कम उम्र की युवतियों और किशोरियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस और प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी पीएमएस से जुड़ी दिक्कतें तेजी से देखने को मिल रही हैं। अक्सर मासिक धर्म में अनियमितता, चेहरे पर अनचाहे बाल आना, जिद्दी मुहांसे और शरीर का भार अचानक बढ़ जाना इसके प्रमुख संकेतों में शामिल होते हैं। कई बार युवतियां इन बदलावों को सामान्य शारीरिक प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इन शारीरिक संकेतों की अनदेखी करना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। यह परेशानी केवल अंडाशय यानी ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शरीर के संपूर्ण हार्मोनल संतुलन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
अनियमित दिनचर्या और मानसिक तनाव की भूमिका
आयुर्वेदिक फिजिशियन और महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. पूजा का स्पष्ट मानना है कि आधुनिक जीवनशैली हमारे शरीर की कार्यप्रणाली पर गहरा असर डालती है। अत्यधिक मानसिक तनाव, डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, देर रात तक जागने की आदत और शारीरिक वजन में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। हालांकि, प्रत्येक युवती में इस समस्या के उत्पन्न होने की वजह पूरी तरह एक जैसी नहीं होती है। यदि परिवार में पहले से किसी महिला को यह समस्या रही हो, तो आनुवंशिक प्रभाव के चलते इसका खतरा और अधिक बढ़ सकता है। पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक्स से जुड़े जोखिम भी इस विकार की एक प्रमुख वजह बन सकते हैं।
पहचानें शारीरिक संकेत और डॉक्टरी जांच
यदि मासिक चक्र बार-बार और लगातार अनियमित हो रहा हो, तो इसे कभी भी सामान्य समझकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक वजन में वृद्धि होना भी इसका एक बड़ा अलार्म हो सकता है। इसके अलावा यदि चेहरे पर जरूरत से ज्यादा अनचाहे बाल उगने लगें या त्वचा पर मुंहासों की समस्या लगातार बनी रहे, तो सतर्क हो जाना बेहद आवश्यक है। इन लक्षणों को केवल उम्र के साथ होने वाला साधारण बदलाव मानकर टालना सही नहीं होता है। ऐसे किसी भी शारीरिक बदलाव का अहसास होते ही तुरंत किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ताकि उचित समय पर आवश्यक जांच और सही मेडिकल मूल्यांकन किया जा सके।
व्यक्तिगत उपचार योजना की आवश्यकता
डॉ. पूजा के अनुसार, इस स्थिति में सभी मरीजों के लिए कोई एक सामान्य या तय इलाज लागू नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक युवती के शरीर की प्रकृति, उसके विशिष्ट लक्षण और पिछली मेडिकल हिस्ट्री का गहन विश्लेषण करने के बाद ही चिकित्सक एक उपयुक्त उपचार योजना तैयार करते हैं। इसी वजह से बिना किसी योग्य डॉक्टर की सलाह के खुद से कोई भी दवा या पोषण संबंधी सप्लीमेंट शुरू करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले घरेलू नुस्खों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपनी दिनचर्या में शामिल करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि गलत उपचार स्थिति को और जटिल बना सकता है।
संतुलित आहार, नींद और नियमित व्यायाम से प्रबंधन
इस हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित करने में केवल दवाओं का योगदान पर्याप्त नहीं होता है, बल्कि दैनिक आदतों में सुधार की सबसे बड़ी भूमिका होती है। रात को सही समय पर सोना और सुबह समय पर जागना शरीर के प्राकृतिक चक्र को दुरुस्त रखने के लिए अनिवार्य है। मानसिक तनाव को नियंत्रित रखने के उपाय करने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि को शामिल करना बेहद आवश्यक है।
डॉ. पूजा के अनुसार, इस विकार के लक्षण दिखने पर घबराने या डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन इसे अनदेखा करना भी बिल्कुल उचित नहीं है। समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर और उपयुक्त उपचार के साथ बेहतर जीवनशैली अपनाकर इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक आवश्यकताएं भिन्न होती हैं, इसलिए किसी भी उपचार की शुरुआत हमेशा डॉक्टर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही करनी चाहिए।

















