रसोई में रोज चावल बनाना जितना आसान लगता है, उतना ही अक्सर वह चिपचिपे और आपस में जुड़े हुए दानों में बदल जाता है। बर्तन खोलते ही जब चावल एक-दूसरे से चिपके नजर आते हैं, तो पूरी थाली का स्वाद और नजारा दोनों बिगड़ जाते हैं। बहुत से लोग इसके लिए चावल की किस्म या क्वालिटी को दोष देते हैं, जबकि असली गड़बड़ ज्यादातर पकाने के तरीके में छिपी होती है। थोड़ी सी सावधानी और कुछ आदतों में बदलाव कर लिया जाए, तो घर पर भी होटल जैसे लंबे, अलग-अलग और खिलखिले चावल आसानी से बनाए जा सकते हैं। रोज के खाने के लिए साधारण चावल बनाना हो या मेहमानों के लिए पुलाव, सही तरीका अपनाने से नतीजे में बड़ा फर्क आता है, और इसके लिए किसी महंगे कुकवेयर या खास सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती।
चावल धोने में जल्दबाजी न करें
ज्यादातर रसोइयों की सबसे आम गलती यही होती है कि वे चावल को एक बार पानी से खंगालकर सीधे गैस पर चढ़ा देते हैं। कच्चे चावल के दानों पर अतिरिक्त स्टार्च की एक परत जमी होती है, और पकने के दौरान यही स्टार्च दानों को आपस में चिपका देता है। इससे बचने के लिए चावल को ठंडे पानी से तीन से चार बार धोना जरूरी है। हर बार पानी बदलते रहें और तब तक धोते रहें जब तक पानी लगभग साफ न दिखने लगे। इस प्रक्रिया में ज्यादा वक्त नहीं लगता, लेकिन इसका असर पकने के बाद साफ नजर आता है। यही तरीका बड़े होटलों और रेस्तरां की रसोई में भी अपनाया जाता है, जहां हर बार एक जैसे बनावट वाले चावल परोसने होते हैं।
पानी की मात्रा का हिसाब बिगड़ने न दें
चावल कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर पानी की मात्रा सही नहीं है तो नतीजा गड़बड़ ही निकलेगा। ज्यादा पानी डालने पर चावल जरूरत से ज्यादा गलकर आपस में चिपकने लगते हैं, जबकि पानी कम रह जाए तो दाने अधपके और सख्त रह जाते हैं। आम सफेद चावल के लिए एक कप चावल पर करीब डेढ़ कप पानी का अनुपात सही माना जाता है। हालांकि हर किस्म के चावल का व्यवहार अलग होता है, इसलिए पैकेट पर छपे निर्देशों पर भी एक नजर डाल लेना समझदारी है। यह छोटा सा हिसाब ही तय करता है कि चावल दानेदार बनेंगे या लुगदी जैसे चिपचिपे।
बार-बार ढक्कन खोलकर चम्मच चलाने से बचें
चावल गैस पर चढ़ाने के बाद बहुत से लोगों की आदत होती है कि वे हर दो-तीन मिनट में ढक्कन उठाकर देख लेते हैं या चम्मच से हिला देते हैं। इस आदत से दाने टूटने लगते हैं और उनके भीतर मौजूद स्टार्च बाहर निकलकर पानी में घुल जाता है। जैसे ही यह स्टार्च बाहर आता है, चावल की बनावट चिपचिपी होने लगती है। इसलिए एक बार ढक्कन बंद करने के बाद चावल के पूरी तरह पकने तक उसे बेवजह न छेड़ें। धैर्य रखना यहां सबसे जरूरी गुण है, क्योंकि हर बार झांकने की जल्दबाजी ही ज्यादातर मामलों में चावल खराब कर देती है।
आंच धीमी रखें, तभी हर दाना बराबर पकेगा
शुरुआत में पानी को उबाल आने तक तेज आंच पर रखा जा सकता है, लेकिन उबाल आते ही गैस को तुरंत धीमा कर देना चाहिए। इसके बाद बर्तन को ढककर चावल को आराम से पकने देना चाहिए। तेज आंच पर पकाने से पानी बहुत जल्दी सूख जाता है, जिसके चलते चावल ऊपर से पके हुए दिखते हैं लेकिन अंदर से कच्चे रह जाते हैं। इसके उलट धीमी आंच पर पकाने से गर्मी और भाप पूरे बर्तन में बराबर फैलती है, जिससे हर दाना एक जैसी सही बनावट में पकता है। यही वजह है कि तेज आंच की जल्दबाजी अक्सर पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है।
पकने के तुरंत बाद परोसने की जल्दबाजी न करें
चावल पूरी तरह पक जाने के बाद गैस बंद कर दें, लेकिन बर्तन को तुरंत न खोलें। इसे करीब 10 मिनट तक ढका ही रहने दें। इस दौरान बर्तन के भीतर बची हुई भाप पूरे चावल में बराबर फैल जाती है और अतिरिक्त नमी का संतुलन भी अपने आप बन जाता है। इतना इंतजार करने के बाद ही कांटे या हल्के हाथ वाले चम्मच से चावल को धीरे-धीरे फुलाना चाहिए। इससे दाने टूटते नहीं हैं और उनका आकार भी बना रहता है, जो देखने में भी अच्छा लगता है और खाने में भी।
छोटी आदतें ही तय करती हैं बड़ा फर्क
रोजमर्रा की भागदौड़ में अक्सर लोग समय बचाने के चक्कर में इनमें से कोई न कोई कदम छोड़ देते हैं, लेकिन असल में यही छोटी-छोटी बातें अंतिम नतीजा तय करती हैं। अगर चावल को अच्छी तरह धोया जाए, पानी का अनुपात सही रखा जाए, पकते समय उसे बेवजह न छेड़ा जाए और पकने के बाद उसे थोड़ा आराम दिया जाए, तो हर बार चावल का स्वाद और बनावट दोनों बेहतर मिलेंगे। जो लोग बिरयानी, पुलाव या फ्राइड राइस जैसी डिशेज बनाते हैं, उनके लिए भी ये आदतें बेहद काम की हैं, क्योंकि इन व्यंजनों की सबसे बड़ी पहचान ही अलग-अलग और खिले हुए दाने होते हैं। अगली बार चावल बनाते वक्त इन पांच बातों का ध्यान रखें और खुद फर्क महसूस करें।











