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कोटा में रक्षाबंधन पर भावुक दृश्य, अपनों से दूर कोचिंग छात्राओं ने गुरुओं को बांधी राखीत्योहार
27 अग॰ 2026, 4:11 pm (72 दिन पहले)· 2

कोटा में रक्षाबंधन पर भावुक दृश्य, अपनों से दूर कोचिंग छात्राओं ने गुरुओं को बांधी राखी

कोटा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहीं छात्राओं ने इस रक्षाबंधन पर अपने शिक्षकों को राखी बांधकर अनोखी मिसाल पेश की। घर नहीं जा पाने पर छात्राओं ने गुरुओं को भाई माना, वहीं शिक्षकों ने भी उनकी सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य का संकल्प लिया।

देशभर में अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान के कोटा शहर में इस बार रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार एक बेहद अनोखे और भावुक माहौल में संपन्न हुआ। भारत के कोने-कोने से आकर यहां डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हजारों कोचिंग विद्यार्थियों के लिए यह पर्व अपनों से दूर होने के मलाल को मिटाने वाला साबित हुआ। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में दिन-रात जुटी अनेक छात्राएं विभिन्न कारणों से इस बार अपने घर नहीं जा सकी थीं। अपने परिजनों और भाइयों की अनुपस्थिति को भूलकर इन छात्राओं ने कोटा में पढ़ा रहे अपने कोचिंग शिक्षकों को ही अपना भाई और अभिभावक मानते हुए उनकी कलाई पर स्नेह की राखी बांधी। इस अनूठी पहल ने शिक्षा नगरी कोटा में गुरु-शिष्य के रिश्ते को नया आयाम देते हुए एक बार फिर पारिवारिक माहौल की अद्भुत मिसाल कायम की है।

कोटा के कोचिंग हब बोरखेड़ा, तलवंडी और कांगड़ी में दिखा उत्साह

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कोटा के प्रमुख कोचिंग क्षेत्रों में सुबह से ही जबरदस्त चहल-पहल और उत्सव का माहौल देखने को मिला। बोरखेड़ा, तलवंडी, कांगड़ी और आसपास के तमाम इलाकों में स्थित कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों में छात्र-छात्राओं के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था। देश के विभिन्न प्रांतों से आए विद्यार्थियों ने त्योहार की परंपराओं को पूरी आत्मीयता से निभाया। जो छात्र-छात्राएं किसी वजह से अपने गृहनगर नहीं जा सके थे, उन्होंने अपने गुरुजनों और सहपाठियों के साथ मिलकर इस कमी को दूर किया। कई छात्राओं ने आधुनिक डिजिटल और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करते हुए अपने दूर स्थित भाइयों से संवाद किया और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भेजीं। वहीं दूसरी ओर, कोचिंग परिसरों में छात्राओं ने अपने शिक्षकों तथा साथी छात्रों की कलाई पर रक्षासूत्र सजाकर इस पर्व की पवित्रता और गौरव को और अधिक बढ़ा दिया।

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शिक्षकों ने बेटियों को दिया सुरक्षा और मार्गदर्शन देने का वचन

विद्यार्थियों द्वारा दिखाई गई इस आत्मीय पहल से अभिभूत होकर कोचिंग शिक्षकों ने भी अपनेपन की मिसाल पेश की। शिक्षकों ने दूर-दराज के राज्यों से पढ़ाई करने कोटा आई इन बेटियों को महज एक शिक्षार्थी नहीं, बल्कि अपने ही परिवार का अटूट हिस्सा माना। गुरुओं ने कलाई पर रक्षासूत्र बंधवाने के बाद सभी छात्राओं को जीवन के हर मोड़ पर सुरक्षा प्रदान करने, सही मार्गदर्शन देने और उनके उज्ज्वल भविष्य का दृढ़ संकल्प लिया। इस दौरान भावुक हुए शिक्षकों ने स्नेही अभिभावक का फर्ज निभाते हुए सभी छात्राओं को मिठाइयां खिलाईं और उपहार के रूप में टॉफियां, उपहार तथा ढेरों आशीर्वाद प्रदान किए। गुरु और शिष्य के इस पावन और समर्पित रिश्ते की यह अनूठी बानगी देखकर वहां मौजूद हर शख्स का मन भावुक हो उठा। यह क्षण इस बात का गवाह बना कि यदि सिर पर गुरु का साया और संबल हो, तो अपनों से दूर रहने का अहसास भी पल भर में छूमंतर हो जाता है।

शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बाजारों में उमड़ी खरीदारों की भीड़

एक तरफ जहां कोचिंग परिसरों में रिश्तों की गरमाहट महसूस की गई, वहीं दूसरी तरफ कोटा शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजारों में रक्षाबंधन की अद्भुत रौनक छाई रही। शहर की प्रमुख सड़कों और चौराहों पर स्थित दुकानें आकर्षक और सुंदर राखियों से पूरी तरह सजी हुई नजर आईं। बाजारों में पारंपरिक रेशमी धागों से लेकर नए दौर की फैंसी राखियों, विशेष गिफ्ट पैक्स और स्वादिष्ठ मिठाइयों की बिक्री काफी तेज रही। दुकानों पर उमड़ी खरीदारों की भारी भीड़ इस बात की तस्दीक कर रही थी कि महंगाई का असर या अपनों से दूरी का दर्द चाहे जितना भी हो, लेकिन इस पावन पर्व के प्रति लोगों के मन में उत्साह और उमंग कभी कम नहीं हो सकती। कोटा के मुख्य बाजारों से लेकर कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों के कमरों तक, हर ओर केवल रक्षाबंधन की खुशियां, मिठास और भाईचारे का संदेश ही बिखरा नजर आया।

सवाल-जवाब

कोटा में रक्षाबंधन का त्योहार किस तरह अलग अंदाज में मनाया गया?
कोटा में घर न जा पाने वाली कोचिंग छात्राओं ने अपने शिक्षकों को भाई और अभिभावक मानकर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और त्योहार मनाया।
कोटा के किन प्रमुख कोचिंग इलाकों में रक्षाबंधन का उत्साह देखने को मिला?
बोरखेड़ा, तलवंडी और कांगड़ी जैसे प्रमुख कोचिंग क्षेत्रों और आसपास के हॉस्टलों में विद्यार्थियों का भारी उत्साह देखा गया।
शिक्षकों ने छात्राओं को राखी बांधने के बदले क्या वचन दिया?
शिक्षकों ने छात्राओं को अपनी बेटी और परिवार का हिस्सा मानते हुए उनकी सुरक्षा, मार्गदर्शन और उज्ज्वल भविष्य का दृढ़ संकल्प लिया।
जो छात्राएं घर नहीं जा सकीं, उन्होंने अपने दूर बैठे भाइयों से कैसे संपर्क किया?
कई छात्राओं ने डिजिटल और ऑनलाइन वीडियो कॉल के जरिए अपने दूर स्थित भाइयों से बात की और उन्हें शुभकामनाएं भेजीं।
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