मिथिलांचल में आस्था और सेहत के अनूठे संगम के रूप में मनाया जाने वाला भद्र रवि व्रत इस साल 23 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रहा है। इसे क्षेत्र में अनुन रवि व्रत के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद महीने के पहले रविवार से शुरू होने वाला यह पावन अनुष्ठान 13 सितंबर 2026 को संपन्न होगा। इस व्रत की कुल समय सीमा भाद्र माह की संक्रांति की स्थिति के आधार पर तय की जाती है, जिसके अनुसार रविवार के व्रत रखे जाते हैं।
नमक त्याग के पीछे छिपा स्वास्थ्य का विज्ञान
इस धार्मिक अनुष्ठान के पीछे गहरी वैज्ञानिक सोच भी समाहित है। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर और कुलानुशासक डॉ. कुणाल कुमार झा ने इस व्रत के वैज्ञानिक पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भाद्रपद के महीने में भीषण गर्मी और उमस का माहौल रहता है, जिससे शरीर में रक्तचाप बढ़ने की आशंका काफी अधिक हो जाती है। इसी मौसमी जोखिम को ध्यान में रखते हुए हमारे पूर्वजों ने इस दौरान भोजन में नमक का पूरी तरह त्याग करने का नियम बनाया था।
पूजा की विधि और धार्मिक मान्यताएं
व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन निर्जला या बिना नमक के उपवास रखती हैं। दिन भर भगवान सूर्य देव की विधि-विधान से उपासना की जाती है। शाम को सूर्यास्त के पश्चात ही व्रती महिलाएं फलाहार ग्रहण करती हैं। मिथिलांचल की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कठोर नियम का पालन करने से परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है, साथ ही परिजनों का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।
परंपरा और कल्याण का अनूठा संगम
23 अगस्त से 13 सितंबर तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक जीवनशैली और स्वास्थ्य सुरक्षा की मिसाल है। दरभंगा सहित संपूर्ण मिथिलांचल की महिलाएं इस पावन अवसर को लेकर काफी उत्साहित हैं और नियमपूर्वक सूर्य देव की आराधना की तैयारियों में जुट गई हैं।



















