साइकिल चालकों के सिर की हिफाजत को लेकर दशकों से चली आ रही मान्यताओं को एक नए इनोवेशन ने चुनौती दे दी है। आधिकारिक सुरक्षा मानकों के बदलने का इंतजार किए बिना साइकिलिंग उद्योग लंबे समय से नई सुरक्षा प्रणालियों पर काम कर रहा है। वर्ष 2007 में बाजार में आए मल्टीडायरेक्शनल इम्पैक्ट प्रोटेक्शन सिस्टम यानी MIPS ने प्रीमियम हेलमेट की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में जब वर्जीनिया टेक ने समेशन ऑफ टेस्ट्स फॉर द एनालिसिस ऑफ रिस्क यानी STAR रेटिंग की शुरुआत की, तो हेलमेट निर्माताओं के बीच सुरक्षा को लेकर एक खुली प्रतिस्पर्धा छिड़ गई। यह परीक्षण कानूनी न्यूनतम सीमाओं से आगे बढ़कर सीधे और घुमावदार दोनों तरह के आघातों को मापता है। शुरुआती 30 हेलमेट में से केवल चार ही फाइव स्टार रेटिंग हासिल कर सके थे। हालांकि, तकनीक बेहतर होने के साथ वर्ष 2025 तक 272 में से 167 हेलमेट फाइव स्टार रेटिंग पाने में कामयाब रहे, जिसके चलते वर्जीनिया टेक को अपने मूल्यांकन के पैमाने और कड़े करने पड़े।
शीर्ष स्थान पर पहुंचा पिकियो का नया ओब्लिक सिस्टम
वर्जीनिया टेक के इस कड़े परीक्षण में अब सबसे शीर्ष स्थान पर पिकियो सी ओब्लिक रोड साइकिलिंग हेलमेट पहुंच गया है। सुरक्षा रेटिंग में इसका स्कोर 4.61 दर्ज किया गया है। इस मूल्यांकन प्रणाली में 10.1 या उससे कम स्कोर हासिल करने वाले हेलमेट को फाइव स्टार दिया जाता है, और जितना कम स्कोर होता है, हेलमेट को उतना ही बेहतर माना जाता है। इससे पहले शीर्ष स्थान पर मौजूद कैनियन डिफ्लेक्ट्र का स्कोर 6.82 था। पिकियो का 4.61 स्कोर पिछले सर्वश्रेष्ठ आंकड़े से 2.21 अंक कम है, जो लगभग 32 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्शाता है। यह अंतर इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस सूची में शीर्ष पायदान पर रहने वाले अधिकांश बेहतरीन हेलमेट 7 से 10 अंकों के दायरे में ही रहते हैं।
18 साल के शोध और कठफोड़वे से मिली प्रेरणा
कठफोड़वे पक्षी के सिर टकराने की कुदरती क्षमता और चोट से बचने की शारीरिक बनावट से प्रेरणा लेकर यह डिजाइन तैयार किया गया है। वैंकूवर स्थित इस स्टार्टअप के संस्थापक डेनियल अब्राम ने बताया कि यह कामयाबी आघात से सुरक्षा और हेलमेट डिजाइन पर 18 साल के शोध का नतीजा है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद अब्राम ने साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में हेलमेट से जुड़े शोध पर काम शुरू किया था। वहां उन्होंने ब्रेनशील्ड नामक प्रणाली विकसित करने में मदद की थी, जो सिर पर पड़ने वाले घुमावदार दबाव को कम करती है। इसके बाद उन्होंने बियागार्ड नामक हेलमेट टेक्नोलॉजी कंपनी की नींव रखी, जिसके पेटेंट और बौद्धिक संपदा को वर्ष 2022 में MIPS ने करीब 10 लाख डॉलर देकर खरीद लिया था।
पारंपरिक फोम की जगह अलग-अलग टुकड़ों की बनावट
सड़क पर बिकने वाले अधिकांश साइकिल हेलमेट में एक्सपैंडेड पॉलीस्टाइनिन यानी EPS फोम के ऊपर प्लास्टिक की एक पतली परत चढ़ी होती है। दुर्घटना के दौरान यह फोम दबकर ऊर्जा को सोख लेता है ताकि झटका सिर की हड्डियों तक न पहुंचे। इसके विपरीत, पिकियो की ओब्लिक तकनीक इस पारंपरिक फोम ढांचे को एक ठोस ब्लॉक के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग जुड़े हुए हिस्सों में बांट देती है। प्रत्येक हिस्सा लचीले कनेक्शन प्वाइंट्स के जरिए नीचे मौजूद मूल EPS परत से जुड़ता है। इससे तेज टक्कर की स्थिति में ये हिस्से स्वतंत्र रूप से हिल सकते हैं या अलग हो सकते हैं। सीधी टक्कर को रोकने वाले डुअल डेंसिटी फोम के साथ मिलकर यह लचीलापन सिर पर पड़ने वाले घुमावदार झटके को न्यूनतम कर देता है। अब्राम के अनुसार, सामग्री को सिर्फ एक दिशा में दबाने के बजाय यह प्रणाली प्रभाव की तीव्रता, स्थान और दिशा के हिसाब से मुड़ सकती है, रास्ता मोड़ सकती है और अलग हो सकती है, जिससे दोनों तरह की आघात ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
बाजार की अन्य तकनीकों से किस तरह अलग है यह सुरक्षा व्यवस्था
सिर की सुरक्षा के मामले में बाजार में मौजूद अन्य तकनीकें अलग रास्ते अपनाती हैं। व्यावसायिक रूप से सबसे लोकप्रिय MIPS प्रणाली में एक लो फ्रिक्शन परत होती है, जो टक्कर के शुरुआती 5 से 10 मिलीसेकंड के दौरान 10 से 15 मिलीमीटर तक खिसक सकती है। इसके अलावा MIPS स्फेरिकल दो ऐसे इनर लाइनर्स का उपयोग करता है जो एक दूसरे के सापेक्ष घूमते हैं। वहीं 6D का ओमनी डायरेक्शनल सस्पेंशन यानी ODS एक लाइनर को दूसरे के भीतर लटकाकर रखता है। वेवसेल तकनीक में एक खास सेलुलर संरचना का इस्तेमाल किया जाता है, जो कोणीय आघात के दौरान झुकती है और मुड़ती है। दूसरी ओर, पिकियो का नजदीकी प्रतिस्पर्धी रिलीज लेयर सिस्टम यानी RLS बाहर से घुमावदार दबाव को संभालता है। कैनियन के डिफ्लेक्ट्र और तीसरे स्थान पर रहे थ्री डी प्रिंटेड हेक्सर मिडेन RLS में पॉलीकार्बोनेट बॉल बेयरिंग्स पर टिके बाहरी पैनल होते हैं, जो टक्कर के वक्त घूमकर अलग हो जाते हैं और ऊर्जा को सिर तक पहुंचने से पहले मोड़ देते हैं।
सड़क पर वास्तविक उपयोग, वजन और दैनिक अनुभव
प्रयोगशाला की जांच से अलग वास्तविक दुनिया का अनुभव भी हेलमेट के लिए उतना ही अहम होता है। अधिकांश EPS फोम डिजाइनों की तरह किसी बड़े हादसे के बाद पिकियो हेलमेट को भी बदलना जरूरी होता है। इसके लिए कंपनी क्षतिग्रस्त हेलमेट वापस मिलने पर नए हेलमेट की खरीद पर 30 प्रतिशत की छूट दे रही है। अब्राम ने बताया कि अब तक ऐसे चार हेलमेट बदले जा चुके हैं, और इन मामलों से साबित हुआ कि तकनीक ने अपना काम बखूबी किया और साइकिल चालकों की जान बचाई।
प्रतिदिन के इस्तेमाल के लिहाज से मीडियम साइज में इस हेलमेट का वजन 279 ग्राम है। हालांकि यह अपनी श्रेणी में सबसे हल्का नहीं है, लेकिन इसका डायल आधारित फिटिंग सिस्टम सिर को बिना किसी असहज दबाव के आराम से थामे रखता है। सड़क पर चलने वाले अन्य सामान्य हेलमेट की तुलना में यह थोड़ा भारी जरूर दिखता है, पर इसमें दी गई 17 वेंटिलेशन नलियां सिर को ठंडा बनाए रखती हैं। इसमें ठोड़ी के नीचे पारंपरिक बकल लगाया गया है। 13 ग्राम वजन वाले मैग्नेटिक फिडलोक फास्टनर के बजाय महज 4 ग्राम के सामान्य बकल को चुनने की वजह बताते हुए अब्राम ने स्पष्ट किया कि उनके लिए रूप-रंग और दिखावे से ज्यादा महत्व हमेशा कार्यप्रणाली और उपयोगिता का होता है।
जटिल निर्माण और भविष्य की राह
पिकियो हेलमेट की कीमत 379 डॉलर रखी गई है, जो STAR टेस्ट में दूसरे स्थान पर रहे कैनियन डिफ्लेक्ट्र RLS से पूरे 219 डॉलर अधिक है। कीमत में यह बड़ा अंतर इसकी निर्माण प्रक्रिया की जटिलता के कारण है। एक सामान्य साइकिल हेलमेट में जहां 8 से 10 हिस्से होते हैं, वहीं पिकियो सी में लगभग 80 अलग-अलग घटक इस्तेमाल किए जाते हैं। अलग-अलग फोम के टुकड़े, जटिल लचीले कनेक्शन और दोहरे घनत्व वाली बनावट इसकी लागत को बढ़ा देते हैं। उद्योग में एक नए ब्रांड के रूप में अपनी विश्वसनीयता साबित करना इस स्टार्टअप के लिए अगली बड़ी चुनौती है। जिस तरह MIPS ने एक स्वतंत्र तकनीक से पूरे उद्योग के लिए लाइसेंसिंग समाधान का रूप लिया था, उसी तरह ओब्लिक तकनीक भी आगे चलकर लाइसेंसिंग मॉडल या स्वतंत्र उत्पाद के रूप में विस्तार कर सकती है। कंपनी नए साल की शुरुआत में अपना दूसरा डिजाइन पेश करने की योजना बना रही है।



















