भारतीय थाली में दाल-चावल और सब्जी के साथ पापड़ की मौजूदगी लगभग तय मानी जाती है। घर हो या होटल, सलाद और सब्जी के साथ कुरकुरा पापड़ थाली में सजना आम बात है। कई घरों में पापड़ के अलावा आलू के चिप्स और तरह-तरह के पकौड़े भी खाने के साथ परोसे जाते हैं। ज्यादातर परिवार यह सामान बाजार से खरीद लाते हैं, लेकिन कुछ घरों में आज भी यह सब हाथ से तैयार होता है। जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड में स्थित सर्वसिद्धांता FPO में काम करने वाली तारावती देवी ऐसी ही एक महिला हैं, जो सालों से घर पर पापड़ बनाकर बाजार तक पहुंचा रही हैं और उन्होंने इसकी पूरी विधि साझा की है.
मूंग और उड़द दाल से ऐसे तैयार होता है पापड़
तारावती देवी बताती हैं कि पापड़ बनाना सुनने में जितना मुश्किल लगता है, सही तरीका पता होने पर यह उतना ही आसान हो जाता है। वे लंबे समय से मूंग दाल और उड़द दाल का पापड़ बना रही हैं, जिसकी मांग बाजार में भी बनी रहती है। विधि की शुरुआत उड़द दाल और मूंग दाल को पानी में भिगोकर कुछ देर के लिए छोड़ देने से होती है। इसके बाद इसे आटे के साथ अच्छी तरह गूंथा जाता है और गुंथे हुए आटे को थोड़ी देर फूलने के लिए रखा जाता है। इसके बाद सबसे जरूरी चरण आता है, मूसल से आटे को खूब कूटना, ताकि वह पूरी तरह लचीला हो जाए। आटा लचीला होने के बाद उसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाई जाती हैं और बेलन की मदद से हर गोली को चिकने फर्श पर बेला जाता है। बेले हुए हर पापड़ को एक-एक करके पंखे की हवा में रखा जाता है और कुछ देर हवा लगने के बाद पापड़ पूरी तरह तैयार हो जाता है.
खिला-खिला पापड़ बनाने का असली राज
तारावती देवी के मुताबिक पापड़ के खिले-खिले होने का पूरा राज आटा गूंथते वक्त डाले जाने वाले मसालों में छिपा है। वे आटा गूंथते समय उसमें हींग, जीरा और कुछ अन्य मसाले मिलाती हैं, जिससे आटा हल्का हो जाता है। आटा जितना हल्का रहता है, पापड़ उतना ही खिला-खिला और कुरकुरा बनकर तैयार होता है। यही छोटी सी देसी तरकीब है, जो घर के बने पापड़ को भी बाजार के पापड़ जैसा स्वाद और बनावट देती है.
पापड़ के साथ कई और उत्पाद भी बना रहीं महिलाएं
घोसी स्थित सर्वसिद्धांता FPO में सिर्फ तारावती देवी ही नहीं, बल्कि कई और महिलाएं भी काम कर रही हैं। यहां पापड़ के अलावा दालमोट और मशरूम का अचार भी तैयार किया जाता है। इसके साथ ही जाता चना सत्तू बनाने का काम भी यहीं होता है। कई महिलाएं इस केंद्र में एक साथ मिलकर काम करती हैं, जिसका फायदा सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार को मिल रहा है। इस FPO केंद्र से जुड़ी कई महिलाओं के लिए यह जगह आजीविका का एक बड़ा जरिया बन चुकी है.













