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राजस्थान के उदयपुर में शुरू हुआ पारंपरिक झूला पर्व, जगन्नाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाबत्योहार
1 अग॰ 2026, 11:53 pm (60 दिन पहले)· 0

राजस्थान के उदयपुर में शुरू हुआ पारंपरिक झूला पर्व, जगन्नाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

राजस्थान के उदयपुर स्थित 370 साल पुराने जगदीश मंदिर में श्रावण मास के उपलक्ष्य में झूला उत्सव शुरू हो गया है, जहां भगवान जगन्नाथ के विशेष दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

पवित्र श्रावण मास के आगमन के साथ ही राजस्थान के ऐतिहासिक शहर उदयपुर में स्थित सुप्रसिद्ध जगदीश मंदिर में वार्षिक झूला उत्सव अत्यंत श्रद्धा और उमंग के साथ प्रारंभ हो चुका है। मॉनसून के इस पावन अवसर पर मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक अद्भुत धार्मिक छटा दिखाई दे रही है। भगवान जगदीश के दर्शन और उन्हें झूला झुलाने की परंपरा का आनंद लेने के लिए तड़के मंगला आरती से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का अनवरत आगमन बना हुआ है, जिससे पूरा वातावरण मंत्रमुग्ध कर देने वाले आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया है।

रंग-बिरंगे पुष्पों से श्रृंगार और बाल स्वरूप में प्रभु का पूजन

झूला पर्व की अवधि के दौरान मंदिर प्रशासन और स्थानीय सेवादारों द्वारा परिसर को मनमोहक ढंग से सजाया गया है। ताजे प्राकृतिक फूलों की सुगंधित लड़ियों, भव्य विद्युत झालरों और पारंपरिक सजावटी तत्वों से संपूर्ण मंदिर प्रांगण जगमगा उठा है। इस विशेष आयोजन के तहत भगवान जगदीश को एक सुंदर एवं कलात्मक झूले पर विराजमान किया जाता है। पुजारियों के अनुसार, इस पर्व में प्रभु को बाल्यावस्था के रूप में मानकर उनकी सेवा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक दिन भगवान का अनोखा और दर्शनीय श्रृंगार किया जाता है, जिसमें कभी उन्हें सुगंधित पुष्पों की मालाओं से संवारा जाता है तो कभी पारंपरिक रेशमी वस्त्रों तथा बहुमूल्य आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन विशेष भोग, महापूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।

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मॉनसून में झूला झुलाने की मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

वैष्णव परंपरा में श्रावण का पूरा महीना भगवान विष्णु तथा उनके अवतार श्री हरि कृष्ण की उपासना के लिए अत्यंत उत्तम और फलदायी माना जाता है। सनातन मान्यताओं के अनुसार, वर्षा ऋतु के दौरान प्रभु को झूला झुलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और परिवार में सुख, शांति तथा आर्थिक समृद्धि का आगमन होता है। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि झूला उत्सव केवल एक औपचारिक अनुष्ठान न होकर भक्त और ईश्वर के बीच के निश्चल प्रेम व वात्सल्य का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि स्थानीय निवासियों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आने वाले पर्यटक भी इस सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने के लिए उदयपुर खिंचे चले आते हैं। इस अवसर पर दर्शनार्थी अपने परिजनों के कल्याण और क्षेत्र में उत्तम वर्षा की कामना लेकर भगवान के चरणों में शीश नवाते हैं।

1651 में निर्मित मंदिर का इतिहास और इंडो-आर्यन स्थापत्य

उदयपुर का जगदीश मंदिर अपनी प्राचीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अप्रतिम स्थापत्य कला के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। लगभग 370 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण मेवाड़ साम्राज्य के प्रतापी महाराणा जगत सिंह प्रथम ने सन 1651 में करवाया था। इंडो-आर्यन वास्तुकला शैली में निर्मित यह मंदिर अपनी अनोखी नक्काशी के लिए जाना जाता है। इसका गगनचुंबी शिखर और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक कलाकृतियां यहां आने वाले हर व्यक्ति को आश्चर्यचकित कर देती हैं। उत्सव के दौरान प्रतिदिन संध्या समय होने वाली भव्य आरती में सैकड़ों भक्त हिस्सा लेते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में गूंजने वाले मधुर भजन-कीर्तन, शंखनाद और घंटियों की स्वर लहरियां श्रद्धालुओं को एक अलौकिक और अविस्मरणीय आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती हैं।

मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटकों का तांता

पूरे श्रावण मास तक चलने वाला यह झूला उत्सव उदयपुर की समृद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर का एक अभिन्न अंग बन चुका है। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस पावन परंपरा में सम्मिलित होते हैं और भगवान जगन्नाथ स्वामी के अलौकिक दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। यह आयोजन न केवल स्थानीय जनमानस की अगाध आस्था का केंद्र है, बल्कि झीलों की नगरी उदयपुर में आने वाले पर्यटकों के लिए भी राजस्थान की जीवंत संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को करीब से समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।

सवाल-जवाब

Udaipur के Jagdish Temple में कौन सा उत्सव मनाया जा रहा है?
उदयपुर के जगदीश मंदिर में श्रावण मास के उपलक्ष्य में पारंपरिक झूला उत्सव मनाया जा रहा है, जिसमें भगवान को सुसज्जित झूले में विराजित किया जाता है।
Jagdish Temple का निर्माण कब और किसने करवाया था?
करीब 370 साल पुराने इस मंदिर का निर्माण मेवाड़ के महाराणा जगत सिंह प्रथम ने सन 1651 में करवाया था।
Jagdish Temple किस वास्तुकला शैली में बना है?
यह ऐतिहासिक मंदिर इंडो-आर्यन वास्तुकला शैली में निर्मित है, जो अपने ऊंचे शिखर और बारीक पत्थरों की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
श्रावण मास में भगवान को झूला झुलाने की क्या मान्यता है?
मान्यता है कि वर्षा ऋतु में भगवान को झूला झुलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
झूला उत्सव के दौरान मंदिर में क्या विशेष आयोजन होते हैं?
इस दौरान भगवान का प्रतिदिन प्राकृतिक फूलों और पारंपरिक वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया जाता है, साथ ही भजन-कीर्तन और शाम की भव्य आरती का आयोजन होता है।
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