सतना में अगर घर के छोटे सदस्य कद्दू का नाम सुनते ही मुंह मोड़ने लगते हैं, तो इस बार पारंपरिक बघेलखंड शैली में कद्दू की एक विशेष रेसिपी आजमाई जा सकती है। इस अनोखे अंदाज में बनने वाली खट्टी-मीठी सब्जी का जायका इतना लजीज और चटपटा होता है कि कद्दू से दूर भागने वाले लोग भी इसे चाव से खाने लगते हैं। इसमें मिलाया जाने वाला गुड़ का हल्का मीठापन और अमचूर का खट्टा स्वाद इस पूरी डिश का रूप ही बदल देता है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी महंगे या दुर्लभ सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती है। रसोई में पहले से मौजूद मसालों की मदद से ही यह शानदार देसी व्यंजन आसानी से बनकर तैयार हो जाता है। इसे गरमागरम रोटी, पराठों, पूरियों, दाल-चावल के साथ या फिर बच्चों के स्कूल टिफिन में भी आसानी से परोसा जा सकता है।
कद्दू की सही तैयारी और छंटाई
सतना की रहने वाली स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने इस व्यंजन को तैयार करने की पूरी विधि साझा करते हुए बताया कि इसे बनाना बेहद आसान प्रक्रिया है। सबसे पहले ताज़ा कद्दू लेकर उसका छ पूरी तरह उतारना जरूरी होता है। इसके बाद कद्दू को छोटे-छोटे और एक बराबर टुकड़ों में काट लिया जाता है। इन कटे हुए टुकड़ों को एक बर्तन में साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। धोने के तुरंत बाद इन्हें किसी टोकरी में छानना बहुत आवश्यक होता है ताकि कद्दू के अंदर बचा हुआ सारा अतिरिक्त पानी निकल सके। यदि पानी रह जाएगा तो पकते समय सब्जी का स्वाद फीका पड़ सकता है और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
मसालों के मेल से तैयार होता है देसी स्वाद
तैयारी पूरी होने के बाद एक कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है। तेल के अच्छे से गर्म होने पर उसमें थोड़ी सी हींग और जीरा का छौंक लगाया जाता है। इसके पश्चात कड़ाही में बारीक कटा हुआ प्याज और लहसुन डालकर उसे हल्का सुनहरा होने तक भूना जाता है। अब इसमें हल्की पिसी हुई लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। इन सभी मसालों को कुछ देर तक करछी से चलाने के बाद इसमें गुड़ के टुकड़े डाले जाते हैं और करीब एक से दो मिनट तक अच्छी तरह मिलाया जाता है। गुड़ मसालों के साथ पूरी तरह घुलमिलकर सब्जी में एक खास मीठापन और अनोखा स्वाद पैदा करता है जो इसके जायके को कई गुना बढ़ा देता है।
कद्दू के टुकड़ों को मसालों में पकाना
जब कड़ाही में मसाला पूरी तरह तैयार हो जाए तो उसमें पहले से कटे और धुले हुए कद्दू के टुकड़े मिला दिए जाते हैं। कद्दू को मसालों के साथ इस तरह मिलाया जाता है कि हर एक टुकड़े पर मसाले की अच्छी कोटिंग हो जाए। इसके बाद कड़ाही को ऊपर से ढककर इसे लगभग 10 से 15 मिनट के लिए धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान बीच-बीच में कड़ाही का ढक्कन हटाकर सब्जी को चलाते रहना जरूरी होता है ताकि कद्दू नीचे तली में न चिपके और सभी टुकड़े समान रूप से और अच्छी तरह पक सकें।
अमचूर के खट्टेपन से पूरा होता है स्वाद
जब कद्दू अच्छी तरह नरम हो जाए और मसालों के साथ पूरी तरह रच-बस जाए, तब इसमें अमचूर पाउडर मिलाया जाता है। अमचूर का इस्तेमाल करने से सब्जी में हल्का सा खट्टापन उभर कर आता है जो गुड़ की मिठास के साथ मिलकर इसके स्वाद को बेहद संतुलित और स्वादिष्ट बना देता है। अमचूर की मात्रा कोई भी व्यक्ति अपने स्वाद की पसंद के अनुसार कम या ज्यादा रख सकता है। यदि यह रेसिपी विशेष तौर पर बच्चों के लिए बनाई जा रही है, तो मिर्च की मात्रा कम रखते हुए अमचूर और गुड़ के संतुलन को अपने घर के स्वाद के मुताबिक ढाला जा सकता है।
टिफिन से लेकर रोज की थाली तक का बेहतरीन विकल्प
जब कद्दू पूरी तरह पककर मसालों में रच-बस जाए, तब आपकी बघेलखण्डी स्टाइल की खट्टी-मीठी कद्दू की सब्जी पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है। इसे गरमागरम चपाती या पराठे के साथ परोसा जा सकता है। सुबह के नाश्ते में फुलाए हुए पूरियों के साथ भी इस सब्जी का मेल बहुत शानदार बैठता है। बच्चों के टिफिन बॉक्स में पराठे के साथ इसे पैक किया जा सकता है, वहीं घर के खाने में दाल-चावल के साथ यह रोज की साधारण थाली में एक बिल्कुल नया और मजेदार स्वाद जोड़ देती है।
कम मेहनत और घर के सामान से बदलें खाने का स्वाद
कद्दू की यह पारंपरिक देसी रेसिपी उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है जो रोजाना एक ही तरह की सब्जियां खाकर बोर हो चुके होते हैं। इसे बनाने के लिए किसी तरह की बाहरी या जटिल सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती और घर में मौजूद सामान्य मसालों से ही यह तैयार हो जाती है। गुड़ और अमचूर का यह अनूठा मेल कद्दू को ऐसा जायका देता है जो सामान्य तरीके से बनने वाली कद्दू की सब्जी से बिल्कुल अलग और स्वादिष्ट लगता है। इसलिए यदि आपके घर में भी बच्चे कद्दू खाने से कतराते हैं, तो एक बार इस बघेलखण्डी अंदाज की खट्टी-मीठी सब्जी को जरूर बनाकर खिलाना चाहिए।

















