झारखंड में लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं के निरस्तीकरण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार को हाईकोर्ट से फिलहाल कोई तात्कालिक झटका नहीं लगा है। झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC और JSSC की कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय पर अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए औपचारिक नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मुख्य पीठ ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को तय की है, जिससे राज्य में हजारों अभ्यर्थियों की नजरें अब अदालत के भावी रुख पर टिक गई हैं।
याचिकाकर्ताओं का रुख और प्रभावित अभ्यर्थी
अदालत के समक्ष यह याचिका प्रार्थी सत्यांशु शुभम, संजना सिंह और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है। इस याचिका में विशेष रूप से सहायक लोक अभियोजक (APP) परीक्षा समेत विभिन्न आयोगों द्वारा आयोजित 22 परीक्षाओं को रद्द किए जाने की सरकारी अधिसूचना को कानूनी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो अभ्यर्थी पदों पर तैनात हो चुके थे या अंतिम चरण तक पहुंच चुके थे, उनके भविष्य पर इस फैसले से अनिश्चितता के काले बादल छा गए हैं। सरकार के इस एकतरफा फैसले ने उन योग्य अभ्यर्थियों को असमंजस के गहरे संकट में डाल दिया है जो वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद नियुक्त हुए थे।
पेपर लीक और 26 दिनों का ऐतिहासिक छात्र आंदोलन
इस पूरे प्रशासनिक और कानूनी विवाद की जड़ें राज्य में पिछले लंबे समय से JPSC और JSSC की परीक्षाओं में हो रही धांधली से जुड़ी हैं। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के विरोध में राजधानी रांची की सड़कों पर युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा था। राज्य के विभिन्न जिलों से आए हजारों छात्रों ने रांची के मोराबादी मैदान और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास डेरा डालकर आयोगों की कार्यप्रणाली के खिलाफ अनिश्चितकालीन मोर्चा खोल दिया था। यह छात्र आंदोलन लगभग 26 दिनों तक लगातार बिना रुके चला, जिसे झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा और प्रभावकारी छात्र प्रदर्शन माना जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक समर्थन और सरकार का फैसला
इस 26 दिवसीय आंदोलन के दौरान कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसमें कई स्थानों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने की घटनाएं भी दर्ज की गईं। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों और कई स्थानीय सामाजिक संगठनों ने छात्रों की मांगों का खुलकर समर्थन किया, जिससे यह प्रशासनिक मुद्दा एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल गया। हजारों युवाओं ने पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर राजधानी में विशाल महाजुलूस निकाले। बढ़ते जनआक्रोश और चौतरफा राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार ने SIT और CID की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए 22 विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, कुछ को स्थगित करने तथा अन्य कई परीक्षाओं को गहन जांच के दायरे में रखने की बड़ी घोषणा की थी। इसी निर्णय को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जहां सरकार को दो हफ्ते में जवाब देना होगा।



















