मानसून की पहली फुहारों के साथ ही राजस्थान के सांस्कृतिक शहर जोधपुर का माहौल पूरी तरह से बदल गया है। मेहरानगढ़ किले के आसपास की पहाड़ियों पर जैसे ही हरियाली की चादर बिछती है, वैसे ही पूरे शहर में उमंग और उत्साह का नया संचार देखने को मिलता है। सावन का महीना शुरू होते ही जोधपुर के ऐतिहासिक बाजारों से लेकर आम घरों तक खुशियों की रंगत बिखर गई है। स्थानीय महिलाओं के लिए यह पवित्र महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परंपराओं को सहेजने, खूबसूरत परिधान पहनने, झूलों का लुत्फ उठाने और तीज का पर्व मनाने का विशेष अवसर बन चुका है। सूर्यनगरी में चारों तरफ सावन की इस अनोखी छटा को लेकर हर उम्र की महिलाओं में गजब का उत्साह देखा जा रहा है।
मेहरानगढ़ की हरियाली और खान-पान में सावन का संगम
सावन के आगमन से जोधपुर का प्राकृतिक सौंदर्य एक नया रूप ले लेता है। स्थानीय निवासी मीनाक्षी जैन के अनुसार, सावन का महीना आते ही शहर का पूरा परिदृश्य बदल जाता है। विशेष रूप से प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किले के इर्द-गिर्द फैली पहाड़ियों की हरियाली देखने लायक होती है। इस दौरान महिलाएं सुबह से ही मंदिरों में दर्शन और पूजन के लिए जुटने लगती हैं और पारंपरिक झूलों पर सावन के गीतों का आनंद लेती हैं। इसके अलावा जोधपुर की खान-पान संस्कृति में भी सावन का खास प्रभाव देखने को मिलता है। यहां की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई घेवर की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मीनाक्षी जैन बताती हैं कि यह महीना प्रकृति की सुंदरता, धार्मिक आस्था और लजीज व्यंजनों का एक ऐसा अनोखा संगम है, जो जोधपुर की संस्कृति को अधिक समृद्ध बनाता है।
हरी चूड़ियों की महत्ता और माता पार्वती की विशेष पूजा
धार्मिक मान्यताओं में सावन के दौरान हरे रंग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यही कारण है कि इस महीने में हरी चूड़ियां और हरे रंग के पारंपरिक वस्त्र महिलाओं की पहचान बन जाते हैं। सावन के दौरान महिलाएं सुहाग की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के साथ माता पार्वती को हरी चूड़ियां अर्पित करती हैं। इसके साथ ही पति द्वारा पत्नी को हरी चूड़ियां या अन्य सुहाग सामग्री उपहार में देने की भी पुरानी परंपरा रही है, जिसे बेहद मंगलकारी माना जाता है। इसी मान्यता के कारण शहर के सर्राफा और बिसाती बाजारों में हरी चूड़ियों, बिंदियों और श्रृंगार के अन्य सामानों की खरीदारी अचानक बढ़ गई है। दुकानदार भी महिलाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए कांच और लाक की हरी चूड़ियों के नए-नए डिजाइन उपलब्ध करा रहे हैं।
सोमवार के व्रत से लेकर तीज पर्व की तैयारियां
भगवान शिव की उपासना के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र माना जाता है। शहर की निवासी ट्विंकल जैन के मुताबिक, इस पूरे महीने में शिव भक्त विशेष नियमों का पालन करते हैं। महिलाएं और युवतियां सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं और सुबह से ही शिवालयों में जल तथा दूध से शिवलिंग का जलाभिषेक करने पहुंचती हैं। मंदिरों में हर-हर महादेव और ओम नमः शिवाय के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहता है। इसके साथ ही महिलाएं आने वाले तीज त्योहार की तैयारियों में भी पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं। घरों में पकवान बनाने और पूजा की पटरियां सजाने का काम जोरों पर चल रहा है। इस प्रकार सावन का यह समय भक्ति, लोक परंपरा और पारिवारिक खुशियों के एक सुंदर मेल के रूप में उभरा है।
लहरिया और बांधनी के परिधानों से सजे जोधपुर के बाजार
राजस्थान की सावन परंपरा बिना लहरिया और बांधनी के रंगों के अधूरी मानी जाती है। जोधपुर की निवासी ज्योति के अनुसार, इन दिनों शहर के कपड़ा बाजारों में रंग-बिरंगी साड़ियों और घाघरा-चोली की धूम मची हुई है। लहरिया के विभिन्न पैटर्न जैसे मोठड़ा, पचरांगा और बांधनी की विविध किस्में महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। सावन के खास मौकों और पारिवारिक आयोजनों के लिए महिलाएं अपनी पसंदीदा रंग-संगत और कढ़ाई वाली साड़ियां खरीदने के लिए बाजारों में उमड़ रही हैं। बाजारों में ग्राहकों की इस रौनक से स्थानीय व्यापारियों और कपड़ा विक्रेताओं में भी भारी खुशी देखी जा रहा है।
सावन के इस अद्भुत माहौल पर अपने विचार व्यक्त करते हुए भाविका बताती हैं कि सावन ने जोधपुर को केवल प्राकृतिक हरियाली ही नहीं दी है, बल्कि पूरे शहर को रंगों, भक्ति और उत्सव के माहौल से सराबोर कर दिया है। मेहरानगढ़ की हरी-भरी वादियों से लेकर मंदिरों में बजती घंटियों की गूंज, महिलाओं की हरी चूड़ियां, लहरिया साड़ियों की चमक और घेवर की सोंधी मिठास तक, सूर्यनगरी में सावन का यह अनूठा अंदाज हर किसी का मन मोह रहा है।



















