साल्ट लेक स्टेडियम में मौजूद 51,402 घरेलू दर्शकों के जबर्दस्त समर्थन के बीच भारतीय फुटबॉल टीम को एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय दोस्ताना मुकाबले में ब्राजील के हाथों 4-0 के अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी। मुकाबले के पहले 25 मिनट के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार जीवटता दिखाते हुए दक्षिण अमेरिकी दिग्गजों को कड़ी चुनौती पेश की। हालांकि, शुरुआती दबाव झेलने के बाद विश्व फुटबॉल की महाशक्ति ब्राजील ने मुकाबले की गति अपने हाथ में ले ली और भारतीय डिफेंस को छकाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।
ब्राजील के स्टार खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन
साल 2026 विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल चरण से बाहर होने के बाद मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी अपनी टीम का नए सिरे से पुनर्गठन कर रहे हैं। इस नए कलेवर वाली ब्राजीली टीम ने बिना कोई अतिरिक्त जोखिम उठाए पूरे मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा। पहला गोल 28वें मिनट में आया जब एस्तेवाओ ने भारतीय रक्षापंक्ति को भेदते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद हाफ टाइम से ठीक पहले 42वें मिनट में पेड्रो ने स्कोरशीट पर अपना नाम दर्ज कराया। दूसरे हाफ में सैमुअल लिनो का जलवा देखने को मिला, जिन्होंने 58वें मिनट में तीसरा और मैच के अतिरिक्त समय यानी 90+5वें मिनट में चौथा गोल दागकर अपनी टीम की आसान जीत पक्की की।
भारतीय एकादश में बदलाव और रक्षापंक्ति का संघर्ष
विश्व रैंकिंग में 44वें स्थान पर काबिज पनामा के खिलाफ 1-1 का ड्रॉ खेलने के बाद भारतीय टीम इस मुकाबले में उतरी थी। मुख्य कोच खालिद जमील ने पिछली एकादश में दो अहम फेरबदल किए थे। उन्होंने अपुइया और रिकी शाबोंग के स्थान पर अनुभवी अनिरुद्ध थापा और सहल अब्दुल समद को मध्यपंक्ति में जिम्मेदारी सौंपी थी। मैच के शुरुआती चरण में इन बदलावों का सकारात्मक असर दिखा और भारतीय खिलाड़ियों ने ब्राजील के हाफ में कुछ बेहतरीन मौके भी बनाए, लेकिन वे उन्हें गोल में तब्दील करने से चूक गए।
गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू की मजबूत दीवार
रियाल मैड्रिड के प्रमुख फॉरवर्ड विनिसियस ने मैच के दौरान लगातार आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने अभिषेक सिंह को चकमा देकर एक बेहद खतरनाक प्रयास किया, लेकिन भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने चुस्ती दिखाते हुए दो शानदार बचाव किए। दूसरी ओर, ब्राजील के कोच एंसेलोटी ने भी अपनी टीम में कई नए चेहरों को आजमाया। नियमित गोलकीपर की जगह पेड्रो मोरिस्को ने कमान संभाली, जबकि माउरो जूनियर के स्थान पर नए खिलाड़ियों को उतारा गया। इसके अतिरिक्त गैब्रियल बोंटेम्पो, आंद्रेई सैंटोस और माथेउजिन्हो को भी मैदान पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।



















