भारत में मानसून का आगमन अपने साथ ढेर सारे प्राकृतिक उपहार लेकर आता है। इन्हीं में से एक बेहद अनोखी और दुर्लभ सब्जी है जिसे कटरुआ के नाम से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के रुहेलखंड क्षेत्र में स्थित पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बरेली के घने जंगलों में पाई जाने वाली यह सब्जी स्वास्थ्य और स्वाद का अद्भुत मेल है। जो लोग मांसाहारी भोजन के शौकीन हैं, वे भी कटरुआ के आगे चिकन और मटन का स्वाद फीका मानते हैं। यही कारण है कि इसे अक्सर शाकाहारियों के लिए 'वेजिटेरियन मीट' कहकर संबोधित किया जाता है।
कटरुआ की उत्पत्ति और दुर्लभता
कटरुआ वास्तव में कोई साधारण सब्जी नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार का प्राकृतिक फंगस या जंगली मशरूम है जो पूरी तरह से जैविक तरीके से जमीन के अंदर विकसित होता है। इसे खेती के जरिए उगाना संभव नहीं है। आमतौर पर बरसात के मौसम में, विशेष रूप से जब बादलों की गरज और बिजली के चमकने की प्रक्रिया होती है, तो यह साल के पेड़ों की जड़ों के पास मिट्टी के भीतर अपने आप पनपने लगता है।
बाजार में उपलब्धता और कीमत
इस सब्जी की उपलब्धता साल के केवल एक या दो महीनों तक सीमित रहती है, जो मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है। इसकी दुर्लभता और इसके स्वाद की दीवानगी का आलम यह है कि बाजार में इसकी कीमत ₹800 से लेकर ₹1,500 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। इतनी महंगी होने के बावजूद, इसके स्वाद के दीवाने इसे खरीदने के लिए बेहद उत्सुक रहते हैं और बाजार में आते ही यह तेजी से बिक जाती है।
पोषण का पावरहाउस
कटरुआ न केवल अपनी लाजवाब सुगंध और स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि यह पोषक तत्वों का एक शक्तिशाली स्रोत भी है। मांसाहारी विकल्पों जैसे चिकन या मटन में जहां फैट की अधिकता होती है, वहीं कटरुआ शरीर को बिना किसी दुष्प्रभाव के भरपूर ऊर्जा प्रदान करती है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मौजूद होता है, जो शारीरिक मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मरम्मत के लिए अनिवार्य है। इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और यह पूरी तरह से फैट-फ्री है, जिससे दिल की सेहत के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प बन जाता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं, जो बदलते मानसून के मौसम में बीमारियों और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। उच्च फाइबर युक्त होने के कारण यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है।
पकाने की विधि और स्वाद
कटरुआ को तैयार करने का तरीका काफी हद तक मटन पकाने जैसा ही होता है। इसे साफ करना सबसे महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि मिट्टी में रहने के कारण इसकी बाहरी काली परत को पानी से बहुत सावधानी और रगड़कर साफ करना पड़ता है। इसके बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर धीमी आंच पर बनाया जाता है। इसे प्याज, अदरक, लहसुन और सुगंधित खड़े मसालों के साथ भूनकर तैयार किया जाता है। पक जाने के बाद, इसकी ग्रेवी और कटरुआ के टुकड़ों का टेक्सचर और जायका मांस के व्यंजनों से बहुत मिलता-जुलता है।











