अंबिकापुर के जोड़ा पीपल इलाके की रहने वाली स्वप्ना और उनके पालतू तोते हिरांश का रिश्ता आम इंसान और पक्षी के जुड़ाव से कहीं आगे निकल चुका है। स्वप्ना बीते 6 साल से हर रक्षाबंधन पर अपने इस तोते की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती आ रही हैं। इस बार इस पावन पर्व को और भी यादगार बनाने के लिए उन्होंने हिरांश के लिए सोने की विशेष राखी तैयार कराई है। स्वप्ना अपने इस पक्षी को सिर्फ एक बेज़ुबान जीव नहीं मानतीं, बल्कि अपने सगे भाई का दर्जा देती हैं और पूरा परिवार भी उसे घर के अभिन्न सदस्य की तरह ही प्यार देता है।
मासूमियत से शुरू हुआ भाई-बहन का अटूट स्नेह
दोनों के बीच इस अनोखे संबंध की शुरुआत तब हुई थी, जब हिरांश बेहद छोटा था। उस समय उसकी आंखें भी ठीक से नहीं खुली थीं। स्वप्ना ने उसे अपने हाथों से संभाला और दाना-पानी दिया। धीरे-धीरे हिरांश घर के माहौल में ढलता गया और स्वप्ना के साथ ही खाने, सोने और रहने लगा। इस निरंतर देखभाल और साथ ने दोनों के बीच भाई-बहन जैसा गहरा और निस्वार्थ भावनात्मक रिश्ता कायम कर दिया। परिवार के सभी लोग अब उसे एक इंसान की तरह ही समझते हैं और उसके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं।
बीमारी में खाना छोड़ देता है हिरांश
स्वप्ना बताती हैं कि हिरांश उनके हर इशारे और बात को भली-भांति समझता है। दोनों के बीच समझ का स्तर इतना गहरा है कि जब भी स्वप्ना बीमार पड़ती हैं, तो हिरांश दुखी होकर भोजन तक त्याग देता है। इसके अलावा, जब भी स्वप्ना किसी काम से घर से बाहर जाती हैं, तो वह उनकी मां के संरक्षण में रहता है, लेकिन लगातार घर के मुख्य दरवाजे की ओर टकटकी लगाए स्वप्ना के लौटने का बेताबी से इंतजार करता रहता है।
पुरानी यादें और बेज़ुबान जीवों के प्रति निस्वार्थ प्रेम
हिरांश से पहले स्वप्ना के पास हीर नाम का एक तोता था। हीर के जाने के बाद हिरांश उनकी जिंदगी में आया, जिसकी शक्ल-सूरत काफी हद तक हीर से मिलती-जुलती है। स्वप्ना का मानना है कि हिरांश के साथ इस बंधन ने उन्हें समाज में एक अलग पहचान दी है। इस रिश्ते में किसी तरह का स्वार्थ या लालच नहीं है, केवल सच्चा प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प शामिल है।
पक्षियों की आज़ादी और जीव-जंतुओं से भरा परिवार
स्वप्ना के घर में इस समय कुल चार तोते और एक कुत्ता मौजूद हैं, जबकि इससे पहले वे चार खरगोश भी पाल चुकी हैं। स्वप्ना इन सभी पालतू जीव-जंतुओं को ही अपना असली परिवार और अपनी दुनिया मानती हैं। वे पक्षियों को पिंजरे में कैद करके रखने की प्रथा के सख्त खिलाफ हैं और उनका मानना है कि हर पक्षी को खुला आसमान और प्रेमपूर्वक वातावरण मिलना चाहिए।



















