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संतान की दीर्घायु का महापर्व जितिया 3 अक्टूबर को, विधिपूर्वक अनुष्ठान के लिए जुटा लें ये जरूरी पूजन सामग्रीत्योहार
1 अक्तू॰ 2026, 9:33 am (20 मिनट पहले)· 0

संतान की दीर्घायु का महापर्व जितिया 3 अक्टूबर को, विधिपूर्वक अनुष्ठान के लिए जुटा लें ये जरूरी पूजन सामग्री

संतान की लंबी उम्र और सुखद भविष्य के लिए रखा जाने वाला जितिया पर्व इस वर्ष 3 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा, जिसके तीन दिवसीय अनुष्ठान और पूजा सामग्री की पूरी तैयारी आवश्यक है।

संतान की मंगलकामना, उनकी लंबी आयु और खुशहाल जीवन के उद्देश्य से माताओं द्वारा किया जाने वाला जितिया उपवास भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। इस अत्यंत कठिन और श्रद्धा से परिपूर्ण अनुष्ठान को महिलाएं पूर्ण संयम के साथ निभाती हैं। वर्ष 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है। इस पावन अवसर को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के घरों में पारंपरिक तैयारियां जोर-शोर से चलने लगी हैं और स्थानीय बाजारों में भी पूजन से जुड़ी वस्तुओं की दुकानें सज चुकी हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसकी पूजा संपूर्ण विधि-विधान और सभी आवश्यक सामग्रियों के साथ संपन्न की जाए, इसलिए पहले से ही हर सामग्री का प्रबंध कर लेना शुभ रहता है।

तीन दिनों के कठिन नियमों और संयम का अनुष्ठान

वैदिक पंचांग के विवरण के मुताबिक जितिया का यह पावन व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर किया जाता है। यह धार्मिक पर्व कुल 3 दिनों की विस्तृत साधना पर आधारित होता है, जिसका आरंभ नहाय-खाय की परंपरा के साथ होता है। नहाय-खाय के अगले चरण में व्रतधारी महिलाएं लगभग 36 घंटे तक चलने वाला कठोर निर्जला उपवास रखती हैं। इस अवधि के दौरान अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। उपवास की पूर्णता के अगले दिन सूर्योदय के उपरांत भगवान सूर्य को श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही व्रत का विधिवत पारण किया जाता है। ऐसी सुदृढ़ मान्यता है कि जितिया व्रत का निष्ठापूर्वक पालन करने से कुल और परिवार में सुख, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह बना रहता है।

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पूजा के लिए आवश्यक सामग्रियों की पूरी सूची

जितिया अनुष्ठान को त्रुटिहीन रूप से पूरा करने के लिए सभी आवश्यक पूजन वस्तुओं को पहले से एकत्र कर चौकी पर सजा लेना चाहिए। इस पूजा में लगने वाले प्रमुख सामान इस प्रकार हैं

  • भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा
  • फूल और ताजे फूलों की माला
  • पीले रंग का वस्त्र
  • मिट्टी का दीपक, बाती, धूप, अगरबत्ती और कपूर
  • तांबे का लोटा और कलश
  • सिंदूर, मौली, रोली, चंदन और हल्दी
  • पवित्र गंगाजल और पंचामृत
  • जितिया व्रत की कथा की पुस्तक
  • बांस की डलिया और पूजा के लिए चौकी
  • लाल या पीला कपड़ा
  • कुशा, गोबर और जल
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • दूर्वा घास
  • पान, सुपारी, लौंग और इलायची
  • लाल या पीला जिउतिया धागा
  • मरुआ का आटा और बजरी
  • भिगोया हुआ चना, मौसमी फल और पारंपरिक मिठाइयां
  • विशेष तौर पर तैयार ठेकुआ और पारंपरिक पकवान

प्रसाद और भोग से जुड़ी परंपरा

पूजा अर्चना के दौरान अर्पित किए जाने वाले नैवेद्य और भोग का भी जितिया में विशेष महत्व माना गया है। पूजन के समय भोग सामग्री के तौर पर शुद्ध घी में बना ठेकुआ, पारंपरिक पकवान, विविध प्रकार की मिठाइयां, पानी में भिगोया हुआ कच्चा चना, ऋतु फल तथा पंचामृत विशेष रूप से भगवान को निवेदित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजन आरंभ करने से पूर्व यदि सभी सामग्रियों को एक स्थान पर सुव्यवस्थित रख लिया जाए, तो अनुष्ठान के समय किसी वस्तु की कमी नहीं खलती और पूजा निर्विघ्न संपन्न होती है।

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 में जितिया का मुख्य व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
इस साल जितिया का मुख्य निर्जला व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा।
जितिया व्रत किस हिंदू महीने और तिथि पर पड़ता है?
यह पावन व्रत हिंदू पंचांग के आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।
जितिया व्रत कितने दिनों तक चलता है?
जितिया का पर्व कुल 3 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन पारण के साथ होता है।
इस व्रत में कितने समय तक निर्जला उपवास रखा जाता है?
इस अनुष्ठान में महिलाएं लगभग 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास रखती हैं।
पूजा में मुख्य रूप से किस देवता की प्रतिमा रखी जाती है?
इस पूजा में विशेष रूप से भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
जितिया की पूजा में कौन-कौन से विशेष भोग शामिल किए जाते हैं?
भोग में पारंपरिक ठेकुआ, पकवान, मिठाई, मौसमी फल, भिगोया हुआ चना और पंचामृत शामिल किए जाते हैं।
व्रत का पारण किस प्रकार किया जाता है?
अगले दिन सूर्योदय के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर विधिवत व्रत का पारण किया जाता है।
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