राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में भीषण गर्मी के दिनों में खानपान की पुरानी परंपराएं आज भी बेहद जीवंत हैं। इन्हीं में से एक खास व्यंजन है 'चदिया', जो चिलचिलाती धूप और उमस के बीच ग्रामीणों की पहली पसंद बना हुआ है। धोआ उड़द की दाल से तैयार होने वाला यह पारंपरिक भोजन न केवल स्वाद के मामले में लाजवाब है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी अत्यंत गुणकारी माना जाता है। गांव के बड़े-बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक, सभी वर्ग के लोग इस पारंपरिक डिश को बड़े उत्साह और चाव से खाते हैं।
स्वादिष्ट होने के साथ पाचन तंत्र के लिए संजीवनी
गर्मियों के महीनों में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग बाहरी या आधुनिक खानपान के बजाय अपने देसी स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों को प्राथमिकता देते हैं। चदिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल एक ठोस पकवान के रूप में खाया ही नहीं जाता, बल्कि इसे हींग और पुदीने से तैयार ठंडे पानी के साथ एक पेय की तरह पिया भी जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, हींग और ताजा पुदीने का यह विशेष पानी पेट की पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही, यह तेज गर्मी और लू के प्रभाव से शरीर को बचाकर भीतर से ठंडक और राहत पहुंचाता है।
घर की रसोई में आसानी से तैयार होती है चदिया
इस अनूठी डिश को बनाने की पूरी प्रक्रिया काफी सीधी और सरल है। स्थानीय गृहणी मीनाक्षी शर्मा के अनुसार, "चदिया बनाना बहुत आसान है और इसकी सभी सामग्री घर में आसानी से मिल जाती है।" इस डिश को बनाने की शुरुआत धोआ उड़द की दाल से होती है, जिसे रातभर के लिए सादे पानी में भिगोकर रखा जाता है। सुबह तक दाल जब अच्छी तरह फूल जाती है, तब इसे मिक्सी की मदद से बारीक पीस लिया जाता है। इसके बाद एक अलग बर्तन में हींग का गाढ़ा पानी तैयार किया जाता है। पिसी हुई उड़द दाल के छोटे-छोटे गोल आकार या चदिया बनाई जाती हैं और फिर उनके दोनों तरफ हींग का पानी अच्छी तरह लगाया जाता है।
तले जाने से लेकर फ्रिज में ठंडा करने तक की पूरी विधि
सामग्री तैयार होने के बाद पकाने का चरण शुरू होता है। इसके लिए सबसे पहले कढ़ाई में शुद्ध सरसों का तेल डालकर उसे तेज आंच पर गर्म किया जाता है। हींग के पानी से लेपित चदिया को इस गर्म सरसों तेल में डाला जाता है और धीमी-मध्यम आंच पर तब तक तला जाता है जब तक कि उनका रंग सुंदर सुनहरा न हो जाए। पूरी तरह पक जाने के बाद इन्हें तेल से बाहर निकाल लिया जाता है।
इसके पश्चात, इस डिश का मुख्य आकर्षण यानी इसका रसदार पानी तैयार किया जाता है। एक बर्तन में साफ ठंडा पानी लेकर उसमें पिसा हुआ पुदीना, हींग और चुटकी भर नमक अच्छी तरह मिलाया जाता है। तली हुई गरम चदिया को इस पुदीना-हींग वाले पानी में डुबोकर कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दिया जाता है। जब चदिया इस ठंडे पानी को अच्छी तरह सोख लेती हैं और पूरी तरह ठंडी हो जाती हैं, तब इन्हें सर्व किया जाता है। ग्रामीण इसे खाने के साथ-साथ इसके चटपटे और ठंडे पानी की हर घूंट का आनंद लेते हैं।
धौलपुर के गांवों में आज भी कायम है खानपान की यह परंपरा
धौलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि यह व्यंजन गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और ताजगी देने का अचूक उपाय है। पुदीने की प्राकृतिक ठंडक और हींग के औषधीय गुण मिलकर इसे अत्यधिक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बना देते हैं। यही वजह है कि बदलते दौर और आधुनिक व्यंजनों के बीच भी धौलपुर के गांवों में चदिया बनाने और खाने का पारंपरिक रिवाज पूरी शिद्दत के साथ बरकरार है।



















