ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालतमहाराष्ट्र विधान परिषद नतीजों में महायुति पिछड़ी, 5 में से 3 सीटें जीतकर एमवीए का दबदबात्योहारी मांग के बीच मिलावटखोरों पर शिकंजा, राजधानी में सैकड़ों लीटर अखाद्य सामग्री जब्तकरवा चौथ पर सास के लिए बायना तैयार करने का पारंपरिक तरीका और थाली की जरूरी सामग्रीयूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों को रखा स्थिर, पाउंड के मुकाबले कमजोर हुआ यूरोगया जी हवाई अड्डे पर एक्स-रे जांच में पकड़ा गया 110 ग्राम सोना, विमान उतरते ही कोलकाता में यात्री पकड़ायाहुंडई बायोन खरीदने से पहले जांच लें ये पांच कमियां, नहीं मिलेंगे कई अहम फीचर्सडोरडैश ने 17 अरब डॉलर में इंस्टाकार्ट के अधिग्रहण का किया ऐलान, डिलीवरी सेक्टर में बड़ा विलयनालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर बड़ा एक्शन, हॉस्टल खाली करने का फरमानउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में 6 सीटों पर भाजपा और 5 पर सपा की जीत, नतीजों पर बोले अखिलेश यादव
करवा चौथ पर सास के लिए बायना तैयार करने का पारंपरिक तरीका और थाली की जरूरी सामग्रीत्योहार
30 अक्तू॰ 2026, 12:55 am (1 घंटे पहले)· 3

करवा चौथ पर सास के लिए बायना तैयार करने का पारंपरिक तरीका और थाली की जरूरी सामग्री

करवा चौथ के पावन पर्व पर सास को सम्मानपूर्वक बायना भेंट करने की सदियों पुरानी परंपरा है। जानिए इस मांगलिक थाली में कौन से वस्त्र, सुहाग सामग्री, मिष्ठान और शगुन रखना शुभ माना जाता है।

करवा चौथ के महापर्व में निर्जला उपवास रखने, गौरी माता की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने और सायंकाल चंद्र दर्शन के उपरांत अर्घ्य देने के साथ सास को बायना भेंट करने का विधान बहुत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 में 29 अक्टूबर, गुरुवार के दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से करवा चौथ का व्रत मना रही हैं। पारिवारिक रीति-रिवाजों में सास के प्रति आदर, कृतज्ञता और स्नेह प्रकट करने के लिए बायने की विशेष थाली सजाकर दी जाती है। यदि आप भी इस अवसर पर अपनी पूज्य सास के लिए भेंट तैयार कर रही हैं, तो इस अनुष्ठान के सभी आवश्यक घटकों और इसकी महत्ता को समझना अत्यंत उपयोगी है।

करवा चौथ पर बायना भेंट करने की परंपरा क्या है?

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के पावन दिन पर बायना वास्तव में सास के प्रति अगाध आदर, कृतज्ञता और स्नेह प्रदर्शित करने का पावन उपहार है। देश के विभिन्न अंचलों और घर-परिवारों में इसे लेकर कुछ अलग-अलग नियम देखने को मिलते हैं। कई परिवारों में शाम की मुख्य पूजा थाली के साथ ही बायने की सामग्री भी सम्मिलित कर ली जाती है, जबकि अनेक स्थानों पर बायने के निमित्त पूरी तरह से एक अलग सजी हुई थाली तैयार की जाती है। इस थाली में रखी जाने वाली सामग्री मुख्य रूप से कुल परंपराओं, क्षेत्रीय मान्यताओं और घरेलू रिवाजों पर निर्भर करती है।

ये भी पढ़ें

बायने की थाली में सजाई जाने वाली अनिवार्य सामग्री

बायना तैयार करते समय मुख्य रूप से वस्त्र, सुहाग का सामान, मिष्ठान, फल और आभूषण शामिल किए जाते हैं। इन सामग्रियों का चयन करते समय कुछ मुख्य बातों का ध्यान रखा जाता है

  • थाली के भीतर साड़ी, सुरुचिपूर्ण सूट, ब्लाउज का कपड़ा अथवा चुनरी रखी जा सकती है। पारंपरिक मान्यताओं में इस दिन काले या गहरे नीले रंग के बजाय लाल, पीले अथवा नारंगी जैसे शुभ एवं मांगलिक रंगों के वस्त्रों को प्राथमिकता देने का विधान है।
  • सुहाग और शृंगार के प्रतीक के रूप में चूड़ियां, बिंदी का पत्ता, सिंदूर, पारंपरिक मेहंदी, काजल, कंघी, छोटा शीशा, लिपस्टिक तथा महावर जैसी वस्तुएं अनिवार्य रूप से थाली में सजाई जाती हैं।
  • अपनी आर्थिक सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार बहू चांदी की पायल, बिछिया अथवा किसी अन्य प्रिय आभूषण को भी इस पावन थाली का हिस्सा बना सकती है।
  • मिष्ठान के रूप में पारंपरिक मठरी, बेसन या मेवे के लड्डू, पेड़ा, घेवर या कोई अन्य सुरुचिपूर्ण पारंपरिक मिठाई अवश्य रखी जाती है।
  • मिठाई के साथ-साथ मौसमी ताजे फल और एक पानी वाला नारियल भी थाली में रखना बेहद कल्याणकारी माना जाता है, क्योंकि नारियल को सनातन परंपरा में पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना गया है।
  • घरेलू परंपराओं के मुताबिक थाली में डंठल वाला पान का पत्ता, रोली, कुमकुम, सुगंधित ताजे फूल और एक सुंदर रूमाल भी भेंट स्वरूप सजाया जा सकता है।

पूजा से जुड़े सामान और शगुन की राशि

अनेक क्षेत्रों में बायने के साथ-साथ करवा चौथ की पूजा में प्रयुक्त होने वाली मांगलिक वस्तुएं भी सास को भेंट करने का चलन है। इस सामग्री में मिट्टी या धातु का करवा, करवा के छिद्रों में लगाई जाने वाली सींकें, करवा चौथ व्रत का पारंपरिक पूजा कैलेंडर और चूरा-गट्टा जैसी वस्तुएं शामिल की जाती हैं। इसके अतिरिक्त इस थाली में श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार शगुन के रूप में कुछ नकद रुपये रखना भी एक प्रचलित और शुभ रिवाज माना जाता है।

पारिवारिक रिश्तों में इस रस्म का गहरा महत्व

धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा सामाजिक रूप से बायना देने की यह रस्म सास और बहू के रिश्ते को प्रगाढ़, मधुर और आत्मीय बनाने का एक सुंदर माध्यम है। घर की बहू अपनी सास को सादर भेंट अर्पित कर उनके चरण स्पर्श करके सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त करती है। सास भी अपनी बहू के सुखी, समृद्ध और दीर्घायु वैवाहिक जीवन की अंतःकरण से मंगलकामना करती हैं। इस पारंपरिक अनुष्ठान में उपहार के भौतिक मूल्य अथवा आभूषणों की कीमत से कहीं अधिक परिवार के आपसी प्रेम, पवित्र भावनाओं और पारिवारिक मर्यादा का महत्व होता है।

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत किस तारीख और दिन को रखा जा रहा है?
साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार के दिन रखा जा रहा है।
करवा चौथ पर बायने की थाली में कौन से रंग के कपड़े रखना श्रेष्ठ माना जाता है?
बायने की थाली में लाल, पीले अथवा नारंगी जैसे मांगलिक रंगों की साड़ी, सूट या चुनरी रखना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
बायने में शृंगार सामग्री के रूप में क्या-क्या शामिल करना चाहिए?
शृंगार सामग्री में चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, काजल, कंघी, शीशा, लिपस्टिक और महावर जैसी वस्तुएं रखी जाती हैं।
क्या बायने की थाली में नारियल रखना जरूरी होता है?
हां, थाली में मौसमी फलों के साथ नारियल रखना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि नारियल को पूर्णता और मांगलिकता का प्रतीक माना गया है।
बायने के साथ पूजा से जुड़ी कौन सी चीजें भेंट की जा सकती हैं?
बायने के साथ करवा, सींकें, पूजा का कैलेंडर, चूरा-गट्टा और शगुन के कुछ रुपये रखे जा सकते हैं।
सास को बायना देने की रस्म का मुख्य महत्व क्या है?
इस रस्म का मुख्य महत्व सास-बहू के रिश्ते में सम्मान, अपनापन और स्नेह बढ़ाना है, जहां बहू उपहार देकर सास से सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp