आज यानी 8 नवंबर 2026 को देश भर में दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस उत्सव को लक्ष्मी-गणेश पूजन के रूप में भी बहुत धूमधाम से आयोजित किया जाता है। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दीपों का यह पर्व आता है। इस दिन केवल मां लक्ष्मी ही नहीं, बल्कि भगवान गणेश, कुबेर देव, माता सरस्वती और प्रभु श्री राम की उपासना का भी खास विधान है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि दिवाली के मौके पर विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पूरे साल आर्थिक संपन्नता का वास होता है। आइए जानते हैं कि इस दिन विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन क्यों किया जाता है और दीपावली मनाने के पीछे कौन-कौन सी पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं।
भगवान राम के अयोध्या लौटने की कथा
धार्मिक मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। इसके बाद वह कार्तिक अमावस्या के दिन माता सीता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ १४ वर्ष का लंबा वनवास काटकर वापस अयोध्या लौटे थे। प्रभु राम के अयोध्या वापस आने की इस खुशी में और उनके स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने पूरे राज्य को मिट्टी के दीयों की रोशनी से जगमगा दिया था। ऐसा माना जाता है कि तभी से हर साल लोग दीए जलाकर दिवाली का यह पर्व मनाने लगे।
समुद्र मंथन और माता लक्ष्मी का जन्मोत्सव
दीपावली से जुड़ी दूसरी प्रमुख पौराणिक कथा माता लक्ष्मी के प्रकट होने से जुड़ी है। कथा के मुताबिक, दीपावली का यह त्योहार असल में मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव की खुशी में भी मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया जा रहा था, तब कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही मां लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और परिवार में हमेशा खुशहाली का माहौल बना रहता है।



















