राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले भाई और बहन के अटूट रिश्ते से जुड़ा पारंपरिक 'वीर फूली' पर्व बड़े ही भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया गया। पाली जिले के सोमेसर कस्बा समेत आसपास के दर्जनों गांवों में बहनों ने अपने भाइयों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हुए दिनभर निर्जला उपवास रखा। यह त्योहार मारवाड़ की लोक संस्कृति का एक अनूठा उदाहरण है, जहाँ बहनें अपने भाई पर आने वाली हर विपत्ति और संकट को दूर करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ यह पूजा-अर्चना और व्रत करती हैं।
भात भरने की अनोखी परंपरा और व्रत का समापन
वीर फूली पर्व की सबसे खास बात इसकी अनूठी शाम की परंपरा है। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम के समय भाई अपनी पत्नी यानी भाभी के साथ विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन, पकवान और मिठाइयां लेकर अपनी बहन के घर पहुंचता है। मारवाड़ी संस्कृति में इसे 'भात' भरना कहा जाता है। भाई और भाभी द्वारा लाया गया भोजन और मिठाइयां ग्रहण करने के पश्चात ही बहनें अपना व्रत खोलती हैं। इस अवसर पर कई बहनें स्वयं भाइयों के घर जाकर तो कई भाई बहनों के घर जाकर भोजन और मिठाई पहुंचाकर इस पावन परंपरा को पूरी आत्मीयता से निभाते हैं। माना जाता है कि इस परंपरा से परिवार में आपसी प्रेम और सौहार्द में वृद्धि होती है।
इन गांवों में देखी गई त्योहार की विशेष रौनक
पाली जिले के सोमेसर क्षेत्र के अलावा आसपास की कई ग्राम पंचायतों और कस्बों में वीर फूली पर्व की जबरदस्त रौनक देखने को मिली। निम्बाड़ा, बूसी, टेवाली, जवाली, सोडावास, भादरलाऊ, इंदरवाड़ा, देवली पाबूजी, सावलता, खोंड, सापूनी, प्रतापगढ़, गुड़ाजेतसिंह, रूंगड़ी और डुठारिया जैसे गांवों में इस पर्व को लेकर महिलाओं और बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। सुबह से ही घरों में पूजा-पाठ की तैयारियां शुरू हो गई थीं और शाम होते ही गांव की गलियां ढोल-नगाड़ों और मंगल गीतों से गुंजायमान हो उठीं।
पारंपरिक स्नेह और पारिवारिक आत्मीयता का प्रतीक
मारवाड़ की पावन धरा पर वैसे तो तीज, करवाचौथ और अहोई अष्टमी जैसे कई व्रत पति और संतान की लंबी उम्र के लिए रखे जाते हैं, लेकिन वीर फूली पर्व विशेष रूप से केवल भाइयों की रक्षा और मंगलकामना को समर्पित है। इस दिन बहनें पूजा-अर्चना कर अपने भाइयों के जीवन में आने वाली हर बाधा को दूर करने की प्रार्थना ईश्वर से करती हैं। यह पर्व न केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करता है, बल्कि पारिवारिक संबंधों, सामाजिक समरसता और भाईचारे की भावना को भी नई गहराई प्रदान करता है।



















