालांकि व्लादिस्लाव डी. ने अदालत में खुद को बेकसूर बताया है, लेकिन जांचकर्ताओं के सामने उसने स्वीकार किया था कि उसने "वॉरियर" कोडनेम वाले एक अज्ञात हैंडलर के निर्देशों पर पूर्वी और मध्य यूरोप में कई लंबी कार यात्राएं की थीं। इस एजेंट और उसके हैंडलर के बीच बातचीत एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए होती थी, जहां उसे जीपीएस कोऑर्डिनेट्स और काम पूरा करने पर क्रिप्टोकरेंसी में पैसे दिए जाते थे।

व्लादिस्लाव डी. ने बताया कि उसके एक मिशन के तहत उसे लिथुआनिया के एक घने जंगल के किनारे भेजा गया था। "वॉरियर" द्वारा भेजे गए जीपीएस पिन का पीछा करते हुए वह जंगल में पहुंचा, जहां उसे बारिश से भीगा हुआ एक प्लास्टिक का बैग मिला। उस बैग के भीतर हेडफोन के तीन या चार डिब्बे रखे हुए थे, जिनके अंदर डिटोनेटर छिपाए गए थे। इन हेडफोन को उठाने से पहले, उसने एक अन्य स्थान से मिट्टी में आंशिक रूप से दबे हुए मीठी मकई के दो डिब्बे बरामद किए थे। व्लादिस्लाव डी. ने अधिकारियों को बताया कि उसे डिब्बों के भीतर छिपे रसायनों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। निर्देशों का पालन करते हुए, उसने कई घंटों की ड्राइविंग करके पोलैंड की सीमा में प्रवेश किया और हेडफोन के पैकेट को एक ग्रामीण सड़क के किनारे छोड़ दिया, जहां साइकिल पर सवार एक अज्ञात व्यक्ति आकर उन्हें उठाकर ले गया।

हैंडलर "वॉरियर" द्वारा दिए गए अगले मिशनों में विशेष ड्रोन उपकरणों की तस्करी शामिल थी। एक कार्य के लिए, व्लादिस्लाव डी. को लिथुआनिया के एक कब्रिस्तान का लोकेशन पिन भेजा गया। रात के अंधेरे में कब्रिस्तान पहुंचकर उसने प्लास्टिक के नकली फूलों के नीचे की मिट्टी खोदी, जहां से उसे भूरे रंग के टेप से लिपटा एक प्लास्टिक का कचरा बैग मिला। जब उसने बैग खोला, तो उसमें प्लास्टिक के चार छोटे प्रोपेलर और ड्रोन के ढांचे के पुर्जे मिले। निर्देशानुसार, उसने इन ड्रोन पार्ट्स को मध्य पोलैंड ले जाकर सड़क किनारे एक निर्धारित स्थान पर छोड़ दिया। इसके बाद की एक यात्रा में उसे सीधे जर्मनी जाने को कहा गया, जहां उसके हैंडलर ने डसेलडोर्फ के एक हॉस्टल के कमरे का डिजिटल एक्सेस कोड भेजा। व्लादिस्लाव डी. ने उस कमरे में ड्रोन और अन्य उपकरण छोड़ दिए। उसने स्वीकार किया कि इन सभी कामों के लिए उसे क्रिप्टोकरेंसी में 2,000 डॉलर से अधिक (लगभग 1,487 पाउंड) का भुगतान किया गया था, लेकिन उसके आकाओं ने कभी यह नहीं बताया कि इन विस्फोटकों से कहां हमला किया जाना था।

विस्फोटक सामग्री का तकनीकी विश्लेषण और विमानन सुरक्षा जोखिम

जर्मनी की जांच एजेंसियों की शुरुआती फॉरेंसिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि लाइपज़िग हवाई अड्डे पर मिले क्वॉडकोप्टर में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक सेम्टेक्स (Semtex) था। सेम्टेक्स एक हाई-ग्रेड प्लास्टिक विस्फोटक है जिसमें मुख्य घटक के रूप में आरडीएक्स (RDX) का उपयोग किया जाता है। यह रासायनिक संरचना लिथुआनिया के कब्रिस्तान से मिले डिब्बों के भीतर पाए गए आरडीएक्स से मेल खाती है। हालांकि अधिकारियों ने ड्रोन पर लदे सेम्टेक्स के सटीक वजन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील क्षेत्र में थोड़ी मात्रा में भी उच्च क्षमता वाला विस्फोटक बहुत बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

व्यावसायिक विमानों पर विस्फोटक ड्रोन के प्रभाव का विश्लेषण करते हुए, क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी की विस्फोटक विशेषज्ञ प्रोफेसर जेकी अखवान ने बताया कि यदि ड्रोन का बाहरी ढांचा धातु का बना था, तो विस्फोट के समय धातु के टुकड़े हवाई जहाज की पतली एल्यूमीनियम बॉडी को फाड़कर भीतर घुस सकते हैं। इसके विपरीत, यदि उपकरण में केवल विस्फोटक सामग्री थी और धातु के टुकड़े नहीं थे, तो खुले आसमान में होने वाले धमाके की शॉकवेव विमान की बॉडी पर केवल डेंट या मुड़ाव पैदा करेगी, बशर्ते विस्फोटक सीधे विमान के ईंधन टैंक या महत्वपूर्ण हाइड्रोलिक सिस्टम के संपर्क में न रखा गया हो। इस तकनीकी आकलन से स्पष्ट होता है कि भले ही विमानों को सीधा भारी नुकसान न पहुंचा हो, लेकिन इस घटना ने हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध लगा दी है।

सस्ते और सुलभ ड्रोन तकनीक के कारण बड़े मालवाहक विमानों की सुरक्षा करना यूरोपीय रक्षा योजनाकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एंटोनोव एन-124 जैसे आधुनिक मालवाहक विमानों में संवेदनशील ईंधन लाइनें और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम होते हैं, जो छोटे धमाकों से भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। लाइपज़िग में यूक्रेनी विमानों के पास सेम्टेक्स से लदा ड्रोन पहुंचाकर हमलावरों ने यह साबित कर दिया कि वे कड़े सुरक्षा घेरे को तोड़ने में सक्षम हैं। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि भविष्य में एयरफील्ड सुरक्षा को और अधिक कड़ा करने की जरूरत है।

रणनीतिक विश्लेषण: हाइब्रिड वॉरफेयर और भू-राजनीतिक दबाव

रक्षा मामलों के विश्लेषकों और खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस घटना के पीछे रूस का हाथ है, तो उसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर तबाही मचाने के बजाय पश्चिमी देशों में मनोवैज्ञानिक खौफ पैदा करना था। रूस की खुफिया एजेंसियों के विशेषज्ञ एंड्रॉई सोल्दातोव ने कहा कि इस घटना में मॉस्को पर संदेह करना पूरी तरह तर्कसंगत है, क्योंकि पूरे यूरोप में गुप्त तोड़फोड़ का एक स्पष्ट पैटर्न देखा जा रहा है। सोल्दातोव ने यूक्रेन को सैन्य सहायता देने वाली यूरोपीय फैक्ट्रियों में आगजनी की संदिग्ध घटनाओं और संवेदनशील सैन्य ठिकानों के ऊपर अनधिकृत ड्रोन उड़ानों का हवाला दिया। चूंकि जर्मनी, कीव को सैन्य सहायता देने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है, इसलिए वह रूसी प्रोक्सी अभियानों का प्रमुख निशाना बना हुआ है।

हवाई अड्डों में घुसपैठ की रणनीतिक वजह समझाते हुए एंड्रॉई सोल्दातोव ने कहा कि यूरोप के सबसे बड़े मालवाहक केंद्रों में से एक में विस्फोटक पहुंचाकर एक सीधा संदेश दिया गया है। पश्चिमी देशों को यह दिखाने की कोशिश की गई है कि विरोधी उनके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के बेहद करीब पहुंचकर बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। सोल्दातोव के अनुसार, इस तरह की हरकतें पश्चिमी सरकारों को चेतावनी देने के लिए की जाती हैं कि आने वाले दिनों में और गंभीर हमले हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मॉस्को द्वारा ऐसे हाइब्रिड तरीके अपनाने के पीछे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर पड़ रहा वह दबाव भी है, जो रूसी सीमाओं के भीतर यूक्रेन के लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के कारण पैदा हुआ है।

लाइपज़िग की घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संगठनों ने सतर्कता बढ़ा दी है। नेटो के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि संगठन स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है, जबकि जर्मनी की पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। दूसरी ओर, एंटोनोव एयरलाइंस के प्रतिनिधियों ने इस मामले पर काफी सतर्क प्रतिक्रिया दी है। यह कंपनी नेटो के कई लॉजिस्टिक्स अभियानों के लिए विमान सेवाएं देती है, हालांकि कंपनी के प्रवक्ताओं ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या इन उड़ानों में यूक्रेन के लिए सैन्य सामग्री भी शामिल है। कीव में एंटोनोव एयरलाइंस की एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ड्रोन की मंशा के बारे में कोई पूर्व धारणा नहीं बना रही है, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह ड्रोन वहां क्यों और किस मकसद से मौजूद था।

पूरे घटनाक्रम के भू-राजनीतिक पहलुओं का आकलन करते हुए, न्यू यूरेशिया स्ट्रेटेजीज सेंटर के जॉन लफ ने इसे रूसी हाइब्रिड हस्तक्षेप का हिस्सा बताया। जॉन लफ ने कहा कि इस तरह की गुप्त गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय देशों में युद्ध बढ़ने का डर पैदा करना और जर्मन अधिकारियों को डराकर यूक्रेन के प्रति पश्चिमी समर्थन को कमजोर करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि चूंकि यूक्रेन ने युद्ध के मैदान पर संतुलन बदला है, इसलिए आने वाले महीनों में यूरोप में इस तरह के हाइब्रिड हमलों में काफी तेजी आ सकती है, जो संपूर्ण यूरोपीय सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक समय साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

लाइपज़िग हवाई अड्डे पर क्या घटना घटी?
लाइपज़िग हवाई अड्डे पर रनवे के पास खड़े यूक्रेनी एंटोनोव मालवाहक विमानों के पास विस्फोटक से लदा एक क्वॉडकोप्टर ड्रोन मंडराता हुआ मिला, जिसके बाद बम निरोधक रोबोट ने उसके डिटोनेटर को निष्क्रिय किया।
क्या इस घटना से किसी विमान को नुकसान पहुंचा?
ड्रोन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया जिससे जमीन पर मौजूद विमान सुरक्षित रहे, लेकिन उसी दौरान उड़ान भर रहे एक डीएचएल कार्गो विमान से हवा में किसी अज्ञात वस्तु की टक्कर दर्ज की गई जिसकी जांच जारी है।
क्या इस साजिश में किसी विदेशी देश का हाथ होने का संदेह है?
जर्मनी के गृह मंत्री ने चेतावनी दी है कि इस हमले में विदेशी शक्तियों का हाथ हो सकता है, जबकि सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे यूरोप में चल रहे संदिग्ध हाइब्रिड वॉरफेयर अभियानों से जोड़ा है।
वर्ष 2024 की किस पिछली घटना से इसके तार जोड़े जा रहे हैं?
साल 2024 में इसी हवाई अड्डे के डीएचएल हब में एक पार्सल बम में आग लग गई थी, जिसके बाद यूरोप भर में लिथुआनिया और पोलैंड के रास्ते विस्फोटकों की तस्करी करने वाले प्रोक्सी नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
ड्रोन में किस प्रकार का विस्फोटक पाया गया था?
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार ड्रोन में सेम्टेक्स प्लास्टिक विस्फोटक लगा था, जिसमें आरडीएक्स (RDX) शामिल होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR