भारत के टेलिकॉम मार्केट में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया और राज्य स्वामित्व वाली भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने देशभर के सभी सेवा क्षेत्रों में अपने-अपने नेटवर्क का साझा इस्तेमाल करने का बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार के दिन वोडाफोन आइडिया के शीर्ष कार्यकारी अभिजीत किशोर तथा बीएसएनएल के प्रमुख रॉबर्ट जे रवि के मध्य हुई उच्चस्तरीय बातचीत में इस समझौते को अंतिम रूप प्रदान किया गया। इस नए राष्ट्रीय करार के तहत दोनों ऑपरेटर अपने उपभोक्ताओं को अंतर-सर्कल और सर्कल के भीतर रोमिंग सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे, साथ ही अपने बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी आपस में शेयर करेंगे।
ग्राहकों को मिलेगी बिना रुकावट के कनेक्टिविटी की सुविधा
इस राष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क समझौते के प्रभावी होने से दोनों ऑपरेटरों से जुड़े करोड़ों मोबाइल यूजर्स को खराब सिग्नल की समस्या से मुक्ति मिलेगी। जिन क्षेत्रों में बीएसएनएल का सिग्नल कमजोर होगा या कवरेज नहीं मिल पाएगी, वहां वोडाफोन आइडिया का इंफ्रास्ट्रक्चर बीएसएनएल यूजर्स को लगातार कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। ठीक इसी प्रकार, जिन जगहों पर वोडाफोन आइडिया का नेटवर्क कमजोर पड़ेगा, वहां बीएसएनएल के टॉवर और सिग्नल वोडाफोन आइडिया के ग्राहकों की कॉलिंग व डेटा आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। उल्लेखनीय है कि पूर्व में दोनों कंपनियों ने दिल्ली और मुंबई के सीमित मेट्रो क्षेत्रों में राजस्व शेयरिंग मॉडल पर इंट्रा-सर्कल रोमिंग की सुविधा चालू की थी, जिसे अब भारत के समस्त दूरसंचार सर्कल्स में विस्तार दिया जा रहा है।
टॉवर और ऑप्टिकल फाइबर केबल का साझा उपयोग
केवल रोमिंग ही नहीं, बल्कि यह समझौता दोनों दूरसंचार कंपनियों के एक्टिव और पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर के साझा उपयोग को भी सुगम बनाता है। इसमें मोबाइल टॉवरों के अलावा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का उपयोग शामिल है। दूरसंचार मंत्रालय (DoT) काफी समय से दोनों कंपनियों के बीच टावर इंफ्रास्ट्रक्चर की शेयरिंग बढ़ाने पर जोर दे रहा था। इसका मुख्य मकसद बीएसएनएल के टॉवर परिसरों का लाभ उठाकर वोडाफोन आइडिया द्वारा अपनी 4G और 5G सेवाओं के प्रसार को गति देना था। साल 2026 के अप्रैल महीने तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बीएसएनएल ने करीब 1,441 टॉवर वोडाफोन आइडिया को लीज पर उपलब्ध कराए थे। इस नए समझौते के लागू होने से यह इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग व्यवस्था देश के हर राज्य और सर्कल में क्रियान्वित की जाएगी।
जियो और एयरटेल की टॉवर क्षमता को कड़ी चुनौती
दोनों कंपनियों के नेटवर्क बुनियादी ढांचे को मिलाने से बाजार की प्रतिस्पर्धी तस्वीर काफी बदल जाएगी। मौजूदा समय में देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो के पास लगभग 3.33 लाख टॉवर का विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर है, जबकि दूसरे स्थान पर मौजूद भारती एयरटेल 2.92 लाख टॉवरों का संचालन करती है। अगर अलग-अलग गणना की जाए तो वोडाफोन आइडिया के पास 1.90 लाख टॉवर हैं और बीएसएनएल 1.21 लाख टॉवर का स्वामित्व रखती है। लेकिन जब ये दोनों ऑपरेटर आपस में हाथ मिला लेते हैं, तो इनका साझा नेटवर्क बढ़कर 3.11 लाख टॉवर तक पहुंच जाता है। यह आंकड़ा भारती एयरटेल की कुल टॉवर संख्या को पार कर जाता है और रिलायंस जियो के कुल टॉवर बेस के बेहद करीब खड़ा होता है। वहीं अगर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की बात करें तो वहां अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है। वोडाफोन आइडिया के पास कुल 1.65 लाख किलोमीटर की फाइबर केबल है, जबकि भारती एयरटेल के पास 5.50 लाख किलोमीटर और रिलायंस जियो के पास सबसे ज्यादा 10 लाख किलोमीटर लंबा फाइबर नेटवर्क बिछा हुआ है।
सरकारी हिस्सेदारी और पूंजीगत खर्च में भारी बचत
दूरसंचार क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि दोनों टेलीकॉम कंपनियों में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण वित्तीय हिस्सेदारी होने के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर के अनावश्यक दोहरे निर्माण को रोकना वित्तीय दृष्टि से एक सटीक निर्णय है। सरकार के पास बीएसएनएल का 100 प्रतिशत मालिकाना हक है, वहीं वोडाफोन आइडिया में भी केंद्र सरकार 49 फीसदी शेयरहोल्डिंग रखती है। टेलीकॉम एनालिस्ट फर्म एनालिसिस मेसन के विशेषज्ञ अश्विंदर सेठी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "इस समझौते से दोनों दूरसंचार ऑपरेटरों को कम लागत में जियो और एयरटेल से मुकाबला करने में काफी मदद मिलेगी।" वर्तमान में वोडाफोन आइडिया और बीएसएनएल दोनों ही नेटवर्क गुणवत्ता के पैमाने पर शीर्ष दो ऑपरेटरों से पीछे चल रही हैं। ऐसे में अपने टॉवर और फाइबर संसाधनों को आपस में जोड़ने से दोनों कंपनियां बिना अतिरिक्त भारी पूंजी निवेश किए अपनी सेवा गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकेंगी।



















