कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बावजूद रक्षाबंधन और सावन की तीज को लेकर राजस्थान के पाली जिले में उत्साह कम नहीं हुआ है। शहर के मुख्य बाजारों और उदयपुरिया मार्केट में सुबह से लेकर शाम तक ग्राहकों की भारी भीड़ बनी हुई है। इस बार सर्राफा बाजार में पारंपरिक सूती धागों की जगह शुद्ध चांदी से तैयार विशेष राखियों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
चांदी की ब्रेसलेट राखियों का बढ़ता आकर्षण
पाली के सर्राफा व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष शुद्ध चांदी से बनी राखियों का चलन तेजी से बढ़ा है। इन राखियों की बनावट इस तरह तैयार की गई है कि भाई त्योहार बीत जाने के बाद भी इन्हें ब्रेसलेट की तरह अपनी कलाई पर पहन सकेंगे। स्थानीय ज्वेलर मनीष के मुताबिक शुद्ध चांदी से निर्मित ये राखियां बेहद मजबूत होती हैं और लंबे समय तक खराब नहीं होतीं। इसके अलावा शुद्ध कीमती धातु होने के कारण आवश्यकता पड़ने पर इन्हें भविष्य में आसानी से दोबारा बेचा भी जा सकता है। बहनों के बीच भगवान गणेश, ओम, स्वस्तिक, रुद्राक्ष और त्रिशूल की आकृतियों वाले ट्रेंडी डिजाइन सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।
सिंजारे के लिए चांदी के विशेष उपहार
रक्षाबंधन के साथ साथ पाली के मारवाड़ी समुदायों में सावन की तीज की तैयारियां भी पूरे शबाब पर हैं। सगाई तय हो चुके जोड़ों के लिए वर पक्ष की ओर से भावी दुल्हन को सिंजारा और विशेष भेंट भेजने की परंपरा है। इस रीति रिवाज के लिए सर्राफा बाजार के कारीगरों ने चांदी के बेहद अनोखे तथा सूक्ष्म नक्काशी वाले सामान तैयार किए हैं। भावी दुल्हनों को देने के लिए महीन कारीगरी वाले चांदी के पर्स और छोटे आकार के चांदी के झूले ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
चांदी के खिलौने और सजावटी सामान की मांग
बाजार में पारंपरिक खेलों और धार्मिक वस्तुओं के चांदी के स्वरूप भी काफी आकर्षित कर रहे हैं। शुद्ध चांदी से निर्मित सांप सीढ़ी का खेल, रस्सी कूदने की डोरी और चांदी की डांडिया स्टिक्स की खूब बिक्री हो रही है। इसके साथ ही सजावट और पूजा पाठ के लिए बारीक तराशी गई मोड़ों वाली राधा कृष्ण की मूर्तियां, चांदी के बने मोरपंख और मेवों की चांदी की आकृतियां भी बाजार की रौनक बढ़ा रही हैं।
महंगाई पर भारी पड़ रही मारवाड़ी परंपराएं
कीमती धातुओं के आसमान छूते भावों के बाद भी पाली के व्यावसायिक क्षेत्रों में ग्राहकों की आवाजाही लगातार जारी है। खरीदारी करने आई बहनों का कहना है कि वर्ष में एक बार आने वाले इस पावन पर्व पर भाई की कलाई पर चांदी की चमक बांधना एक अत्यंत आनंददायक और यादगार अनुभव है। बाजार में बनी यह चहल पहल दर्शाती है कि मारवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आत्मीय संबंधों के सामने महंगाई का असर हमेशा बेअसर ही साबित होता है।



















