पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चले तनाव से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बना दबाव अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में 12.42 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बढ़त के साथ 729.33 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस अभूतपूर्व बढ़ोतरी के साथ भारत दुनिया भर में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में चौथे पायदान पर मजबूती से कायम है और उसका वित्तीय रिजर्व अमेरिका के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक हो गया है।
फॉरेक्स रिजर्व के अलग-अलग घटकों का विवरण
21 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान केंद्रीय बैंक के खजाने में हर मोर्चे पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस उछाल का मुख्य श्रेय विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) को जाता है, जो समीक्षाधीन सप्ताह में 9.48 अरब डॉलर बढ़कर 591.33 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के मूल्य में अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्य परिवर्तन का असर भी शामिल होता है।
इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक के स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) का कुल मूल्य 2.80 अरब डॉलर बढ़कर 114.22 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास मौजूद विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में भी 11.2 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 18.85 अरब डॉलर हो गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की जमा भंडार स्थिति 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.92 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
नीतिगत प्रयास और नए रिकॉर्ड तक का सफर
विदेशी मुद्रा भंडार का यह नया शिखर हाल के हफ्तों में लगातार दर्ज की गई तेजी का परिणाम है। 21 अगस्त वाले सप्ताह से ठीक एक हफ्ते पहले देश का फॉरेक्स रिजर्व 9.90 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 716.91 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। इससे पहले भारत का पिछला उच्चतम रिकॉर्ड 728.49 अरब डॉलर का था, जो 27 फरवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह में दर्ज हुआ था। वर्तमान 729.33 अरब डॉलर का आंकड़ा उस पिछले ऑल-टाइम हाई के रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।
देश के मुद्रा भंडार में इस महत्वपूर्ण सुधार का श्रेय केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए रणनीतिक कदमों को जाता है। विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए एफसीएनआर (बी) जमा योजनाओं से जुड़ी विशेष पहल की गई थी। रियायती दरों पर स्वैप (अदला-बदली) उपायों के तहत देश को अब तक कुल 72 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हो चुकी है, जिसने फॉरेक्स रिजर्व को नए रिकॉर्ड पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह स्थिति उस समय से बिल्कुल अलग है जब आयात महंगा होने के कारण पीएम मोदी को देशवासियों से सोना खरीदने पर नियंत्रण रखने और ईंधन का उपयोग समझदारी से करने की अपील करनी पड़ी थी।
वैश्विक रैंकिंग में भारत और अन्य देशों की स्थिति
दुनिया के शीर्ष विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची पर नजर डालें तो चीन 3.42 ट्रिलियन डॉलर के विशाल रिजर्व के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है। जापान 1.29 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार के साथ दूसरे पायदान पर स्थित है, जबकि यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड लगभग 1.09 ट्रिलियन डॉलर के फॉरेक्स रिजर्व के साथ तीसरे स्थान पर है।
भारत 729.33 अरब डॉलर के साथ चौथे पायदान पर मजबूती से स्थापित है। इसकी तुलना में अमेरिका का विदेशी मुद्रा भंडार 253 अरब डॉलर है। इस प्रकार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अमेरिका के कुल रिजर्व के मुकाबले तीन गुना अधिक हो चुका है।



















