राशिद खान ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में रचा नया इतिहास, बने 200 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाजबराबरी और साझेदारी का नया दौर, करवा चौथ पर पतियों के उपवास रखने की अनूठी परंपरागुवाहाटी के ओडीआईएन एक्सपीरियंसेज ने जीता पूर्वी भारत के सर्वश्रेष्ठ नाइटक्लब का राष्ट्रीय खिताबडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की तैयारीपहाड़ी धाम की थाली का गौरव: बिना प्याज़-टमाटर ऐसे तैयार करें क्रीमी और सुगंधित हिमाचली चना मदरापालक और मक्के के ढोकले की आसान रेसिपी, घर पर बनाएं ढाबे जैसा स्वादस्पेन ट्रेन हादसा: 69 लोगों की मौत, युवा एथलीट और पूर्व मंत्री भी शामिलउत्तर प्रदेश पुलिस एसआई भर्ती 2026 के नतीजे घोषित, मेरिट लिस्ट और फाइनल उत्तर कुंजी जारीअमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलबिहार के ऐतिहासिक प्रतीकों को कबाड़ से जीवंत बना रहे भोजपुर के इंजीनियर प्रशांत
धनतेरस के पावन अवसर पर रहेगा शुक्र प्रदोष, जानिए कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का सही समय और पूजन का विधानत्योहार
30 अक्तू॰ 2026, 4:09 am (2 घंटे पहले)· 0

धनतेरस के पावन अवसर पर रहेगा शुक्र प्रदोष, जानिए कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का सही समय और पूजन का विधान

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष का पहला प्रदोष व्रत इस बार धनतेरस के दिन पड़ रहा है। शुक्रवार के दुर्लभ संयोग के साथ श्रद्धालु भगवान शिव, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की संयुक्त आराधना कर सकेंगे।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस वर्ष एक अत्यंत पावन और दुर्लभ आध्यात्मिक संयोग लेकर आ रही है। नवंबर 2026 की शुरुआत में पड़ने वाला पहला प्रदोष व्रत सीधे धनतेरस के महापर्व के दिन पड़ रहा है। पंचांग व्यवस्था के अनुसार शुक्रवार के दिन त्रयोदशी पड़ने के कारण इस विशेष अनुष्ठान को शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। सामान्यतः धनतेरस के पावन अवसर पर धन, वैभव और आरोग्य के लिए माता लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश तथा धनाध्यक्ष कुबेर की विशेष उपासना की जाती है। इस बार उसी दिन प्रदोष व्रत का मेल होने से भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है, जिससे साधकों को भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आत्मिक शांति और देवाधिदेव महादेव की असीम कृपा प्राप्त करने का अनुपम सुअवसर मिल रहा है।

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का सटीक समय और विस्तार

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार प्रदोष व्रत का निर्धारण सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में विद्यमान रहने वाली त्रयोदशी तिथि के आधार पर किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर 2026 को प्रातः 10 बजकर 30 मिनट पर हो रही है। यह पावन तिथि अगले दिन यानी 7 नवंबर 2026 को प्रातः 10 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगी। शास्त्रों का सुस्पष्ट नियम है कि जब त्रयोदशी तिथि का संयोग सायंकालीन प्रदोष वेला में घटित होता है, उसी दिन प्रदोष का व्रत एवं मुख्य अभिषेक अनुष्ठान किया जाता है। 6 नवंबर के दिन शाम के समय प्रदोष व्यापिनी तिथि उपस्थित होने के कारण श्रद्धालु इसी दिन अपना पूर्ण व्रत रखेंगे और सायंकालीन पूजन संपन्न करेंगे।

ये भी पढ़ें

प्रदोष काल और दिन के अन्य विशिष्ट शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत में सायंकाल के समय की जाने वाली शिव पूजा का सर्वाधिक आध्यात्मिक फल माना गया है। 6 नवंबर 2026 को प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना के लिए मुख्य शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 33 मिनट से आरंभ होकर रात्रि 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार भक्तों को महादेव की विधिपूर्वक अर्चना, रुद्राभिषेक और ध्यान के लिए कुल 2 घंटे 37 मिनट का अत्यंत अनुकूल समय प्राप्त होगा।

इसके अतिरिक्त दिनभर के अन्य महत्वपूर्ण पंचांग मुहूर्तों की बात करें तो प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 44 मिनट तक प्रभावी रहेगा। दोपहर के समय का सर्वमान्य अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक मान्य रहेगा, जो किसी भी शुभ संकल्प या खरीदारी के लिए उत्तम माना जाता है। वहीं मध्यरात्रि में देवी-देवताओं की गुप्त साधना के लिए प्रसिद्ध निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से देर रात 12 बजकर 31 मिनट तक बना रहेगा।

धनतेरस संग शुक्र प्रदोष का दुर्लभ संगम और आध्यात्मिक महत्व

इस बार शुक्र प्रदोष व्रत और धनतेरस का एक साथ होना सनातन परंपरा में बहुत ही मंगलकारी माना जा रहा है। धनतेरस के दिन जहां घर-परिवार में दरिद्रता के निवारण और समृद्धि के विस्तार के लिए मां लक्ष्मी, प्रथम पूज्य भगवान गणेश और कुबेर देव का आह्वान किया जाता है, वहीं प्रदोष व्रत जुड़ने से इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव अपने संपूर्ण परिवार के साथ आनंदित भाव में रहते हैं और जो भी साधक इस समय माता पार्वती सहित महादेव का पूजन करता है, उसे जीवन में सुख, शांति तथा अखण्ड ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह अनुष्ठान जीवन की जटिल बाधाओं को दूर कर समस्त सांसारिक एवं आत्मिक मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला माना गया है।

प्रदोष व्रत की प्रामाणिक पूजन विधि और नियम

प्रदोष व्रत का अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं को प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके उपरांत पूजा स्थल पर बैठकर भगवान शिव के समक्ष श्रद्धाभाव से व्रत का पावन संकल्प लें। दिनभर मन को शांत और सात्विक रखते हुए भगवान के नाम का स्मरण करें। इसके पश्चात शाम को सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में पुनः हाथ-पैर धोकर अथवा स्नान कर पूजा का प्रबंध करें।

सायंकालीन पूजा के समय शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, ताजे बेलपत्र, धतूरा और सुगंधित पुष्प अर्पित करें। वेदी पर धूप और शुद्ध घी का दीप प्रज्वलित करें। इसके बाद शिव पंचाक्षरी मंत्र अथवा अन्य वैदिक शिव मंत्रों का एकाग्रचित्त होकर जाप करें। पूजन के मध्य प्रदोष व्रत की पावन कथा का पठन अथवा श्रवण अनिवार्य रूप से करें। अंत में कर्पूर अथवा घी के दीपक से देवाधिदेव शिवजी की भावपूर्ण आरती उतारें और अंतःकरण से समस्त परिवार के कल्याण, आरोग्य तथा सुख-समृद्धि की मंगल प्रार्थना करें।

सवाल-जवाब

नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
यह व्रत 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा, जिसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?
त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी।
6 नवंबर को प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रदोष काल में शिव पूजा का समय शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 37 मिनट है।
इस दिन अन्य कौन से प्रमुख मुहूर्त रहेंगे?
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 11:39 से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक रहेगा।
शुक्र प्रदोष के दिन धनतेरस होने से किन देवी-देवताओं की पूजा होगी?
इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की भी विशेष पूजा की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp