पवित्र सावन महीने की समाप्ति के बाद आगरा में नॉनवेज खाने के शौकीनों की रौनक लौट आई है। शहर के प्रसिद्ध बाजारों और खाद्य प्रतिष्ठानों में तंदूरी मटन कबाब और तंदूरी चिकन कबाब की मांग में अचानक भारी तेजी देखने को मिल रही है। खासकर शाम के समय, भोजन के रसिक इन लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए भारी संख्या में इकट्ठा हो रहे हैं। सावन के दौरान उपवास और परहेज के बाद, कबाब का यह बढ़ता क्रेज शहर की जीवंत खाद्य संस्कृति को दर्शाता है।
सावन की समाप्ति के बाद बाजारों में उमड़ी भीड़
स्थानीय दुकानदारों और खाद्य व्यवसायियों का कहना है कि सावन के पवित्र महीने के दौरान एक बड़े वर्ग ने मांसाहारी भोजन से पूरी तरह दूरी बना ली थी। लेकिन अब, त्योहारों का यह समय बीतने के बाद ग्राहकों की वापसी काफी उत्साहजनक है। तंदूरी मटन कबाब और तंदूरी चिकन कबाब तैयार करने के लिए सबसे पहले कीमा, विभिन्न पारंपरिक मसालों और अन्य गुप्त सामग्रियों को मिलाकर एक बेहतरीन मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद, इस कीमे को सीखों पर लपेटकर मनचाहा आकार दिया जाता है और गर्म तंदूर के भीतर पकने के लिए रख दिया जाता है। इस पारंपरिक विधि से पकने के कारण कबाब से निकलने वाली खुशबू राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।
चम्पारन शॉप और जीतेन्द्र कुमार का खास मसाला
आगरा के प्रसिद्ध होटल क्लार्क इन के समीप स्थित चम्पारन नाम की चिकन शॉप आज शहर में स्वादिष्ट कबाबों का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस दुकान पर मिलने वाले तंदूरी मटन और चिकन कबाब इन दिनों ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। दुकान के संचालक जीतेन्द्र कुमार ने अपने इस विशेष व्यवसाय के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे अपने कबाबों को एक बेहद ही पारंपरिक और अनूठे तरीके से तैयार करते हैं, जो उन्हें बाजार में दूसरों से अलग बनाता है।
जीतेन्द्र कुमार के अनुसार, कबाब का असली जादू उनकी मसाला तैयार करने की विधि में छिपा है। वे बाजार से मिलने वाले सामान्य रेडीमेड मसालों का उपयोग करने के बजाय खड़े मसालों को खुद चुनते हैं। इन खड़े मसालों को घर पर ही पारंपरिक तरीके से कूटकर ताजा मसाला मिश्रण तैयार किया जाता है। यही घरेलू मसाला कबाब को वह खास स्वाद और लाजवाब सौंधी खुशबू प्रदान करता है, जिसे खाने के लिए लोग बार-बार खिंचे चले आते हैं। इसके अलावा, तैयारी के दौरान स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि ग्राहकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।
धीमी आंच पर पकाने की अनूठी तकनीक और किफायती दाम
कबाब को बेहतरीन बनाने में केवल मसालों का ही योगदान नहीं है, बल्कि इसे पकाने की कला भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जीतेन्द्र कुमार ने बताया कि कबाब को तंदूर की बेहद धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस पकाने की प्रक्रिया में लगभग 20 से 25 मिनट का समय लगता है। धीमी आंच पर लंबे समय तक रहने के कारण मसालों का अर्क और स्वाद कबाब के रेशे-रेशे में अच्छी तरह समा जाता है। धीमी आंच की इस सिकाई से कबाब बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से बेहद रसीले और मुलायम बने रहते हैं।
स्वाद के इस बेहतरीन सफर को और भी आकर्षक बनाने के लिए इन्हें तीखी हरी चटनी, कटे हुए प्याज और नींबू के टुकड़ों के साथ ग्राहकों को परोसा जाता है। सबसे खास बात यह है कि इस बेहतरीन स्वाद और शुद्धता के बावजूद जीतेन्द्र कुमार अपने तंदूरी मटन और चिकन कबाब की एक प्लेट केवल 140 रुपये में उपलब्ध करा रहे हैं। बेहतरीन स्वाद, लाजवाब बनाने का तरीका और बेहद किफायती कीमत के इसी बेजोड़ तालमेल के कारण सावन के बाद चम्पारन शॉप पर कबाब की मांग हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही है।


















