राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हाल की परीक्षाओं में सामने आई तकनीकी खामियों, पेपर में गलतियों और प्रशासनिक कमियों के बाद एजेंसी के समूचे ढांचे में बुनियादी बदलाव किया जा रहा है। इसी सिलसिले में NTA ने अपनी परीक्षा टीम से 600 विशेषज्ञों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है और उनकी जगह नए विशेषज्ञों को पैनल में शामिल किया है। इसके अलावा, प्रश्न-पत्रों की त्रुटिहीन छपाई और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चार-स्तरीय सुरक्षा जांच प्रणाली लागू की जा रही है। एजेंसी के कामकाज में पेशेवर दक्षता लाने के लिए 20 से 25 नए अधिकारियों की नियुक्ति अगले दो से तीन हफ्तों में की जाएगी। वहीं, परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए NTA के दफ्तरों को नए स्थान पर स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसकी सुरक्षा की कमान सीआईएसएफ (CISF) संभालेगी।
UGC NET जून 2026 में गलतियों के बाद शुरू हुई कार्रवाई
NTA में यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके तार हाल ही में आयोजित यूजीसी नेट (UGC NET) जून 2026 परीक्षा से जुड़े विवादों से जुड़े हैं। NTA ने 16 अगस्त को एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए यूजीसी नेट परीक्षा के तीन प्रमुख विषयों, इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की परीक्षा रद्द करके दोबारा आयोजित करने का ऐलान किया था। परीक्षा के बाद गठित जांच समिति ने पाया कि इन तीनों विषयों के प्रश्न-पत्रों में गंभीर तथ्यात्मक त्रुटियां, टाइपिंग की गलतियां और भाषा अनुवाद संबंधी कई खामियां मौजूद थीं। इस विफलता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं की साख पर सवाल खड़े होने लगे थे। परीक्षा एजेंसी की इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया और संपूर्ण परीक्षा प्रणाली का पुनर्गठन करने का सख्त निर्देश जारी किया।
600 विशेषज्ञों की छुट्टी, निजी क्षेत्र के डोमेन एक्सपर्ट्स होंगे शामिल
परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पुनः बहाल करने के लिए NTA की परीक्षा टीम में बड़ा बदलाव किया गया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, प्रश्न-पत्र तैयार करने और उनकी समीक्षा करने वाले 600 विषय विशेषज्ञों को टीम से हटा दिया गया है। इन हटाए गए विशेषज्ञों के स्थान पर नए और सक्षम विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने शिक्षा मंत्रालय को एजेंसी द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर इस पुनर्गठन की पुष्टि की।
इससे पहले सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में NTA ने अवगत कराया था कि शुरुआती कार्रवाई के तहत 50 से अधिक कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा चुका है। इसके साथ ही, संगठन में तकनीकी क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से 10 नए प्रोफेशनल पदों के लिए औपचारिक विज्ञापन जारी किया गया है, जिन पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। एजेंसी अब केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर जोर नहीं दे रही है, बल्कि साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स, प्रश्न-पत्र डिजाइनिंग और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र से विशेषज्ञ डोमेन एक्सपर्ट्स को अनुबंध पर जोड़ने की तैयारी कर रही है।
प्रश्न-पत्रों की अब चार स्तरों पर होगी सघन जांच
परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवालों की सटीकता और भाषा संबंधी शुद्धता बनाए रखने के लिए NTA ने अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में अमूलचूल परिवर्तन किया है। अब प्रश्न-पत्र तैयार होने के बाद उनकी जांच के लिए चार-स्तरीय क्वेश्चन पेपर चेकिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। पुरानी व्यवस्था में प्रश्न-पत्रों की जांच एक ही स्तर पर सीमित रहती थी, जिससे अनुवाद और टाइपिंग की गलतियां पकड़ में नहीं आ पाती थीं।
नए चार-स्तरीय ढांचे के तहत, तैयार किए गए प्रश्नों की गहन स्क्रूटनी अलग-अलग स्तरों पर चार स्वतंत्र टीमों द्वारा की जाएगी। इस बहुस्तरीय व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा से पहले ही तथ्यात्मक त्रुटियों, भाषाई गड़बड़ियों, टाइपिंग मिस्टेक और अनुवाद संबंधी विसंगतियों को पूरी तरह से पकड़कर ठीक कर लिया जाए। UGC NET जैसी संवेदनशील परीक्षाओं में हुई गलतियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है।
अगले तीन सप्ताह में 20 से 25 नए अधिकारियों की होगी तैनाती
प्रशासनिक मोर्चे पर NTA की क्षमता को मजबूत करने के लिए नए अधिकारियों की भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर एजेंसी में 20 से 25 नए अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इन अधिकारियों को परीक्षा संचालन, निगरानी और गोपनीय कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
इसके साथ ही, भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संगठन में अधिकारियों और विशेषज्ञों की चरणबद्ध नियुक्ति के लिए तैयार किए गए एक विस्तृत इंडक्शन प्लान की समीक्षा की गई है। सरकार का यह रुख साफ दर्शाता है कि सुधार का यह अभियान केवल लापरवाह कर्मचारियों को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत, उत्तरदायी और कुशल प्रशासनिक टीम के निर्माण की दिशा में काम किया जा रहा है।
CISF संभालेगी NTA कार्यालयों की सुरक्षा, नए परिसर में स्थानांतरण
पारदर्शी परीक्षा संचालन के साथ-साथ गोपनीय दस्तावेजों और प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने फैसला किया है कि NTA के प्रशासनिक कार्यालयों को नए और अधिक सुरक्षित परिसर में शिफ्ट किया जाएगा। इस स्थानांतरण कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यालयों के नए परिसर में स्थानांतरित होते ही उनकी पूरी सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अर्थात CISF के हवाले कर दी जाएगी। CISF की विशेष टुकड़ियां NTA कार्यालयों, सर्वर रूम और परीक्षा सामग्री भंडारण क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी करेंगी। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी सभी गोपनीय गतिविधियों को बाहरी हस्तक्षेप और सुरक्षा में सेंधमारी के खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रखना है।
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की समीक्षा बैठकों का दिखा असर
NTA में चल रही यह बड़ी शल्य-चिकित्सा नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद शुरू की गई गहन समीक्षा बैठकों का परिणाम है। 17 अगस्त को शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। उस बैठक में शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिया था कि परीक्षा प्रणाली के प्रत्येक चरण का व्यापक ऑडिट कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों को प्रणाली की कमियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने के लिए ठोस कार्ययोजना के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
इसके बाद मंगलवार, 18 अगस्त को आयोजित अनुवर्ती बैठक में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने NTA को निर्बाध, निष्पक्ष और सुचारू रूप से परीक्षाएं आयोजित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और सुरक्षा इंतजाम मुहैया कराने के निर्देश दिए। इसी बैठक में NTA द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों का ब्योरा सामने आया, जिसमें 600 विशेषज्ञों को हटाना, चार-स्तरीय जांच प्रणाली लागू करना और सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF को सौंपना शामिल है।



















