मानसून आते ही सब्जियों के दाम में तेजी देखने को मिलती है, जिससे घर की रसोई का बजट बिगड़ना तय है। खासकर मधुबनी और पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं के लिए यह एक बड़ी समस्या बन जाती है। हालांकि, इस क्षेत्र में एक ऐसी पुरानी परंपरा मौजूद है जो न केवल पैसे बचाती है, बल्कि बेमौसम में भी बेहतरीन स्वाद का अनुभव देती है। हम बात कर रहे हैं 'सुखौती' की, जो मुख्य रूप से सूखी गोभी और कभी-कभी कुम्हर यानी पेठे से तैयार की जाती है। बरसात के दिनों में जब ताजी हरी सब्जियां मिलना मुश्किल होता है, तब यह पारंपरिक डिश थाली का स्वाद बढ़ा देती है।
सीजन में सस्ती खरीदारी और पूरे साल का स्टॉक
मिथिलांचल में भोजन प्रबंधन और बचत की यह पद्धति बहुत पुरानी है। सर्दियों के मौसम में जब बाजारों में गोभी की बंपर पैदावार होती है, तब इसका भाव काफी कम यानी 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। इसी समय का फायदा उठाकर स्थानीय लोग इसे बड़ी मात्रा में खरीद लेते हैं। इसके बाद गोभी को साफ करके छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और कड़ी धूप में अच्छी तरह सुखाकर पूरे साल के लिए सुरक्षित कर लिया जाता है। इसे ही स्थानीय बोलचाल की भाषा में 'सुखौती' कहा जाता है। जब बारिश के कारण हरी सब्जियां खराब होने लगती हैं या महंगी हो जाती हैं, तब यह स्टोर की गई सुखौती घर के बजट को संतुलित रखने में मदद करती है और स्वाद से समझौता भी नहीं करना पड़ता।
सुखौती की लाजवाब सब्जी बनाने की विधि
इस अनूठी और पारंपरिक सब्जी को तैयार करना काफी आसान है। सबसे पहले आपको सूखी हुई गोभी और आलू को एक प्रेशर कुकर में डालकर एक या दो सीटी आने तक उबालना होगा। उबलने के बाद आलू को ठंडा करके उसका छिलका उतार लें। इसके बाद, एक कड़ाही में थोड़ा तेल गरम करें और उबली हुई गोभी को हल्का सुनहरा होने तक फ्राई करके किसी बर्तन में निकाल लें।
अब उसी कड़ाही में फिर से तेल गरम करें और जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब इसमें पांचफोरन, तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाएं। जब तड़का अच्छी तरह चटक जाए, तो इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, लहसुन और टमाटर का पेस्ट डालें। इस मसाले को तब तक भूनें जब तक कि वह तेल न छोड़ने लगे। मसाला तैयार होने पर इसमें उबले हुए आलू को हाथों से मैश करके मिला दें।
इसके बाद इसमें हल्दी, नमक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और थोड़ा गरम मसाला डालें। अगर आप पारंपरिक स्वाद पाना चाहते हैं, तो मसालों को सिलबट्टे पर पीसकर इस्तेमाल करें, जिससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। जब मसाले पूरी तरह भुन जाएं, तो अपनी जरूरत के अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें। उबाल आने पर इसमें पहले से फ्राई की हुई गोभी डाल दें और धीमी आंच पर कुछ देर पकने दें। आपकी गरमा-गरम और खुशबूदार सुखौती की सब्जी परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है। मिथिलांचल में लोग इसे उबले हुए चावल यानी भात के साथ मिलकर खाना काफी पसंद करते हैं।











