फुटबॉल की दुनिया में क्रिस्टियानो रोनाल्डो का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। हाल ही में डेनमार्क के खिलाफ नेशंस लीग मुकाबले में शुरुआती एकादश में जगह नहीं मिलने और उन्हें बेंच पर बैठाए जाने की घटना ने एक बार फिर उनके अंतरराष्ट्रीय भविष्य को लेकर सुगबुगाहट तेज कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद उनके करियर को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
कोच का सकारात्मक रुख और टीम में वापसी के रास्ते
इस पूरे घटनाक्रम पर पुर्तगाल के कोच जॉर्ज जीसस ने बहुत ही स्पष्ट और सकारात्मक रुख अपनाया है। उनका कहना है कि यदि रोनाल्डो वापस टीम में लौटना चाहते हैं, तो उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पूरी तरह से खुले हुए हैं। कोच का यह भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से विदाई लेने का सही वक्त कब और कैसे होना चाहिए, इस बात का अंतिम निर्णय खुद खिलाड़ी को ही करना चाहिए। जॉर्ज जीसस ने रोनाल्डो के अनुभव पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि वह उन्हें मैदान पर उतारने या फिर टीम को मार्गदर्शन देने की भूमिका में देखने के लिए तैयार हैं।
अंतरराष्ट्रीय करियर और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
रोनाल्डो केवल एक साधारण खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि वह पुर्तगाली फुटबॉल की वैश्विक पहचान बन चुके हैं। उनके नाम 234 मैचों में 146 अंतरराष्ट्रीय गोल दर्ज हैं, और वह छह फीफा विश्व कप में गोल करने का अनूठा रिकॉर्ड रखते हैं। मदीरा द्वीप के फुंचाल शहर में 5 फरवरी 1985 को जन्मे रोनाल्डो का शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा हुआ था। उनके पिता जोस डिनिस अवेइरो एक फुटबॉल क्लब में किटमैन के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी मां मारिया डोलोरेस दोस सैंटोस परिवार का पेट पालने के लिए रसोइया और सफाईकर्मी की नौकरी करती थीं। तमाम आर्थिक परेशानियों के बावजूद उनके भीतर फुटबॉल के प्रति अटूट लगन थी और मात्र 12 साल की उम्र में वह घर से दूर लिस्बन चले गए, जहां उन्होंने स्पोर्टिंग सीपी की अकादमी में ट्रेनिंग शुरू की।
मैनचेस्टर यूनाइटेड से चमका सितारा
अगस्त 2003 में स्पोर्टिंग की तरफ से खेलते हुए मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ उनके शानदार प्रदर्शन ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। महान मैनेजर सर एलेक्स फर्ग्यूसन उनकी खेल शैली से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें तुरंत अपनी टीम में शामिल कर लिया। मात्र 18 साल की उम्र में प्रतिष्ठित नंबर 7 जर्सी पहनना उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इंग्लैंड के मैदानों पर उन्होंने अपनी ड्रिब्लिंग, रफ्तार और गोल करने की कला को और अधिक निखारा। इसके बाद साल 2008 में उन्होंने मैनचेस्टर यूनाइटेड के साथ अपनी पहली चैंपियंस लीग ट्रॉफी जीती और अपने करियर का पहला बैलन डी’ओर पुरस्कार भी अपने नाम किया।
रियल मैड्रिड में स्वर्णिम अध्याय
साल 2009 में रोनाल्डो स्पेन के मशहूर क्लब रियल मैड्रिड से जुड़े। इस स्पेनिश क्लब के लिए उन्होंने कुल 450 आधिकारिक गोल दागे और टीम को चार यूईएफए चैंपियंस लीग खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई। इसी दौर में लियोनेल मेसी के साथ उनकी कड़ी प्रतिद्वंद्विता ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और फुटबॉल प्रेमियों के बीच यह बहस छिड़ गई कि आधुनिक युग का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी कौन है। हालांकि दोनों की शैलियां अलग थीं, लेकिन दोनों ने खेल के स्तर को बहुत ऊंचाई तक पहुंचाया। इसके बाद वह इटली के युवेंटस क्लब की तरफ से खेले, फिर मैनचेस्टर यूनाइटेड लौटे और अंत में सऊदी अरब के क्लब अल-नस्र का हिस्सा बने।
भविष्य का फैसला और प्रशंसकों की नजरें
पुर्तगाल की जर्सी पहनकर रोनाल्डो ने 20 अगस्त 2003 को कजाखस्तान के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। विश्व कप जीतने का सपना टूटने के बाद मैदान पर उनके आंसू आज भी प्रशंसकों को याद हैं। अब देखना यह है कि क्या वह एक बार फिर देश के लिए मैदान पर उतरते हैं या नहीं। फुटबॉल के इस महान नायक का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों की निगाहें टिकी हुई हैं।



















