अर्जेंटीना के स्टार लियोनेल मेसी ने अपने शानदार करियर में एक और बड़ा मुकाम जोड़ लिया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अपने पहले ही मुकाबले में उन्होंने वह कर दिखाया, जो फुटबॉल इतिहास में अब तक सिर्फ कुछ ही खिलाड़ियों के नसीब में आया है। मंगलवार को (भारतीय समयानुसार बुधवार) ग्रुप जे के अपने शुरुआती मैच में जैसे ही 38 साल के मेसी मैदान पर उतरे, उन्होंने अर्जेंटीना के लिए अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला पूरा कर लिया।
कैनसस सिटी में जुड़ा नया अध्याय
तीन बार की फीफा वर्ल्ड कप विजेता अर्जेंटीना की टीम कैनसस सिटी के एरोहेड स्टेडियम में अल्जीरिया के सामने उतरी। यही वह मैदान था जहां मेसी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां पड़ाव छुआ। उन्होंने अर्जेंटीना के लिए 2005 में डेब्यू किया था और दो दशक बाद भी वह उसी जुनून के साथ देश की जर्सी पहन रहे हैं। अर्जेंटीना के लिए पुरुष फुटबॉल में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है, अब तक वह देश के लिए 117 गोल दाग चुके हैं।
200 मैच के क्लब में सिर्फ तीसरे नाम
अल्जीरिया के खिलाफ इस मुकाबले के साथ मेसी फुटबॉल इतिहास के महज तीसरे खिलाड़ी बन गए जिन्होंने 200 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हों। इस सूची में सबसे पहला नाम कुवैत के बदर अल-मुतावा का आता है, जिन्होंने सबसे पहले 200 मैच का आंकड़ा छुआ था। उन्होंने 4 सितंबर 2003 से 14 जून 2022 के बीच कुवैत के लिए कुल 202 मुकाबले खेले।
सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड अब भी क्रिस्टियानो रोनाल्डो के पास है। पुर्तगाल के इस दिग्गज ने अब तक 228 मैच खेले हैं और इस दौरान 143 गोल किए हैं। यानी मेसी इस मामले में रोनाल्डो और अल-मुतावा के बाद तीसरे पायदान पर पहुंचे हैं।
छह वर्ल्ड कप खेलने वाले इकलौते खिलाड़ी
इसी मुकाबले ने मेसी के नाम एक और अनोखा रिकॉर्ड कर दिया। वह फीफा वर्ल्ड कप के छह एडिशन में खेलने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बन गए हैं। उन्होंने वर्ल्ड कप में अपना सफर 2006 में सर्बिया और मोंटेनेग्रो के खिलाफ शुरू किया था। तब से लेकर अब तक हर वर्ल्ड कप में उन्होंने कम से कम एक मैच जरूर खेला है, और यह कारनामा अब तक कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं दोहरा पाया है।
देश को दिलाया था वर्ल्ड चैंपियन का ताज
अपने जादुई खेल से करोड़ों दिल जीतने वाले मेसी ने पिछली बार अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतने का सपना भी पूरा किया था। फाइनल में उन्होंने एम्बाप्पे की मजबूत फ्रांस को मात देकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। वह मुकाबला फुलटाइम तक 3-3 की बराबरी पर अटका रहा, लेकिन पेनाल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना ने 4-2 से बाजी मारकर खिताब पर कब्जा जमा लिया।













