ऋतु परिवर्तन के दौरान तापमान में होने वाले बदलावों के कारण खांसी, तेज बुखार, गले में खराश और शरीर में असहनीय दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। अधिकतर लोग साधारण वायरल इंफेक्शन और फ्लू को एक ही मान लेने की भूल कर बैठते हैं, जबकि इनके फैलने की गति और लक्षणों का असर काफी अलग होता है। विशेष रूप से इन्फ्लूएंजा यानी फ्लू एक बेहद संक्रामक श्वसन बीमारी है जो बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है। केवल लक्षणों को देखकर किसी बीमारी का सटीक अंदाजा लगाना कठिन होता है, इसलिए आवश्यकता होने पर योग्य डॉक्टर की देखरेख में जांच कराना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
साधारण वायरल इंफेक्शन और फ्लू के बीच मुख्य अंतर
सामान्य तौर पर होने वाले वायरल इंफेक्शन में व्यक्ति को हल्का या मध्यम बुखार, बदन दर्द, थकान, गले में खराश, नाक बहने और खांसी की शिकायत होती है। रोगी की शारीरिक क्षमता और वायरस के प्रकार के अनुसार इन लक्षणों का प्रभाव कम या ज्यादा हो सकता है। इसके विपरीत, फ्लू की शुरुआत अचानक होती है और इसके लक्षण काफी तीव्र महसूस होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के मुताबिक, अचानक तेज बुखार आना, बिना बलगम वाली सूखी खांसी, सिरदर्द, जोड़ों व मांसपेशियों में खिंचाव और तीव्र कमजोरी फ्लू के स्पष्ट संकेत हैं। कुछ परिस्थितियों में फ्लू के कारण होने वाली खांसी दो हफ्ते या उससे अधिक समय तक भी परेशान कर सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को एकाएक बहुत तेज बुखार आ जाए, बदन टूट रहा हो और बहुत अधिक थकावट महसूस हो रही हो, तो बिना किसी देरी के चिकित्सा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। केवल खुद के अनुमान पर निर्भर रहकर फ्लू की पुष्टि करना सही नहीं है, क्योंकि अन्य श्वसन वायरस भी शरीर में इसी प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
घर पर मरीजों की देखभाल और संक्रमण रोकने के उपाय
परिवार के किसी सदस्य में फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण दिखने पर सबसे पहला कदम मरीज को पूर्ण विश्राम देना है। मरीज को घर के बाकी सदस्यों से यथासंभव दूरी बनाकर रखनी चाहिए और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। WHO के अनुसार, अस्वस्थ होने पर घर पर ही रुकना संक्रमण के चक्र को तोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके अलावा, कमरे में ताजी हवा के आवागमन के लिए खिड़कियों को खुला रखना चाहिए। बंद और हवाहीन कमरों में वायरस के फैलने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
बीमारी को घर में अन्य लोगों तक फैलने से रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोते रहना चाहिए। छींकते या खांसते समय अपने मुंह और नाक को टिश्यू अथवा मुड़ी हुई कोहनी से ढका जाना चाहिए। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत ढके हुए कूड़ेदान में डालना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, घर के जिन हिस्सों को बार-बार छुआ जाता है, जैसे दरवाजों की कुंडी, पानी के नल और मोबाइल फोन, उन्हें नियमित रूप से साफ करते रहना चाहिए। बंद या भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का प्रयोग करना सुरक्षा को और मजबूत बनाता है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें और किन बातों से बचें
यदि मरीज की हालत में सुधार होने के बजाय लक्षण बिगड़ते दिखें, सांस लेने में तकलीफ होने लगे या शरीर में बहुत ज्यादा ढलान महसूस हो, तो तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों को फ्लू से गंभीर जोखिम हो सकता है। इनमें छोटे बच्चे, 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित मरीज शामिल हैं। ऐसे उच्च जोखिम वाले लोगों में फ्लू के कारण अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होने का खतरा अधिक रहता है।
फ्लू या वायरल बुखार के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक गोलियां लेना अत्यंत हानिकारक साबित हो सकता है। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया पर असर करते हैं, वे किसी भी प्रकार के वायरस पर निष्प्रभावी होते हैं। परिस्थिति के आधार पर डॉक्टर एंटीवायरल दवाओं का नुस्खा दे सकते हैं, जो बीमारी के शुरुआती चरण में ली जाएं तो सबसे अधिक असरदार साबित होती हैं।


















