अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले का आयोजन इस वर्ष 10 नवंबर से अजमेर जिले के पुष्कर क्षेत्र में शुरू होने जा रहा है। पारंपरिक रूप से ऊंटों और घोड़ों के लिए पहचाने जाने वाले इस सांस्कृतिक और व्यापारिक मेले में इस बार बकरियां भी अपनी सुंदरता और शारीरिक बनावट का जलवा बिखेरती नजर आएंगी। पशुपालकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और स्थानीय नस्लों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस मेले में बकरी सुंदरी प्रतियोगिता का विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिससे पुष्कर मेले में एक नया आकर्षण जुड़ेगा।
पुष्कर सुंदरी का खिताब और चयन के मानदंड
इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण 'पुष्कर सुंदरी' का खिताब रहेगा, जो सबसे सुंदर और शारीरिक रूप से सुगठित बकरी को प्रदान किया जाएगा। प्रतियोगिता के दौरान बकरियों के चयन के लिए उनके रंग-रूप, शारीरिक संरचना, कद-काठी और समग्र आकर्षण को मानक बनाया गया है। इसमें विशेष रूप से राजस्थान की दो प्रसिद्ध नस्लों, सिरोही और सोजत, की बकरियां हिस्सा लेंगी। इस मंच के माध्यम से स्थानीय पशुपालक अपनी बकरियों की विशेषताओं और उनकी नस्ल की गुणवत्ता को देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।
परंपरा की वापसी और प्रमुख नस्लों का महत्व
पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ. नवीन परिहार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पुष्कर मेले में बकरियों की सौंदर्य प्रतियोगिताएं बहुत पहले आयोजित की जाती थीं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह परंपरा बंद हो गई थी, जिसे अब दोबारा शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अजमेर और नागौर जिले मुख्य रूप से सिरोही नस्ल की बकरियों के संरक्षण व पालन के लिए जाने जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ पाली, सिरोही और भीलवाड़ा जैसे जिलों के ग्रामीण इलाकों में सोजत और सिरोही दोनों ही नस्लों के पशुपालक बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि की उम्मीद
डॉ. नवीन परिहार के अनुसार इन प्रतियोगिताओं के आयोजन से ग्रामीण पशुपालकों में बेहतर नस्ल संवर्धन के प्रति रुचि और प्रतिस्पर्धात्मक भावना जागृत होगी। जब पशुपालक अपनी बकरियों की अच्छी नस्लों का प्रदर्शन करेंगे, तो इससे उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह पहल न केवल पशुपालकों का उत्साह बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका, रोजगार और आय के नए अवसरों को सृजित करने में भी मददगार साबित होगी।
नागौरी बैल और बछड़ों के लिए भी रहेंगी विशेष स्पर्धाएं
पुष्कर मेले में केवल ऊंट, घोड़े और बकरियां ही ध्यान का केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि नागौरी बैलों की जोड़ियों और बछड़ों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं को पशुओं की उम्र और शारीरिक विकास के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें अदंत (दूध के दांत वाले बछड़े), चार दांत और छह दांत की श्रेणियों में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इस प्रकार का विभाजन पशुपालकों को अपने पशुओं की सही उम्र और क्षमता के अनुसार प्रतिस्पर्धा में उतारने का अवसर प्रदान करता है।



















