इलेक्ट्रॉनिक सामान या घरेलू उपकरण खरीदते समय अक्सर पैकेजिंग पर एक चेतावनी लेबल दिखाई देता है जिसमें लिखा होता है कि यह उत्पाद कैलिफोर्निया राज्य द्वारा कैंसर, जन्मजात दोष या प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों से युक्त माना गया है। कई बार सेकेंड हैंड सामान बेचने वाले विक्रेताओं या खरीदारों को जब ऐसा लेबल दिखता है तो वे असमंजस में पड़ जाते हैं कि क्या इस उत्पाद का इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं। इस तरह की चेतावनी का सीधा संबंध कैलिफोर्निया के ऐतिहासिक कानून प्रोपोजिशन 65 से है, जिसे आधिकारिक तौर पर सेफ ड्रिंकिंग वॉटर एंड टॉक्सिक एनफोर्समेंट एक्ट के नाम से जाना जाता है। भोजन, कॉस्मेटिक्स, स्मार्टफोन, टीवी और सामान्य घरेलू सामान तक फैली यह चेतावनी व्यवस्था इस वर्ष अपनी 40वीं वर्षगांठ मना रही है, लेकिन आज भी आम उपभोक्ताओं के बीच इसे लेकर भ्रम बना हुआ है।
कैलिफोर्निया के प्रोपोजिशन 65 की शुरुआत और कानूनी ढांचा
नवंबर 1986 में कैलिफोर्निया के मतदाताओं ने 63 प्रतिशत बनाम 37 प्रतिशत के भारी बहुमत से प्रोपोजिशन 65 को मंजूरी दी थी। यह मूल रूप से एक अधिकार आधारित कानून (राइट टू नो लॉ) है, जिसका उद्देश्य कैलिफोर्निया के निवासियों को उन रसायनों के संभावित जीवनभर के एक्सपोजर के प्रति जागरूक करना है जो कैंसर या प्रजनन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह कानून रसायनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाता, बल्कि जब किसी उत्पाद से होने वाला संभावित एक्सपोजर तय सीमाओं से अधिक होता है, तो कंपनियों को चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य बनाता है। यूसी बर्कले के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की पर्यावरण स्वास्थ्य वैज्ञानिक मेगन श्वार्ज़मैन के अनुसार, "उस समय यह जहरीले रसायनों के संपर्क को लेकर जनता की बढ़ती चिंताओं को दूर करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा था।"
इस चेतावनी का मुख्य उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वयं फैसला ले सकें। कोई चेतावनी देखकर व्यक्ति वैकल्पिक उत्पाद चुन सकता है, उस वस्तु का उपयोग कम कर सकता है, या रासायनिक संपर्क को घटाने के अन्य उपाय कर सकता है। इसके अलावा, प्रोपोजिशन 65 कंपनियों को भी अपने उत्पादों के फॉर्मूले बदलने या निर्माण प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करता है, ताकि ग्राहकों को दूर भगाने वाले चेतावनी लेबलों से बचा जा सके। कैलिफोर्निया एक विशाल उपभोक्ता बाजार है, इसलिए वहां से बाहर बनी या बेची जाने वाली वस्तुओं को भी इन नियमों का पालन करना पड़ता है। अमेज़न और टारगेट जैसे बड़े खुदरा विक्रेता भी अपने वेंडर्स के लिए प्रोपोजिशन 65 के अनुपालन को अनिवार्य बनाते हैं।
प्रपोजिशन 65 की सूची में रसायनों को कैसे शामिल किया जाता है
यह कानून केवल रसायन की उपस्थिति जांचने के बजाय वास्तविक संपर्क (एक्सपोजर) पर ध्यान केंद्रित करता है। कैलिफोर्निया का ऑफिस ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ हैज़ार्ड असेसमेंट (OEHHA) सूचीबद्ध रसायनों के लिए सेफ-हार्बर स्तर निर्धारित करता है, और इस स्तर से अधिक एक्सपोजर की स्थिति में ही लेबल की आवश्यकता होती है। इस मास्टर लिस्ट में प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों प्रकार के रसायन शामिल हैं। उदाहरण के लिए, आहार पूरक (सप्लीमेंट्स) में सीसा (लेड), कैडमियम और आर्सेनिक जैसे प्राकृतिक या पर्यावरणीय संदूषकों की सूक्ष्म मात्रा हो सकती है। इस सूची को वर्ष में कम से कम एक बार अपडेट किया जाता है, और नए वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर रसायनों को हटाया भी जा सकता है।
किसी भी रसायन को इस सूची में शामिल करने के लिए चार प्रमुख तंत्र कार्य करते हैं: कैलिफोर्निया लेबर कोड के माध्यम से, कैलिफोर्निया की कार्सिनोजेन आइडेंटिफिकेशन कमेटी (CIC) या डेवलपमेंटल एंड रिप्रोडक्टिव टॉक्सिकेंट आइडेंटिफिकेशन कमेटी (DARTIC) के मूल्यांकन द्वारा, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) जैसी आधिकारिक संस्थाओं द्वारा पहचान से, या किसी राज्य अथवा संघीय एजेंसी के निर्देशों द्वारा। कार्सिनोजेन आइडेंटिफिकेशन कमेटी की सदस्य और कैंसर महामारी वैज्ञानिक मारियाना सी. स्टर्न बताती हैं कि समिति में महामारी वैज्ञानिक, विषविज्ञानी, आणविक जीवविज्ञानी और कैंसर वैज्ञानिक शामिल होते हैं जो उपलब्ध शोध पत्रिकाओं का गहन समीक्षा करते हैं। मारियाना सी. स्टर्न का कहना है, "हम किसी एक ही रसायन का विश्लेषण करने में पूरा दिन लगा सकते हैं।" कई बार पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर रसायन को सूची में शामिल नहीं किया जाता।
अत्यधिक चेतावनियों का भ्रम और 2028 के नए नियम
उत्पाद पर चेतावनी लेबल होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह वस्तु खतरनाक मात्रा में रसायन रखती है या उसकी लैब टेस्टिंग हुई ही है। मेगन श्वार्ज़मैन के अनुसार, कुछ कंपनियां टेस्टिंग या रिफॉर्म्युलेशन के खर्च से बचने के लिए एहतियातन लेबल लगा देती हैं, हालांकि शोध बताते हैं कि अधिकांश कंपनियां रसायन की वास्तविक उपस्थिति के कारण ही लेबल लगाती हैं। हर जगह चेतावनी लेबल दिखने के कारण उपभोक्ताओं के लिए यह तय करना कठिन हो जाता है कि किस चेतावनी पर अधिक ध्यान दिया जाए। OEHHA के प्रोपोजिशन 65 कार्यान्वयन कार्यक्रम की सेक्शन चीफ टीना कॉक्स के अनुसार, "कोई भी अनावश्यक चेतावनी उपभोक्ताओं के लिए यह पहचानना मुश्किल बना देती है कि वास्तविक जोखिम कहां है।" इससे चेतावनी का मूल मूल्य भी कम होता है।
इस समस्या से निपटने के लिए कैलिफोर्निया सरकार ने लेबलों को अधिक स्पष्ट बनाने के नए नियम लागू किए हैं। अब केवल सामान्य संदेश लिखने के बजाय शॉर्ट-फॉर्म लेबलों पर कम से कम एक विशिष्ट रसायन का नाम लिखना अनिवार्य किया जा रहा है। कंपनियों के पास इस नए नियम का पूरी तरह पालन करने के लिए जनवरी 2028 तक का समय है। इसके साथ ही राज्य सरकार कंपनियों को यह समझाने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रही है कि कब चेतावनी देना कानूनी रूप से आवश्यक है और कब नहीं।
वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम का आकलन: उपस्थिति बनाम संपर्क दर
प्रोपोजिशन 65 का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सचेत करना है, न कि यह बताना कि कौन सा उत्पाद खरीदना चाहिए। दूसरी ओर, जिस उत्पाद पर लेबल नहीं है, वह भी पूरी तरह रसायन मुक्त हो इसकी कोई गारंटी नहीं है। वायु प्रदूषण वैज्ञानिक शाहिर फुआद मसरी बताते हैं, "आप कभी भी शून्य जोखिम की स्थिति में नहीं हो सकते, भले ही आप सभी प्रोपोजिशन 65 लेबलों से बचें।" यदि किसी उत्पाद पर लेबल नहीं है, तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं: या तो उसे टेस्ट किया गया और वह सुरक्षित पाया गया, या फिर किसी ने उसे लैब में जांच के लिए भेजा ही नहीं।
जोखिम का मूल्यांकन हर व्यक्ति की सहनशीलता, उपयोग की आवृत्ति और खुराक पर निर्भर करता है। टीना कॉक्स स्पष्ट करती हैं कि किसी एक उत्पाद के एक बार उपयोग से कैंसर नहीं होता, लेकिन जीवनभर कई उत्पादों के माध्यम से उसी रसायन के बार-बार संपर्क में आने से कैंसर या प्रजनन क्षमता पर विपरीत असर पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। त्योहारों पर इस्तेमाल होने वाली डेकोरेटिव लाइट्स इसका अच्छा उदाहरण हैं। इनके प्लास्टिक घटकों को लचीला बनाने के लिए पीवीसी (PVC) में थैलेट्स (phthalates) मिलाया जाता है, जो समय के साथ निकलकर हाथों या घर की धूल में मिल जाते हैं। ऐसे मामलों में थोड़ी देर संभालने के बाद हाथ धोना और बच्चों को दूर रखना एक व्यावहारिक कदम है।
इसी तरह, पेचकस या अन्य टूल्स का इस्तेमाल करते समय दस्ताने पहनकर त्वचा के सीधे संपर्क को कम किया जा सकता है। हमारे शरीर में हाथों की त्वचा मोटी होती है जो कम अवशोषण करती है, जबकि चेहरे की त्वचा पतली होती है। इसलिए रोजाना सीधे चेहरे पर लगाए जाने वाले एलईडी (LED) ब्यूटी मास्क और कभी-कभी दस्ताने पहनकर इस्तेमाल किए जाने वाले पेचकस के जोखिम स्तर में बड़ा अंतर होता है।
सुरक्षित खरीदारी के लिए व्यावहारिक कदम और आधिकारिक संसाधन
जब भी आप प्रोपोजिशन 65 की चेतावनी वाला कोई उत्पाद देखें, तो घबराने के बजाय कुछ बुनियादी बातों की जांच करें। सबसे पहले यह देखें कि क्या लेबल पर विशिष्ट रसायन का नाम लिखा है। इसके बाद निर्माता द्वारा दी गई टेस्टिंग रिपोर्ट या विश्वस्त थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन की जांच करें। अपने उपयोग की आवृत्ति का मूल्यांकन करें, क्योंकि कभी-कभार उपयोग और रोजाना के इस्तेमाल में अंतर होता है। यह कभी न मानें कि लेबल न होने का मतलब उत्पाद में कोई हानिकारक तत्व नहीं है।
अधिक विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट P65warnings.ca.gov पर जाकर व्यक्तिगत रसायनों और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा विशिष्ट प्रश्नों के लिए एक समर्पित हेल्प डेस्क, ईमेल और फोन लाइन उपलब्ध है। गर्भवती महिलाओं, गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं या पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को स्वास्थ्य संबंधी कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। मेगन श्वार्ज़मैन का कहना है कि जहरीले तत्वों के एक्सपोजर को पूरी तरह अपरिहार्य मानकर बैठने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उपभोक्ता के तौर पर हम अपनी सुरक्षा के लिए कई व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं।


















