दिवाली उत्सव के दौरान घर के आंगन और मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली सजाने की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा रही है। अधिकांश लोग इस त्योहार पर सजावट के लिए बाजार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के कृत्रिम और केमिकल युक्त रंगों का सहारा लेते हैं। हालांकि, गाजीपुर स्थित पीजी कॉलेज में होम साइंस की पढ़ाई कर रही छात्राओं ने इस बार एक अनोखी और पर्यावरण के अनुकूल पहल की है। उन्होंने दैनिक इस्तेमाल की घरेलू वस्तुओं और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके बेहद आकर्षक रंगोली तैयार की है। इस रचनात्मक प्रयास की सबसे खास बात यह है कि पूरी सजावट का कुल खर्च मात्र 50 रुपये से 100 रुपये के बीच आता है, जिससे त्योहार की सजावट जेब पर भारी नहीं पड़ती।
रसोई के सामान और चौक की मदद से बनाएं सुंदर पैटर्न
छात्राओं ने अपनी रंगोली के डिजाइनों में गेहूं का आटा, मैदा और सूजी जैसी रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों का इस्तेमाल किया है। छात्रा इशिका ने बताया कि हर बार बाजार से केमिकल वाले रंग खरीदना जरूरी नहीं होता, बल्कि घर की रसोई में मौजूद बुनियादी सामग्रियों से भी आकर्षक और किफायती सजावट की जा सकती है। रंगोली को सही आकार देने की तकनीक पर खुशी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रंगोली बनाने की शुरुआत चौक से फर्श पर हल्की आउटलाइन खींचकर करनी चाहिए, ताकि डिजाइन का संतुलन बना रहे। इसके बाद बारीक हिस्सों में रंग या सामग्री भरने के लिए सामान्य चम्मच और छलनी का प्रयोग किया जा सकता है। यदि रंगोली में दीपक या अन्य विशेष आकृतियां बनानी हों, तो चम्मच के पिछले हिस्से से उन्हें फिनिशिंग दी जा सकती है। नियमित अभ्यास और डिजाइन के आकार के आधार पर लगभग एक घंटे में एक बेहतरीन रंगोली पूरी तरह तैयार हो जाती है।
चूने के उपयोग के फायदे और जरूरी सावधानियां
सफेद रंग की रेखाएं खींचने और बेस तैयार करने के लिए छात्राओं ने साधारण चूने का इस्तेमाल किया है। खुशी के अनुसार, एक मानक रंगोली के लिए लगभग 1 किलो चूने की आवश्यकता होती है। चूने का उपयोग सजावट के साथ-साथ स्वच्छता के लिहाज से भी काफी फायदेमंद होता है। चूने के प्राकृतिक गुणों के कारण घर के आसपास कीड़े-मकोड़े और अन्य हानिकारक कीट दूर रहते हैं। हालांकि, चूने से रंगोली बनाते समय कुछ सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक हैं। चूने को छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखना चाहिए। साथ ही, इसका इस्तेमाल करते समय इस बात का ध्यान रखें कि चूना त्वचा या आंखों के सीधे संपर्क में न आए, क्योंकि इससे जलन या असुविधा हो सकती है।
फूलों और सफेद बालू से प्राकृतिक सजावट
पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देते हुए छात्रा सामिया परवीन ने गेंदे के ताजे फूलों का उपयोग करके खूबसूरत रंगोली तैयार की। उन्होंने बताया कि एक औसत आकार की रंगोली बनाने के लिए लगभग आधा किलो से एक किलो गेंदे के फूल पर्याप्त होते हैं। फूलों की रंगोली का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे दिवाली के दिन केवल आधे घंटे में आसानी से सजाया जा सकता है। वहीं, छात्रा अनु ने सफेद बालू का उपयोग कर रंगोली के नए डिजाइन प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सफेद बालू में अलग-अलग रंगों को मिलाकर कई तरह के अनोखे पैटर्न बनाए जा सकते हैं। अनु ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कम समय में सजावट करना चाहता है, तो महज आधा किलो गेंदे के फूलों से भी एक बेहतरीन आकृति तैयार की जा सकती है।
केमिकल मुक्त त्योहार मनाने का संदेश
इस पूरी पहल के पीछे छात्राओं का मुख्य उद्देश्य लोगों को केमिकल मुक्त और प्राकृतिक तरीकों से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित करना था। छात्रा नाज इकबाल पिछले दो-तीन दिनों से इस प्रोजेक्ट की तैयारी में जुटी हुई थीं। छात्राओं के समूह का कहना है कि वे पिछले 5-6 वर्षों से लगातार रंगोली बना रही हैं। इस बार उन्होंने एक समूह के रूप में एकजुट होकर घर की रोजमर्रा की चीजों और प्राकृतिक सामग्रियों का सही तालमेल बिठाया। उनका यह प्रयास साबित करता है कि बिना अधिक पैसे खर्च किए और बिना केमिकल का उपयोग किए भी त्योहारों पर घर को खूबसूरती से सजाया जा सकता है।



















