रामपुर को नवाबों के शहर और उसकी ऐतिहासिक इमारतों के साथ साथ अपनी खास खानपान संस्कृति के लिए भी देशभर में जाना जाता है। इस शहर में कई ऐसे पुराने और पारंपरिक ठिकाने मौजूद हैं जहां आज भी लोगों को वही पुराना स्वाद मिलता है जिसे उन्होंने अपने बचपन के दिनों में चखा था। ऐसे ही लोकप्रिय और ऐतिहासिक खाद्य ठिकानों में थाना गंज क्षेत्र के अस्मतल कैंप में स्थित भूकन लाल की चाट पकौड़ी की दुकान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यहां मिलने वाली रतालू चाट के दीवानों और शौकीनों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और पीढ़ियों से लोग इस जायके का लुत्फ उठाने चले आ रहे हैं।
सात दशकों से कायम है रतालू चाट का जायका
इस प्रतिष्ठित दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां रतालू चाट का अनूठा स्वाद करीब 70 साल से लोगों की जुबान पर लगातार बना हुआ है। दुकान का संचालन कर रहीं ज्योति अरोड़ा के अनुसार उनकी यह पकौड़ी और चाट की दुकान लगभग 70 साल पुरानी है और समय के साथ इसकी लोकप्रियता कम होने के बजाय और अधिक बढ़ती गई है। शुरुआत में इस दुकान पर उनके पिता जी रतालू चाट बेचा करते थे और ग्राहकों को अपनी सेवा देते थे। अब ज्योति खुद इस पारंपरिक कारोबार को पूरी लगन के साथ आगे बढ़ा रही हैं और अपने पिता के काम को संभाल रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि जो बेहतरीन स्वाद कभी उनके पिता ने शहर के लोगों को चखाया था, वही पारंपरिक जायका आज भी ग्राहकों को उसी दुकान पर बिना किसी बदलाव के मिल रहा है।
सस्ती कीमत और दिनभर की व्यस्तता
इस प्रसिद्ध रतालू चाट की कीमत आम आदमी और हर वर्ग की जेब को ध्यान में रखकर बेहद किफायती रखी गई है ताकि कोई भी इसका आनंद उठा सके। यहां रतालू चाट की एक प्लेट सिर्फ 20 रुपये में आसानी से मिल जाती है, जो आज के समय में काफी कम मानी जाती है। ज्योति के मुताबिक उनकी दुकान सुबह करीब 8 बजे ही ग्राहकों के लिए खुल जाती है और तभी से रतालू चाट की बिक्री का सिलसिला शुरू हो जाता है। दुकान की सबसे खास बात यह है कि शाम करीब 5 बजे तक रतालू चाट पूरी तरह से खत्म हो जाती है और कड़ाही खाली हो जाती है। हालांकि दुकान रात के वक्त तक खुली रहती है और अन्य चीजें मिलती हैं, लेकिन रतालू चाट लोगों को इतनी ज्यादा पसंद आती है कि उसका पूरा स्टॉक शाम होने से काफी पहले ही बिक जाता है और देर से आने वाले कई ग्राहकों को मायूस भी लौटना पड़ता है।
बनाने का पारंपरिक तरीका और खास मसाला
इस पारंपरिक चाट को तैयार करने की प्रक्रिया भले ही बहुत सरल लगती है, लेकिन इसका अनोखा और चटपटा स्वाद ही इसे दूसरी दुकानों से बिलकुल अलग और खास बनाता है। इस लजीज व्यंजन को बनाने के लिए सबसे पहले रतालू को पानी में अच्छी तरह से उबाला जाता है ताकि वह पूरी तरह नरम हो जाए। इसके बाद रतालू का छिलका उतारकर उसके छोटे छोटे टुकड़े कर लिए जाते हैं। अब इन उबले हुए टुकड़ों को प्लेट में परोसा जाता है और उसमें भरपूर खटाई तथा ताजा नींबू का रस मिलाया जाता है। इससे रतालू के अंदर एक हल्का और प्राकृतिक खट्टापन आ जाता है जो चाट के संपूर्ण स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। इसके बाद इसमें एक विशेष प्रकार का हल्का मसाला मिलाया जाता है। दुकान पर ही तैयार किया जाने वाला यह चटपटा और खुशबूदार मसाला ही इस चाट का असली और मुख्य आकर्षण है। जैसे ही रतालू के ऊपर यह मसाला डाला जाता है, उसकी मनमोहक खुशबू और स्वाद दोनों में एक अलग ही बदलाव आ जाता है। खटाई, नींबू और इस गुप्त मसाले का मेल साधारण से दिखने वाले उबले हुए रतालू को भी बेहद चटपटा और लजीज बना देता है।
घर पर तैयार मसालों का जादू और ग्राहकों की भीड़
दुकान संचालिका ज्योति के अनुसार चाट में इस्तेमाल होने वाला यह विशेष चटपटा मसाला किसी बाजार से नहीं खरीदा जाता, बल्कि इसे पूरी तरह घर पर ही तैयार किया जाता है। यही मुख्य वजह है कि इसका स्वाद शहर में मिलने वाली अन्य चाट या पकौड़ियों से काफी अलग और अनूठा लगता है। हालांकि आज के समय में रामपुर शहर में चाट और स्ट्रीट फूड के लिए कई नए और आधुनिक ठिकाने खुल चुके हैं, लेकिन भूकन लाल की इस पुरानी और पारंपरिक दुकान की रतालू चाट की अपनी एक अलग और अटूट पहचान है। सुबह जैसे ही दुकान के शटर उठते हैं और कारोबार शुरू होता है, वैसे ही खाने के शौकीन ग्राहक वहां जुटने शुरू हो जाते हैं।



















