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गाजीपुर के रौजा में 8×10 फीट के कमरे वाली चाट दुकान करीब 15 ग्राहकों को बैठाकर भी बाहर भीड़ जुटाती हैखानपान
12 सित॰ 2026, 9:44 pm (47 दिन पहले)· 4

गाजीपुर के रौजा में 8×10 फीट के कमरे वाली चाट दुकान करीब 15 ग्राहकों को बैठाकर भी बाहर भीड़ जुटाती है

गाजीपुर के रौजा इलाके में 8×10 फीट के एक कमरे वाली चाट दुकान एक बार में करीब 15 ग्राहकों को बैठने की जगह देती है। करीब 15 साल से चल रहे इस कारोबार में बेसमेंट का एसी, आरामदायक सोफे और खुद पीसे खड़े मसाले इसकी पहचान का हिस्सा हैं।

रौजा इलाके की इस दुकान के बाहर अक्सर ग्राहक सीट खाली होने का इंतजार करते दिखाई देते हैं, जबकि अंदर की जगह केवल 8×10 फीट है। इस छोटी जगह में एक साथ करीब 15 लोग बैठकर दही फुलकी, दही बड़ा और चाट खा सकते हैं। गाजीपुर में चाट और फुलकी की कई पुरानी दुकानें अपने स्वाद के लिए जानी जाती हैं, लेकिन रौजा वाली दुकान अपने सेटअप से अलग पहचान बनाती है।

सोफों से संवरा छोटा कमरा

अंदर का नज़ारा किसी छोटे स्टूडियो के सेट जैसा लगता है। तीन तरफ सोफे लगे हैं, जिनमें दो आमने-सामने हैं और एक बीच में रखा गया है। जगह सीमित होने के बावजूद बैठने की व्यवस्था इस तरह की गई है कि ग्राहक मिली हुई सीट पर सहज होकर भोजन कर सकें। जब करीब 15 लोगों का एक बैच खाना खत्म करके उठता है, तब बाहर पहले से इंतजार कर रहे ग्राहक तुरंत अंदर आकर खाली सीटें ले लेते हैं। इसी कारण दुकान के बाहर अक्सर ऐसे लोग खड़े मिल जाते हैं जो अपनी बारी और अंदर की सीट खाली होने का इंतजार कर रहे होते हैं।

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बैठकर खाने की मांग ने बदली व्यवस्था

दुकान के संचालक विजय कुमार मोदनवाल के अनुसार, यह कारोबार करीब 15 साल से चल रहा है। कारोबार के शुरुआती दौर में लोग दही फुलकी और दही बड़े के स्वाद के लिए आते थे, लेकिन जगह कम होने से कई लोग खाना आधा छोड़कर लौट जाते थे। गर्मी के दिनों में यह दिक्कत और गंभीर हो जाती थी। ग्राहक चाहते थे कि वे बैठकर आराम से खा सकें और दुकान के संचालक इस मांग को पहले से देख रहे थे। इस मांग को पूरा करने के लिए छोटे बेसमेंट में एसी लगाया गया, ताकि गर्मी से राहत मिले और बैठने की सुविधा बेहतर बने। अब ग्राहक वहीं बैठकर दही फुलकी और दही बड़ा खाते हैं; टिक्की और टमाटर चाट भी वहीं मिलती हैं।

खड़े मसालों से बनती स्वाद की पहचान

विजय कुमार मोदनवाल के अनुसार, स्वाद की खासियत को बनाए रखने में मसालों की तैयारी अहम है। दुकान बाजार से पिसा हुआ तैयार मसाला खरीदती नहीं है। खड़े मसालों को खुद पीसा जाता है और फिर अपने हिसाब से तैयार रेसिपी में इस्तेमाल किया जाता है। यही तरीका दुकान के स्वाद की अलग पहचान बनाए रखने का आधार बताया जाता है।

सीट खाली होते ही बदलता है ग्राहकों का बैच

दुकान का सबसे दिलचस्प नज़ारा तब सामने आता है जब अंदर की सारी सीटें भर जाती हैं। 8×10 फीट के कमरे में करीब 15 ग्राहक बैठते हैं और कई लोग बाहर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। अंदर बैठे ग्राहक खाना खत्म करते ही बाहर निकलते हैं और इंतजार कर रहे लोग तुरंत अंदर पहुंच जाते हैं। यह सिलसिला दिखाता है कि किसी कारोबार के लिए हमेशा बड़ी दुकान या बड़े बजट की जरूरत नहीं होती। सीमित जगह को सही तरीके से संवरना, साफ-सुथरी व्यवस्था रखना, आरामदायक माहौल बनाना और अपने स्वाद पर भरोसा रखना भी ग्राहकों के बीच पहचान बना सकता है। रौजा की यही दुकान दिखाती है कि 8×10 फीट का कमरा भले छोटा हो, लेकिन स्वाद और ग्राहकों का भरोसा उससे कहीं बड़ा हो सकता है।

सवाल-जवाब

दुकान गाजीपुर में कहां स्थित है?
दुकान गाजीपुर के रौजा इलाके में है।
बैठने के लिए जगह कितनी है?
खाने वाला कमरा 8×10 फीट का है और उसमें एक बार में करीब 15 लोग बैठ सकते हैं।
सोफों की व्यवस्था कैसी है?
तीन तरफ सोफे लगे हैं, जिनमें दो आमने-सामने हैं और एक बीच में है।
यहां कौन से प्रमुख व्यंजन मिलते हैं?
मेनू में दही फुलकी और दही बड़ा शामिल हैं। टिक्की और टमाटर चाट भी मिलती हैं।
बेसमेंट में एसी क्यों लगाया गया?
गर्मी से राहत देने और बैठकर खाने की सुविधा बेहतर बनाने के लिए छोटे बेसमेंट में एसी लगाया गया।
मसाले कैसे तैयार किए जाते हैं?
दुकान बाजार से तैयार पिसा मसाला नहीं लेती। खड़े मसालों को खुद पीसकर अपनी रेसिपी के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है।
यह कारोबार कितने समय से चल रहा है?
संचालक विजय कुमार मोदनवाल के अनुसार, उन्हें यह कारोबार करते हुए करीब 15 साल हो चुके हैं।
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