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मानसून दस्तक देते ही छतरपुर के बाजारों में उमड़ी भीड़, इन पांच देसी फलों की मची है डिमांडखानपान
12 जुल॰ 2026, 7:34 pm (109 दिन पहले)· 3

मानसून दस्तक देते ही छतरपुर के बाजारों में उमड़ी भीड़, इन पांच देसी फलों की मची है डिमांड

बरसात शुरू होते ही छतरपुर जिले के बाजारों में करौंदा, भुट्टा, जामुन, खजूरी और देसी नाशपाती जैसे मौसमी फलों की भारी मांग देखने को मिल रही है, जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं.

मानसून की पहली फुहार पड़ते ही छतरपुर जिले के बाजारों की रौनक बदल जाती है. गर्मी में सूखे पड़े बाजार अचानक कई देसी फलों से भर जाते हैं, जिन्हें खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. इनमें से कुछ फल तो साल भर मिलते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो सिर्फ बरसात के चंद हफ्तों में ही दिखाई देते हैं. आइए जानते हैं बारिश के मौसम में बाजार में छाने वाले उन खास फलों के बारे में, जो स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना हैं.

बचपन की याद दिलाता करौंदा

बरसात शुरू होते ही सबसे पहले जिस फल की चर्चा होती है, वह है करौंदा. यह खट्टा फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों की पसंद है. स्वाद में खट्टा होने के बावजूद लोग इसे नमक लगाकर बड़े चाव से खाते हैं. बरसात के मौसम में करौंदा जमकर खाया जाता है और इसका अचार बनाकर भी रखा जाता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है.

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छतरपुर में आज भी घरों में बच्चों को रोटी पर नेनु यानी मक्खन लगाकर करौंदे के अचार के साथ खिलाया जाता है. इस कॉम्बिनेशन का स्वाद इतना लाजवाब होता है कि बच्चे बिना किसी सब्जी के भी कई रोटियां खा लेते हैं. सिर्फ करौंदे का अचार ही उनके लिए पूरा भोजन बन जाता है. जिले में यह परंपरा आज भी उतनी ही चाव से निभाई जाती है, जितनी पुराने समय में निभाई जाती थी.

हर गली में महकता भुट्टा

बारिश के मौसम में जिस अनाज ने हर जगह अपनी अलग पहचान बना रखी है, वह है भुट्टा. सड़क किनारे भुनते भुट्टे की खुशबू बरसात के मौसम की पहचान बन चुकी है. नींबू और नमक लगाकर खाया जाने वाला भुट्टा स्वाद में तो लाजवाब होता ही है, सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है. यह विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जिससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है और कब्ज जैसी समस्या में भी राहत मिलती है.

कम दिनों में मिलने वाला जामुन

गर्मी का मौसम खत्म होते ही और पहली या दूसरी बारिश गिरते ही बाजार में एक और फल की एंट्री होती है, जिसका नाम है जामुन. इसकी मांग बाजार में जबरदस्त रहती है, लेकिन दिक्कत यह है कि यह फल बहुत कम दिनों के लिए ही उपलब्ध हो पाता है. जो लोग सेहत को लेकर सतर्क रहते हैं, उनके लिए जामुन किसी वरदान से कम नहीं है. फैटी लिवर, शुगर और गैस से जुड़ी समस्याओं में जामुन खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है.

जंगल से आने वाला मीठा खजूरी फल

जामुन के बाद बारी आती है खजूरी फल की, जिसे खजूरी या खजूरी फल के नाम से जाना जाता है. यह पूरी तरह जंगली फल है और इसके पेड़ ज्यादातर खेतों की मेड़ों, बंजर जमीन और जंगल में ही देखने को मिलते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस पेड़ में फल फरवरी-मार्च से ही लगना शुरू हो जाते हैं और पूरी गर्मी इसमें फल लगे रहते हैं. ये फल गर्मी की तपिश को झेलते हुए पेड़ पर टिके रहते हैं और जैसे ही बारिश शुरू होती है, पकना शुरू कर देते हैं.

यही वजह है कि खजूरी फल बरसात के करीब 1 महीने तक ही खाने को मिल पाता है. सेहत के लिए यह बेहद फायदेमंद माना जाता है. स्वाद में यह खजूर जैसा ही मीठा होता है, हालांकि इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे खाते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाता है.

छतरपुर की देसी नाशपाती का जलवा

बरसात के मौसम में छतरपुर जिले के बाजारों में एक और फल की खूब चर्चा रहती है, और वह है देसी नाशपाती. यहां बिकने वाली नाशपाती बाजार में मिलने वाली आम नाशपाती से अलग होती है, क्योंकि यह पूरी तरह देसी किस्म की होती है. दिखने में यह आकार में छोटी और थोड़ी टाइट होती है, लेकिन खाने में उतनी ही मीठी और पौष्टिक होती है. यही वजह है कि जिले के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं और बरसात के मौसम में यह लगभग हर घर में पहुंच जाती है.

सेहत का खजाना हैं ये देसी फल

बरसात के मौसम में छतरपुर जिले के बाजारों में जामुन, करौंदा, खजूरी, भुट्टा और देसी नाशपाती जैसे मौसमी फलों की रौनक देखते ही बनती है. ये सभी फल स्वाद में तो बेहतरीन होते ही हैं, साथ ही सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी माने जाते हैं. बारिश में मिलने वाले ये देसी फल शरीर की इम्यूनिटी को सुपर स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद कर सकते हैं, यही वजह है कि इन्हें खरीदने के लिए बाजारों में हर साल भीड़ उमड़ पड़ती है.

सवाल-जवाब

बरसात में छतरपुर के बाजारों में कौन-कौन से फल मिलते हैं?
बरसात में छतरपुर जिले के बाजारों में जामुन, करौंदा, खजूरी, भुट्टा और देसी नाशपाती जैसे मौसमी फल मिलते हैं.
करौंदे को किस तरह खाया जाता है?
करौंदा खट्टा फल है जिसे लोग नमक लगाकर खाते हैं और इसका अचार बनाकर रोटी के साथ भी खाया जाता है, खासकर छतरपुर में रोटी पर मक्खन (नेनु) लगाकर करौंदे के अचार के साथ.
जामुन खाने के क्या फायदे हैं?
जामुन फैटी लिवर, शुगर और गैस से जुड़ी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन यह फल बहुत कम दिनों के लिए ही बाजार में उपलब्ध रहता है.
खजूरी फल कब से मिलना शुरू होता है और कितने दिन उपलब्ध रहता है?
खजूरी के पेड़ में फरवरी-मार्च से फल लगना शुरू होता है और यह पूरी गर्मी लगे रहते हैं, लेकिन खाने लायक पककर यह सिर्फ बरसात के करीब 1 महीने तक ही मिलता है.
छतरपुर की देसी नाशपाती आम नाशपाती से कैसे अलग है?
छतरपुर में मिलने वाली नाशपाती देसी किस्म की होती है जो दिखने में छोटी और टाइट होती है, लेकिन खाने में मीठी और पौष्टिक होती है.
भुट्टा खाने के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?
भुट्टा विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो इम्यूनिटी मजबूत करने और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है.
खजूरी फल का स्वाद कैसा होता है?
खजूरी फल का स्वाद खजूर जैसा मीठा होता है, हालांकि इसकी तासीर गर्म होती है.
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