वजन मापने वाले तराजू और घरेलू वेइंग मशीन की दुनिया में हाल के दिनों में एक बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिला है। जीएलपी-1 दवाओं और फिटनेस को लेकर बढ़ती उत्सुकता ने लोगों को इस बात पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है कि उनका शरीर असल में किस दिशा में बदल रहा है। पुराने और सीमित फीचर वाले स्केल्स की जगह अब ऐसे एडवांस्ड स्मार्ट डिवाइसेज ने ले ली है जो केवल शरीर का कुल भार नहीं बताते, बल्कि दिल की धड़कन नापने से लेकर मांसपेशियों और पानी की मात्रा का पूरा विभाजन सामने रख देते हैं। कई अत्याधुनिक मॉडल तो इनबिल्ट ईसीजी सिस्टम के जरिए दिल की सेहत पर भी बारीक नजर बनाए रखने में मदद करते हैं, और सारा डेटा सीधे मोबाइल ऐप में सिंक हो जाता है।
हैंडलबार और फुल बॉडी स्कैनिंग तकनीक का आगमन
बाजार में इस श्रेणी का सबसे बड़ा बदलाव ऐसे नए फुल बॉडी स्कैनर्स का आना है जिनमें हाथों में पकड़ने वाला हैंडल मौजूद होता है। आम घरेलू वेइंग मशीन सिर्फ पैरों के जरिए बायोइलेक्ट्रिकल इम्पीडेंस एनालिसिस (बीआईए) तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। इस पुरानी पद्धति में हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल केवल पैरों और कमर के निचले हिस्से तक ही पहुंच पाते हैं, जिससे शरीर के ऊपरी हिस्से का सही अंदाजा नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, हैंडलबार से लैस मॉडल पैरों के साथ-साथ हाथों के जरिए भी स्कैनिंग करते हैं। इन दोनों तरह के तराजू से मिलने वाले बॉडी फैट प्रतिशत के आंकड़ों में 6 प्रतिशत तक का अंतर देखा जा सकता है, जिसमें पूरे शरीर को स्कैन करने वाले सिस्टम आमतौर पर ज्यादा बॉडी फैट का आंकड़ा दर्शाते हैं क्योंकि वे पूरे शरीर का जायजा लेते हैं।
सटीक संख्या या लगातार दिखने वाला ट्रेंड
शरीर की सेहत का सही मूल्यांकन करते समय यह समझना जरूरी है कि हर दिन दिखने वाली सटीक संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण वह ट्रेंड लाइन होती है जो समय के साथ बनती है। अगर आपका ओवरऑल ग्राफ सही दिशा में जा रहा है, तो मामूली प्रतिशत के फेरबदल से कोई खास फर्क नहीं पड़ता। अपनी डाइट, वर्कआउट रूटीन या किसी दवा के असर को समझने के लिए सबसे अहम बात नियमित रूप से एक ही ढर्रे पर माप लेना है। बाजार में नए और टॉप-टियर फुल बॉडी स्कैनर्स की कीमतें अब 600 डॉलर के पार भी पहुंचने लगी हैं। ऐसे में जो लोग बेहद गंभीर एथलीट नहीं हैं, उनके लिए साधारण फ्लोर स्मार्ट स्केल्स भी बेहद किफायती और उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि वे रोजमर्रा के ट्रेंड्स को आसानी से ट्रैक कर लेते हैं।
ब्लूटूथ बनाम वाई-फाई कनेक्टिविटी
स्मार्ट स्केल्स मुख्य रूप से दो तरह की कनेक्टिविटी विकल्पों में उपलब्ध होते हैं, जिनमें ब्लूटूथ और वाई-फाई शामिल हैं। ब्लूटूथ वाले मॉडल सीधे आपके स्मार्टफोन से जुड़कर डेटा ट्रांसफर करते हैं, जिसके लिए माप लेते समय फोन का आसपास होना जरूरी होता है। दूसरी तरफ, वाई-फाई स्केल्स रीडिंग को सीधे घर के वायरलेस नेटवर्क के जरिए क्लाउड पर भेज देते हैं, जहां से फोन ऐप कभी भी डेटा सिंक कर लेता है। वाई-फाई मॉडल थोड़े महंगे जरूर होते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल ज्यादा सुविधाजनक होता है। नए मॉडलों में फर्मवेयर अपडेट्स के जरिए वायरलेस कनेक्शन की पुरानी खामियों को काफी हद तक दुरुस्त कर दिया गया है।
वजन नापने का सही समय और तरीका
फिटनेस और स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा सुबह उठने के तुरंत बाद वजन नापने की सलाह देते हैं। यह प्रक्रिया शौच आदि से निवृत्त होने के बाद और कुछ भी खाने या पीने से पहले की जानी चाहिए। इसका सबसे बड़ा कारण आंकड़ों की निरंतरता और नियंत्रण बनाए रखना है। दिनभर खाने-पीने से शरीर के वजन में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं, जबकि खाली पेट एक ही तय समय पर तराजू पर खड़े होने से हर सुबह की रीडिंग की निष्पक्ष तुलना हो पाती है। इसके अलावा, सोकर उठते ही शरीर का वजन आमतौर पर दिन के सबसे निचले स्तर पर होता है, जो मानसिक रूप से भी राहत देता है।
अत्याधुनिक फीचर्स और विथिंग्स बॉडीस्कैन 2
जब स्कैनिंग सेंसर की संख्या दो से बढ़कर बारह तक पहुंच जाती है, तो शरीर के अंगों का अलग-अलग विश्लेषण संभव हो जाता है। विथिंग्स का बॉडीस्कैन 2 इस आधुनिक तकनीक का प्रमुख उदाहरण है, जिसकी कीमत 600 डॉलर है। इसमें वापस खिंच जाने वाले हैंडल के भीतर इलेक्ट्रोड्स लगे हैं, जो पैरों से हाथों तक सिग्नल भेजकर कमर से ऊपर के हिस्से का भी विश्लेषण करते हैं। यह डिवाइस दो अलग-अलग तरह के स्कैन पेश करता है। पहला डेली स्कैन है, जिसमें इनबिल्ट लेवलिंग सिस्टम के जरिए यूजर का संतुलन सही होने पर ही वजन, फैट, मसल मास, वाटर पर्सेंटेज, विसरल फैट और हार्ट रेट रिकॉर्ड होता है।
इसके अलावा, हफ्ते में एक बार 90 सेकंड का लॉन्गविटी स्कैन लेने का सुझाव दिया जाता है। यह स्कैन कुल 60 अलग-अलग मीट्रिक्स दर्ज करता है, जिसमें अंगूठे के स्कैनर से ब्लड ऑक्सीजन लेवल, नर्वस सिस्टम रिस्पॉन्स और दिल की सेहत का अनुमान शामिल है। इसमें मौजूद सिक्स-लीड ईसीजी एट्रियल फिब्रिलेशन (एफिब) जैसी स्थितियों की पहचान करने में सक्षम है। वाई-फाई के जरिए यह सारा डेटा मोबाइल ऐप में पहुंच जाता है। हालांकि सामान्य नतीजे तुरंत दिखते हैं, लेकिन ईसीजी नतीजों को ऐप में आने में दो दिन तक का समय लग सकता है क्योंकि उनकी समीक्षा पहले कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा की जाती है।
किफायती विकल्प: रेनफो मॉर्फोस्कैन नोवा
यदि कोई यूजर कम बजट में हैंडलबार स्कैनिंग का अनुभव चाहता है, तो 200 डॉलर की कीमत वाला रेनफो मॉर्फोस्कैन नोवा एक उल्लेखनीय विकल्प बनता है। यह पुराना भारी मैटेलिक-पैड डिजाइन छोड़कर नए स्लीक ग्लास बेस के साथ आता है, जिसमें हैंडल पर बड़ा एलसीडी स्क्रीन दिया गया है। साधारण मॉडल से 30 डॉलर अतिरिक्त खर्च करके मिलने वाले इस अपग्रेड में वेइंग के दौरान वॉइस प्रॉम्प्ट्स और बेहतर बीआईए सेंसर जोड़े गए हैं। यद्यपि इसका वाई-फाई प्रदर्शन थोड़ा धीमा रह सकता है और इसका ऐप महंगे विकल्पों जितना सहज नहीं है, फिर भी एक-तिहाई कीमत में यह व्यापक शारीरिक डेटा उपलब्ध करा देता है। बाजार में रनस्टार, तनीता और विथिंग्स के अन्य विकल्पों के बीच अपनी जरूरत और बजट के आधार पर सही डिवाइस चुनना ही समझदारी है।



















