दीपावली के महापर्व से ठीक दो दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस का त्योहार इस बार खरीदारी के कई विशेष योग लेकर आया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशिष्ट दिन पर नई वस्तुओं, मूल्यवान धातुओं और दैनिक उपयोग के सामान की खरीदारी करने से परिवार में सुख और समृद्धि का विस्तार होता है। ऐसी जनआस्था है कि इस पावन तिथि पर खरीदी गई चल अथवा अचल संपत्ति में निरंतर वृद्धि होती रहती है। इस पर्व के अवसर पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी, धन के अधिपति कुबेर और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने वाले देव यमराज की पूजा अर्चना की जाती है।
धनतेरस पर खरीदारी की प्रमुख वस्तुएं
पर्व के दिन विशेष चीजों को घर लाना मंगलकारी माना गया है। परंपराओं के अनुसार धनतेरस के दिन लोग अपनी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार निम्नलिखित वस्तुओं का क्रय करते हैं
- आभूषण और धातुएं: सोने और चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदना समृद्धि का परिचायक माना जाता है।
- रसोई के नए बर्तन: पीतल, तांबा, चांदी अथवा स्टील के नए बर्तनों की खरीद घर में अन्नपूर्णा का वास सुनिश्चित करती है।
- झाड़ू की खरीदारी: लोक परंपरा में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, इसलिए इसे घर लाना दरिद्रता दूर करने वाला माना जाता है।
- वाहन एवं इलेक्ट्रॉनिक्स: नए दोपहिया या चारपहिया वाहन, टीवी, फ्रिज और अन्य उपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीदारी भी इस दिन बेहद शुभ मानी जाती है।
- पूजन सामग्री: दीपावली की मुख्य पूजा हेतु भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की नवीन प्रतिमाएं, साबुत धनिया और खड़ा नमक खरीदना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
तिथि विस्तार और खरीदारी का मुख्य समय
पंचांग गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होकर 7 नवंबर की सुबह 10:49 बजे तक प्रभावी रहेगी। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, तिथि का विस्तार दो दिन रहने के कारण खरीदारी का अवसर दोनों दिनों में उपलब्ध रहेगा। जो श्रद्धालु 6 नवंबर को खरीदारी करना चाहते हैं, वे पूर्वाह्न 10:30 बजे के बाद दिनभर में किसी भी समय खरीदारी संपन्न कर सकते हैं। वहीं जो लोग 7 नवंबर को खरीदारी की योजना बना रहे हैं, उन्हें सुबह 10:49 बजे से पहले यह कार्य पूरा करना होगा, क्योंकि इसके पश्चात त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त पंचांग के सामान्य आंकलन के मुताबिक 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे से लेकर 7 नवंबर की सुबह 06:37 बजे तक लगातार खरीदारी का उत्तम कालखंड बना रहेगा। चांदी अथवा चांदी के सिक्कों की खरीदारी के लिए भी 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे से अगले दिन सुबह 06:37 बजे तक का समय अत्यधिक शुभ बताया गया है।
दिन और रात के शुभ चौघड़िया मुहूर्त
वाहन, मशीनरी और घरेलू उपयोग के उपकरणों को खरीदने के लिए चौघड़िया वेला का विशेष ध्यान रखा जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित चौघड़िया मुहूर्तों में भी खरीदारी कर सकते हैं
- प्रातःकालीन चौघड़िया (चर, लाभ, अमृत): सुबह 10:30 बजे से सुबह 10:43 बजे तक।
- अपराह्न चौघड़िया (शुभ): दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 01:27 बजे तक।
- अपराह्न चौघड़िया (चर): शाम 04:11 बजे से शाम 05:33 बजे तक।
- रात्रिकालीन चौघड़िया (लाभ): रात 08:49 बजे से रात 10:27 बजे तक।
- देर रात का चौघड़िया (शुभ, अमृत, चर): 7 नवंबर की मध्यरात्रि 12:05 बजे से भोर 04:59 बजे तक।
इन निर्धारित समयावधियों के भीतर अपने बजट के अनुसार खरीदारी करके जातक पूरे वर्ष के लिए सौभाग्य, आरोग्य और वित्तीय स्थिरता की कामना कर सकते हैं।



















