सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की बिना इजाजत रिकॉर्डिंग करने वाले स्मार्ट चश्मों की निगरानी के लिए एक नया मोबाइल टूल सामने आया है। अगस्त में पेश किए जाने के बाद से ही जकऑफ नाम के इस खास सॉफ्टवेयर ने प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहने वाले लोगों का ध्यान खींचा है। डिजिटल स्टोर के आंकड़ों पर गौर करें तो इस ऐप्लिकेशन को एप्पल के ऐप स्टोर से 5,000 से अधिक यूजर अपने फोन में इंस्टॉल कर चुके हैं, जबकि गूगल प्ले स्टोर पर इसकी डाउनलोड संख्या 1,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। तकनीक के इस दौर में जब चश्मों में लगे छोटे कैमरे साधारण आंखों से पकड़ में नहीं आते, तब यह टूल बिना सहमति वीडियो बनाए जाने के खतरे को कम करने का प्रयास करता है।
स्मार्ट वियरेबल्स और प्राइवेसी से जुड़े खतरे
मेटा के स्मार्ट चश्मे बीते कुछ महीनों के दौरान लगातार गंभीर जांच और आलोचना के घेरे में रहे हैं। अनचाही व गुप्त वीडियोग्राफी अब सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुकी है, जहां कुछ लोग अपनी डेट्स तक को रिकॉर्ड करने के लिए इन गैजेट्स को पहनकर पहुंच रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूलों और सिनेमाघरों जैसे कई संस्थानों ने अपने परिसरों में इनके इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगानी शुरू कर दी है। साल 2025 के दौरान मेटा ने लगभग 70 लाख स्मार्ट ग्लासेज की बिक्री दर्ज की थी, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे गुप्त कैमरों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
जनवरी में सामने आई बीबीसी की एक पड़ताल में दर्जनों ऐसे सोशल मीडिया खातों का खुलासा हुआ था, जहां मेटा ग्लासेज के जरिए सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की बिना सहमति बनाई गई क्लिप्स साझा की जा रही थीं। इस तरह के मामलों में एक वीडियो तो ऐसा भी पाया गया, जिसमें 21 साल की एक युवती का चेहरा और निजी फोन नंबर सार्वजनिक कर दिया गया था और उस पोस्ट को 13 लाख से अधिक बार देखा गया। इस प्रकार के वाकयों ने इन वियरेबल उपकरणों के गलत इस्तेमाल पर तीखी बहस छेड़ दी है।
सिग्नल ट्रैकिंग की मदद से पहचान
इस सुरक्षा ऐप को तैयार करने वाले शिडलोव्स्की ने बाजार में मौजूद अलग-अलग स्मार्ट चश्मों द्वारा प्रसारित होने वाले ब्लूटूथ सिग्नलों को रिकॉर्ड किया। इस सिग्नल डेटा के आधार पर उन्होंने हर एक मॉडल का एक खास डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार किया। इसके लिए उन्होंने आवश्यक हार्डवेयर जुटाया ताकि वह ऐसा डेटाबेस तैयार कर सकें, जो किसी उपकरण के यूनिक आइडेंटिफायर को उसके निर्माता पहचानकर्ता से मिला सके। इस तकनीक के दम पर यह ऐप आसपास मौजूद रे-बैन मेटा, ओकले मेटा और स्नैप स्पेक्टेकल्स जैसे चश्मों की मौजूदगी तुरंत पकड़ लेता है।
इन चश्मों में रिकॉर्डिंग के समय जलने वाली इंडिकेटर लाइट को छोटे-मोटे हार्डवेयर बदलावों के जरिए बंद करना काफी आसान साबित हुआ है, जिससे कई लोग बिना पकड़े गए दूसरों की रिकॉर्डिंग करने में सफल हो जाते हैं। हालांकि मेटा ने जुलाई में घोषणा की थी कि वह एक सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करेगी, जो एलईडी लाइट के साथ किसी भी तरह की शारीरिक छेड़छाड़ या उसके टूटने की पहचान कर सकेगा और ऐसी स्थिति में कैमरों से रिकॉर्डिंग बंद कर देगा। इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में मेटा के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एंड्रयू बोसवर्थ ने दावा किया था कि कंपनी ने कैमरे को इस तरह डिजाइन किया है कि आसपास के लोगों को उसका पता चल सके। लेकिन हकीकत यह भी है कि इस उत्पाद का सबसे बड़ा बाजार आकर्षण ही यह रहा है कि इसका कैमरा आम कैमरे जैसा बिल्कुल नहीं दिखाई देता।
ऐप की सीमाएं, कानूनी स्थिति और प्रीमियम फीचर्स
जकऑफ ऐप यह साफ नहीं बता सकता कि पास में मौजूद कोई चश्मा उस वक्त रिकॉर्डिंग कर रहा है या नहीं, और न ही यह उस चश्मे को पहनने वाले व्यक्ति की पहचान उजागर कर सकता है। यह ऐप केवल ब्लूटूथ सिग्नल की ताकत को मापकर आसपास दूरी का एक अनुमानित संकेत देता है। कानून निर्माताओं द्वारा कड़े कदम उठाए जाने तक यह अदृश्य समस्या को कम से कम आंशिक रूप से भांपने में मदद जरूर करता है। इस बीच कैलिफोर्निया और अन्य क्षेत्रों ने रिकॉर्डिंग लाइट बंद करने या बिना सहमति वीडियो बनाने को कानूनी अपराध बनाने की दिशा में कड़े कदम उठाए हैं।
मेटा के लिए इस ऐप को कानूनी तौर पर बंद करवाना बेहद कठिन है, क्योंकि यह चश्मों से निकलने वाले सिग्नलों में कोई रुकावट पैदा नहीं करता बल्कि सिर्फ उन्हें सुनता है। ऐप में बुनियादी स्कैनिंग की सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी गई है। इसके अलावा 25 डॉलर की कीमत पर जकऑफ प्रो संस्करण भी उपलब्ध है। इस प्रो मॉडल में स्कैन हिस्ट्री को दर्ज करने, डेटा को सीएसवी फाइल के रूप में एक्सपोर्ट करने, होमस्क्रीन विजेट लगाने और बैकग्राउंड में लगातार स्कैन कर स्क्रीन बंद होने पर भी अलर्ट भेजने जैसे उन्नत फीचर्स जोड़े गए हैं।
















