बोस ने खुले डिजाइन वाले अपने ऑडियो गैजेट्स की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए Bose Ultra Open Earbuds (2nd Gen) पेश किए हैं, जो बिना कानों को बंद किए संगीत सुनने की सहूलियत देते हैं। यह मॉडल मूल रूप से अपने पुराने संस्करण के जाने-पहचाने ईयर-कफ लुक को बरकरार रखता है, लेकिन इसके भीतर नए ड्राइवर लगाए गए हैं और स्थानिक ऑडियो की क्षमता जोड़ी गई है। इसके साथ ही इसमें पहले से बेहतर बैटरी बैकअप का वादा भी शामिल है, जिससे यह उन लोगों को आकर्षित करता है जो अपने आसपास के माहौल से पूरी तरह कटे बिना गाने सुनना चाहते हैं।
कसरत और दौड़ने के दौरान पकड़ और उपयोगिता
व्यायाम और फिटनेस के शौकीनों के लिए यह नया गैजेट काफी उपयोगी साबित होता है। इसका बेहद हल्का ईयर-कफ ढांचा कानों पर मजबूती से टिका रहता है, जिसकी वजह से तेज दौड़ लगाने या बर्पी जैसी उछल-कूद वाली जोरदार एक्सरसाइज के दौरान भी इसके गिरने का डर नहीं रहता। खुले डिजाइन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बाहर सड़क या पार्क में कसरत करते समय आसपास के वाहनों और लोगों की आवाजें साफ सुनाई देती हैं, जिससे सुरक्षा बनी रहती है। हालांकि, लंबे वर्कआउट सेशन के दौरान कानों के बाहरी हिस्से पर पड़ने वाला हल्का दबाव महसूस होने लगता है। साथ ही, ओपन-फिट डिजाइन की सामान्य कमजोरी के चलते इसमें बेस का उभार बेहद कम रहता है, जिससे तेज धुन वाले कसरत के गानों का जरूरी पंच गायब लगता है।
सफर और दफ्तर के माहौल में प्रदर्शन
लंबी यात्राओं और उड़ानों के दौरान उपयोग के लिहाज से यह डिजाइन उतना असरदार साबित नहीं होता। चूंकि यह कानों को खुला रखता है, इसलिए बाहर का कोई भी शोर दब नहीं पाता। हवाई जहाज के इंजन की गड़गड़ाहट से लेकर पास बैठे मुसाफिरों की बातचीत सीधे कानों तक पहुंचती है। शोरगुल वाले ऐसे माहौल में बेस की कमी संगीत को काफी हल्का और पतला बना देती है। हालांकि, इसका केस काफी छोटा है जो जेब में आसानी से समा जाता है और इसकी 13 घंटे की लगातार चलने वाली बैटरी लंबे सफर के लिए बहुत राहत देती है, बशर्ते घंटों लगातार पहनने से बाहरी कान में होने वाली हल्की चुभन परेशान न करे।
कार्यस्थल या ऑफिस के माहौल में भी इसे तभी चुनना सही है जब सहकर्मियों और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी हो। यह बाहरी आवाजों को बिल्कुल नहीं रोकता, इसलिए दफ्तर में होने वाली बातचीत लगातार सुनाई देती रहती है। अच्छी बात यह है कि इसका साउंड लीकेज काफी नियंत्रित है, जिससे सामान्य वॉल्यूम पर सुनने पर पास बैठे सहयोगियों को कोई परेशानी नहीं होती। फिर भी, लंबे समय तक लगातार पहने रहने से बाहरी कान में हल्का दर्द उभर सकता है।
गेमिंग और कनेक्टिविटी से जुड़ी सीमाएं
वायरलेस गेमिंग के शौकीनों के लिए यह हेडसेट निराश कर सकता है। इसमें गेमिंग के लिए जरूरी कम लेटेंसी वाला कोई अलग डोंगल नहीं मिलता, और सामान्य ब्लूटूथ कनेक्शन पर लेटेंसी का स्तर बार-बार बदलता रहता है। कैजुअल मोबाइल गेमिंग के लिए तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, मगर तेज प्रतिक्रिया वाले गंभीर गेमिंग सेशन के लिए यह बिल्कुल मुफीद नहीं है। इसके अलावा, इसमें वायर्ड कनेक्शन का कोई विकल्प नहीं दिया गया है, यानी इसे सिर्फ और सिर्फ ब्लूटूथ वायरलेस तकनीक के जरिए ही चलाया जा सकता है।
ऑडियो क्वालिटी और फ्रीक्वेंसी का संतुलन
ध्वनि की शुद्धता के मामले में इसका प्रदर्शन मिला-जुला नजर आता है। इसका मिड-रेंज स्तर काफी संतुलित है, जिससे गायकों की आवाज और मुख्य वाद्य यंत्र बेहद स्पष्ट और स्वाभाविक सुनाई पड़ते हैं। हाई फ्रीक्वेंसी या ट्रेबल का पुनरुत्पादन भी कुल मिलाकर बेहतर है, हालांकि बहुत ऊंची फ्रिक्वेंसी में हल्का उतार-चढ़ाव कुछ बारीक ध्वनियों को थोड़ा नरम कर देता है। दोनों तरफ के ड्राइवरों का संतुलन सटीक है, जिससे स्टीरियो प्रभाव में वाद्य यंत्रों की सही स्थिति का आभास होता है और हार्मोनिक डिस्टॉर्शन बेहद कम रहता है। इसकी सबसे कमजोर कड़ी इसका -18 dB का बहुत कमजोर बेस है, जो संगीत के प्रभाव को काफी घटा देता है।
कानों पर इसे लगाने की स्थिति भी ध्वनि की गुणवत्ता तय करती है। चूंकि यह कान के छेद को सील नहीं करता बल्कि बाहरी हिस्से पर क्लिप की तरह अटकता है, इसलिए कान पर इसकी जगह बदलते ही बेस और सबसे ऊंची ट्रेबल फ्रीक्वेंसी में बदलाव आ जाता है। हालांकि मिड-रेंज हर स्थिति में एक जैसा बना रहता है, फिर भी हर बार पहनते वक्त इसे सही जगह सेट करना जरूरी हो जाता है। ध्वनि का फैलाव रोकने के मामले में यह अपने खुले डिजाइन के बावजूद काफी हद तक ऑडियो को बाहर बिखरने से रोकता है, लेकिन शांत कमरे में मध्यम से तेज आवाज पर पास बैठे व्यक्ति को पतली सी आवाज सुनाई दे सकती है।
माइक्रोफोन की आवाज और शोर दबाने की क्षमता
कॉलिंग के दौरान इसके माइक्रोफोन की आवाज पर्याप्त रूप से साफ सुनाई देती है, हालांकि यह बहुत जीवंत या बिल्कुल स्वाभाविक नहीं लगती। डिवाइस के अंदरूनी वॉयस-प्रोसेसिंग एल्गोरिदम के कारण आवाज की गुणवत्ता ठीकठाक बनी रहती है। यह माइक पंखों की हवा या एयर कंडीशनर की लगातार आने वाली हल्की भिनभिनाहट को आवाज से अलग करने में सफल रहता है। इसके उलट, मेट्रो ट्रेन जैसी बहुत तेज और कर्कश आवाजों वाले माहौल में यह संघर्ष करता है और कई बार बोलने वाले की आवाज पूरी तरह कटने लगती है।























