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कोटा का 56 साल पुराना स्वाद, लालाजी के मिश्री मावे और रबड़ी की मिठास के कायल हैं लोगखानपान
23 अग॰ 2026, 11:59 am (68 दिन पहले)· 3

कोटा का 56 साल पुराना स्वाद, लालाजी के मिश्री मावे और रबड़ी की मिठास के कायल हैं लोग

राजस्थान के कोटा में रामपुरा बर्तन बाजार स्थित लालाजी दही वाले पिछले 56 वर्षों से अपनी शुद्ध मिठाइयों, विशेषकर मिश्री मावे और मलाई बर्फी के लिए प्रसिद्ध हैं।

राजस्थान के कोटा शहर की कचौरी अपने तीखे और चटपटे स्वाद के लिए दुनियाभर में जानी जाती है, लेकिन शहर के पुराने इलाकों में एक ऐसा मिष्ठान केंद्र भी है जो अपनी लाजवाब मिठास के लिए पिछले 56 वर्षों से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। शहर के व्यस्त रामपुरा बर्तन बाजार में स्थित लालाजी दही वाले की दुकान अपनी पारंपरिक रबड़ी और खास मिश्री मावे के लिए दूर-दूर तक पहचानी जाती है। वर्ष 1970 से शुरू हुई यह दुकान आज भी अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और स्वाद के कारण मीठे के शौकीनों की पहली पसंद बनी हुई है। दशकों पुराने इस कारोबार ने अपनी शुद्धता के बूते स्थानीय लोगों के दिलों में एक खास मुकाम हासिल किया है।

मथुरा से कोटा तक का सफर

इस प्रतिष्ठित दुकान की नींव के पीछे एक दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी जुड़ी हुई है। दुकान का संचालन संभाल रहे अशोक बताते हैं कि उनके पिता मदन लाल जी, जिन्हें लोग स्नेह से लालाजी पुकारते थे, करीब 1970 के दशक में मथुरा से कोटा आए थे। यहां आकर उन्होंने सबसे पहले दूध और मूल रूप से दही बेचने के कार्य से अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी। चूँकि वह उत्तर प्रदेश के मथुरा से ताल्लुक रखते थे, इसलिए स्थानीय लोगों ने उन्हें लालाजी कहकर बुलाना शुरू कर दिया और समय के साथ उनकी यह पहचान ही दुकान के नाम में तब्दील हो गई। वर्तमान समय में इस पारंपरिक व्यवसाय को संभालने की जिम्मेदारी परिवार की तीसरी पीढ़ी निभा रही है, जो अपने पुरखों की इस विरासत को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है।

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शुद्धता और पारंपरिक सामग्री का कमाल

इस प्रतिष्ठान की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी मिठाइयों में बरती जाने वाली शुद्धता है। अशोक के अनुसार, उनकी किसी भी मिठाई को तैयार करने में कृत्रिम केमिकल, किसी भी तरह के एसेंस या हानिकारक मिलावटी रंगों का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यहाँ बनने वाली हर एक मिठाई में केवल शुद्ध दूध, संतुलित मात्रा में चीनी, ताजी हरी इलायची, केसर और उम्दा पिस्ता का उपयोग किया जाता है। ग्राहकों की प्लेट तक हमेशा बेहतरीन उत्पाद पहुँचे, इसके लिए हर दिन बिल्कुल ताजा मिठाइयाँ तैयार की जाती हैं और उसी दिन उनकी बिक्री की जाती है, जिससे स्वाद और गुणवत्ता में कभी कोई कमी नहीं आती है।

मिश्री मावे से लेकर घेवर तक की धूम

यूँ तो इस दुकान पर पारंपरिक मिठाइयों की एक लंबी श्रृंखला उपलब्ध है, लेकिन यहाँ का स्पेशल मिश्री मावा ग्राहकों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके अलावा मलाई बर्फी, रबड़ी, रसमलाई, छेना रोल, मलाई रोल, मिल्क केक और विभिन्न प्रकार की बंगाली मिठाइयाँ भी बेहद चाव से खाई जाती हैं और इनकी भारी माँग बनी रहती है। इतना ही नहीं, सावन के पवित्र महीने में यहाँ विशेष तौर पर पारंपरिक और शुद्ध देशी शैली में घेवर भी तैयार किया जाता है, जिसे खरीदने के लिए शहर के दूर-दराज के इलाकों से भी लोग खींचे चले आते हैं।

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

आज के इस आधुनिक दौर में जहाँ खाद्य पदार्थों में मिलावट का चलन आम हो चला है, वहीं लालाजी का यह परिवार अपने पिता और दादा द्वारा तय किए गए कड़े गुणवत्ता मानकों पर आज भी पूरी सख्ती से कायम है। उनका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को हमेशा पहले से भी बेहतर यानी इक्कीस स्वाद उपलब्ध कराना है। यही वह खूबी है जिसके कारण जो भी नया या पुराना ग्राहक यहाँ का प्रसिद्ध मिश्री मावा एक बार चख लेता है, वह इसकी खुशबू और स्वाद से बंधकर बार-बार यहीं लौटकर आता है।

सवाल-जवाब

लालाजी दही वाले की दुकान कहाँ स्थित है?
यह दुकान राजस्थान के कोटा शहर के व्यस्त रामपुरा बर्तन बाजार में स्थित है।
यह दुकान कितने साल पुरानी है?
यह दुकान पिछले लगभग 56 वर्षों से संचालित हो रही है और इसकी शुरुआत 1970 के आसपास हुई थी।
यहाँ की कौन सी मिठाई सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है?
यहाँ का मिश्री मावा ग्राहकों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय और डिमांड में रहता है।
इस दुकान की शुरुआत किसने की थी?
इस दुकान की शुरुआत मदन लाल जी ने की थी, जिन्हें लोग प्यार से लालाजी कहते थे और वे मथुरा से कोटा आए थे।
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