ब्रज क्षेत्र के धार्मिक नगरों में सुबह के समय नाश्ते का जो अनूठा अनुभव मिलता है, उसमें पतली और बेहद तीखी ग्रेवी वाली आलू की तरकारी का विशेष स्थान है। वृंदावन और मथुरा के हलवाई इस खास व्यंजन को बिना किसी लहसुन, प्याज या टमाटर की प्यूरी के केवल खड़े मसालों, हींग और उबले हुए आलू के दम पर तैयार करते हैं। पूड़ी, कुरकुरी खस्ता कचौड़ी अथवा पारंपरिक उड़द दाल की बेड़ई के साथ डुबोकर खाए जाने के कारण ही इसका नाम डुबकी वाले आलू पड़ा है। घर की रसोई में भी वही तीखापन, गहरा रंग और सोंधापन लाने के लिए कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करना होता है।
सामग्रियों की सही तैयारी और आलू फोड़ने का ढंग
इस व्यंजन को बनाने के लिए उबले हुए आलुओं को दो अलग हिस्सों में इस्तेमाल किया जाता है। उबालने के बाद छिलका उतारकर आधे आलुओं को हथेलियों से दबाकर बहुत बारीक मैश कर लिया जाता है, जबकि शेष आलुओं को मोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। बारीक मसले गए आलू पानी के साथ पककर ग्रेवी को प्राकृतिक रूप से गाढ़ापन देते हैं, जिससे किसी बाहरी कॉर्नफ्लोर या बेसन की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके साथ ही एक छोटा चम्मच बारीक कद्दूकस किया हुआ अदरक, तीखी हरी मिर्च, जीरा, शुद्ध सरसों का तेल, हींग, हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अमचूर, नमक और अंत के लिए गरम मसाला व कटी हरी धनिया पत्ती तैयार रखें।
कड़ाही में छौंक लगाने और मसाला भूनने की विधि
पारंपरिक देसी स्वाद हासिल करने के लिए लोहे अथवा भारी तले की कड़ाही में सरसों का तेल धुआं उठने तक गर्म करें। जब तेल से कच्चापन निकल जाए, तब आंच धीमी करके इसमें जीरा चटकाएं और हींग की अच्छी मात्रा डालें। हींग की तेज महक इस व्यंजन की प्रमुख पहचान है। इसके तुरंत बाद कद्दूकस की गई अदरक और कटी हरी मिर्च डालकर कुछ पलों तक भूनें। सूखे पिसे मसाले जैसे हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालते समय कड़ाही में दो चम्मच पानी का छींटा दें, ताकि सूखे मसाले तेल में जलने से बच जाएं और अपनी पूरी रंगत छोड़ें। अब इसमें बारीक मैश किए हुए आलू डालकर भूनते हुए मसालों के साथ एकसार कर लें।
पानी का अनुपात और धीमी आंच पर पकाने का समय
मसालों और मैश आलू के अच्छी तरह मिल जाने के बाद बर्तन में चार से पांच कप सादा पानी डालें। कलछी से लगातार चलाते हुए तेज आंच पर उबाल आने की प्रतीक्षा करें। जैसे ही पानी खौलने लगे, उसमें हाथ से तोड़े गए मोटे आलू के टुकड़े, स्वादानुसार सादा नमक और खटास के लिए अमचूर पाउडर मिला दें। इसके बाद आंच को मध्यम कर दें और बर्तन को ढककर लगभग पंद्रह से बीस मिनट तक पकने दें। धीमी आंच पर उबलने से आलू का स्टार्च पानी में घुलकर ग्रेवी को सही बनावट देता है। यदि तरी अधिक गाढ़ी लगने लगे, तो उसमें आवश्यकतानुसार उबला हुआ गर्म पानी मिलाया जा सकता है।
परोसने का तरीका और स्वाद बढ़ाने वाले सुझाव
पकने की प्रक्रिया पूरी होने पर आंच बंद करने से ठीक पहले ऊपर से आधा चम्मच पिसा हुआ गरम मसाला और बारीक कटा ताजा हरा धनिया पत्ता बुरकें। इस तरकारी को गर्मागर्म उड़द दाल भरी बेड़ई, कचौड़ी या तिकोने पराठों के साथ थाली में परोसा जाता है। ब्रज की हलवाई दुकानों पर इसके साथ मीठी, रसभरी जलेबी परोसने का पुराना चलन है, जो तीखी सब्जी के साथ एक अद्भुत तालमेल बनाती है। हमेशा ध्यान रखें कि पारंपरिक महक के लिए सरसों तेल का ही प्रयोग करें और खटास कम लगे तो पकने के बाद आधा नींबू का रस भी डाला जा सकता है।



















