कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक टेस्ट शतक ठोकने का रिकॉर्ड आज भी यूसुफ के नाम, पोंटिंग और सचिन भी रहे अव्वल2 अक्टूबर को चंद्रमा का बुध की राशि में गोचर, इन राशियों की खुलेगी किस्मतरायगढ़ में जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण, 120 कब्जाधारियों को नोटिसशूटिंग के दौरान फिसलकर गिरे अमिताभ बच्चन, कौन बनेगा करोड़पति 18 के मंच पर साझा किया घुटने की चोट का दर्दसवाई माधोपुर में वन्यजीव प्रेमियों का तांता, तीन माह बाद शुरू हुई सफारीबिग बॉस 20 में लॉलीपॉप डायलॉग पर कनिका मान का फूटा गुस्सा, काजी तौकीर ने दी सफाई1 अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी, सरकार ने डीजल पर विंडफॉल टैक्स घटायारामायण के पर्दे से निकलकर रोमांटिक अंदाज में दिखे देव शर्मा, मोनिका रावण संग नया म्यूजिक वीडियो हुआ रिलीजरिपल और स्टेलर में मिला-जुला रुझान, एक्सआरपी पर दबाव के बीच एक्सएलएम में सुधार के संकेतकांग्रेस में बदलती कमान: वरिष्ठ नेताओं के मुकाबले युवा पीढ़ी और राहुल गांधी के फैसलों का बढ़ा दबदबा
श्राद्ध की थाली में कद्दू का खास स्थान, जानिए पितरों के भोज से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराएंधर्म
1 अक्तू॰ 2026, 8:55 am (48 मिनट पहले)· 0

श्राद्ध की थाली में कद्दू का खास स्थान, जानिए पितरों के भोज से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराएं

पितृपक्ष के दौरान ब्राह्मण भोज और श्राद्ध की थाली में कद्दू की सात्विक सब्जी परोसने का गहरा धार्मिक महत्व है। लोक मान्यताओं में इसे शुद्धता और पारिवारिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।

पितृपक्ष के पावन दिनों में सनातन परंपरा के अनुसार पूर्वजों के प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इन दिनों तर्पण और पिंडदान के साथ साथ खान पान के नियमों का बेहद कड़ाई से पालन किया जाता है। पितरों की शांति के लिए आयोजित होने वाले ब्राह्मण भोज में क्या पकाया जाए, इसे लेकर प्राचीन समय से कई नियम चले आ रहे हैं। इन्हीं परंपराओं में कद्दू की सब्जी का स्थान सबसे प्रमुख माना जाता है। अनेक घरों में कद्दू के बिना श्राद्ध का भोजन अधूरा समझा जाता है, क्योंकि इसे पूरी तरह शुद्ध और सात्विक आहार की श्रेणी में रखा गया है।

सात्विक आहार और पितरों की तृप्ति का आधार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों के निमित्त तैयार किया जाने वाला भोजन पूर्णतः तामसिक प्रवृत्तियों से मुक्त होना चाहिए। श्राद्ध की रसोई में प्याज और लहसुन का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहता है। कद्दू की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बिना किसी तामसिक मसाले, प्याज या लहसुन के भी बेहद स्वादिष्ट, खट्टा मीठा और सुपाच्य बनाया जा सकता है। माना जाता है कि इस प्रकार का हल्का और पवित्र भोजन जब पितरों को अर्पित किया जाता है, तो उन्हें आत्मिक तृप्ति मिलती है और वे पूरे परिवार को सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

ये भी पढ़ें

काशीफल की पहचान और इसका औषधीय महत्व

मूल रूप से अमेरिका में जन्मी यह सब्जी आज भारत की रसोई का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। देश के अलग अलग राज्यों में इसे काशीफल, कुम्हड़ा और पेठा जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। आयुर्वेद में भी कद्दू को एक महत्वपूर्ण औषधीय फल के रूप में मान्यता दी गई है। यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और पाचन में सुगम होता है। पितृपक्ष में जब संयमित और सात्विक जीवनशैली अपनाई जाती है, तब यह सब्जी शरीर और मन दोनों के संतुलन को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

कद्दू काटने से जुड़े क्षेत्रीय नियम और लोक मान्यताएं

भारत के कई हिस्सों में कद्दू को लेकर बेहद रोचक और गहरी लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ क्षेत्रों में कद्दू को परिवार के बड़े बेटे यानी जेष्ठ पुत्र का प्रतीक माना जाता है। इसी सांस्कृतिक विश्वास के कारण कई परिवारों में महिलाएं कद्दू पर सीधे चाकू नहीं चलाती हैं। परंपरा के अनुसार, घर का कोई पुरुष पहले कद्दू के दो टुकड़े करता है, जिसके बाद ही महिलाएं रसोई में उसके छोटे छोटे टुकड़े काटकर पकाने की तैयारी करती हैं।

अकेले कद्दू न काटने का अनूठा रिवाज

इसके अतिरिक्त कई समाज में कद्दू को अकेला काटना भी शुभ नहीं माना जाता है। इस लोक रीति के तहत कद्दू को काटने से पहले उसकी जोड़ी बनाई जाती है। इसके लिए कद्दू के साथ नींबू, हरी मिर्च या फिर किसी अन्य सब्जी को साथ रखा जाता है, ताकि वह अकेला न रहे। यह अनूठी परंपरा दिखाती है कि हमारे समाज में खान पान की सामान्य वस्तुओं को भी किस तरह जीवन, परिवार और सांस्कृतिक संवेदनाओं के साथ गहराई से जोड़ा गया है।

सवाल-जवाब

पितृपक्ष में कद्दू की सब्जी क्यों बनाई जाती है?
कद्दू को अत्यंत सात्विक और शुद्ध सब्जी माना जाता है, जिसे बिना प्याज और लहसुन के भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। पितरों की तृप्ति के लिए सात्विक भोजन अनिवार्य होता है।
कद्दू को अन्य किन नामों से जाना जाता है?
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कद्दू को काशीफल, कुम्हड़ा और पेठा के नाम से भी जाना जाता है।
क्या महिलाएं सीधे कद्दू काट सकती हैं?
कुछ क्षेत्रीय मान्यताओं में कद्दू को बड़े बेटे का प्रतीक माना जाता है, इसलिए महिलाएं इसे सीधे नहीं काटतीं। पहले घर का कोई पुरुष इसे दो हिस्सों में काटता है।
कद्दू को अकेले क्यों नहीं काटा जाता?
लोक मान्यताओं के अनुसार कद्दू को अकेला काटना वर्जित माना जाता है। इसलिए काटने से पहले इसके साथ नींबू, मिर्च या अन्य सब्जी रखकर जोड़ी बनाई जाती है।
आयुर्वेद में कद्दू का क्या महत्व बताया गया है?
आयुर्वेद में कद्दू को औषधीय फल माना गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गुणकारी और पाचन में सुपाच्य होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp