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नागौर में आम के बगीचों की मॉनसून बाद देखभाल से बढ़ेगी अगली पैदावार, जानें जरूरी कृषि उपायराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 5:26 pm (44 मिनट पहले)· 1

नागौर में आम के बगीचों की मॉनसून बाद देखभाल से बढ़ेगी अगली पैदावार, जानें जरूरी कृषि उपाय

बरसात बीतने और तुड़ाई खत्म होने के बाद आम के बगीचों में छंटाई, जल निकासी, पोषण और तनों की सुरक्षा जैसे उपाय अगली फसल में बंपर पैदावार सुनिश्चित करते हैं।

नागौर में बारिश का मौसम समाप्त होने और आम की कटाई पूरी होने के साथ ही बगीचों के रखरखाव का एक नया चक्र शुरू हो जाता है। इस अवधि में बागवानों द्वारा की गई मेहनत सीधे तौर पर आने वाले मौसम में पेड़ों पर आने वाले बौर और फलों के विकास की नींव तैयार करती है। यदि किसान तुड़ाई के तत्काल बाद पोषक तत्वों की आपूर्ति, जल प्रबंधन और पेड़ों के स्वास्थ्य पर काम करना शुरू कर दें, तो पेड़ों की बढ़वार मजबूत होती है और अगले साल मिलने वाली पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

तनों पर नमी से पनपते रोगों की रोकथाम और सुरक्षात्मक लेप

बरसात के तुरंत बाद पेड़ों के तनों में नमी का स्तर काफी अधिक बना रहता है, जिससे फफूंद जनित संक्रमण और छाल से जुड़ी बीमारियों के पनपने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसी कारण बागवानों को पेड़ों के मुख्य तनों और निचली छाल का बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए। यदि छाल पर किसी भी प्रकार के गहरे धब्बे, सड़न या असामान्य रंग-रूप के लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेना आवश्यक है।

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विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर तनों पर बुझा हुआ चूना या कॉपर सल्फेट युक्त सुरक्षात्मक लेप लगाया जा सकता है। रासायनिक घोल तैयार करते समय तय की गई सटीक मात्रा का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि असंतुलित मात्रा छाल के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके साथ ही लेप लगाते समय यह सावधानी बरतना जरूरी है कि यह रसायन पेड़ों की हरी पत्तियों और खुली जड़ों पर न गिरे।

जलभराव की रोकथाम और संतुलित सिंचाई व्यवस्था

लगातार वर्षा के बाद बागों में पानी का जमाव सबसे बड़ी समस्या बन जाता है। यदि जड़ों के आसपास पानी लंबे समय तक ठहरा रहे, तो जड़ सड़न की समस्या शुरू हो सकती है, जो पूरे पेड़ को सूखा सकती है। किसानों को खेत से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए नालियों और रास्तों को पूरी तरह साफ रखना चाहिए ताकि जल निकासी निर्बाध रूप से हो सके।

इसके अलावा आगामी हफ्तों में सिंचाई करते समय मिट्टी की वर्तमान नमी, पेड़ों की उम्र और तापमान का ध्यान रखना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में पेड़ों को अनावश्यक अथवा जरूरत से अधिक पानी देने से बचना चाहिए, क्योंकि नियंत्रित नमी ही पेड़ों को स्वस्थ रखती है।

मिट्टी परीक्षण और संतुलित पोषक तत्वों का प्रयोग

गार्डनिंग एक्सपर्ट हेमलता के अनुसार आम के पेड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने और निरंतर बेहतर विकास के लिए संतुलित आहार बेहद आवश्यक है। बागवानों को अपने खेत की मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण करवाना चाहिए और प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का चयन करना चाहिए। खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद अथवा वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करने से मिट्टी की जैविक संरचना और जल धारण क्षमता में सुधार होता है।

यदि प्रयोगशाला जांच में मिट्टी के भीतर बोरॉन, जिंक, मैग्नीशियम अथवा पोटाश जैसे सूक्ष्म और मुख्य पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है, तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह से निर्धारित मात्रा में इनका छिड़काव या जमीन में प्रयोग करें। पोषण सामग्री डालने के तुरंत बाद उसे मिट्टी से अच्छी तरह ढक देना चाहिए और इसके उपरांत हल्की नमी बनाए रखने के लिए सीमित सिंचाई करनी चाहिए।

अनावश्यक और रोगग्रस्त डालियों की वैज्ञानिक छंटाई

मॉनसून के बाद पेड़ों की ऊपरी शाखाओं का निरीक्षण करना अगला महत्वपूर्ण कदम है। पेड़ों में मौजूद सूखी, टूटी हुई, कीट या रोग से प्रभावित शाखाओं के साथ-साथ आपस में उलझकर रगड़ खाने वाली टहनियों को काट देना चाहिए। जमीन की ओर ज्यादा लटकी हुई शाखाओं को भी छांटना जरूरी होता है ताकि पेड़ों के भीतरी हिस्से तक धूप और खुली हवा का आवागमन सुचारू रूप से बना रहे।

छंटाई कार्य के लिए हमेशा साफ, सैनिटाइज और धारदार कटर अथवा आरी का उपयोग करना चाहिए। ऐसा करने से रोगग्रस्त हिस्सों का फैलाव रुकता है और पेड़ों में नए व स्वस्थ किल्ले फूटते हैं, जो भविष्य में बेहतर फल देने में सक्षम होते हैं।

नियमित सफाई और समग्र निगरानी से सुनिश्चित करें पैदावार

अंततः किसान भाइयों को पूरे बगीचे में गिरी हुई सड़ी पत्तियों, खरपतवार और कचरे को हटाकर स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। नियमित रूप से जल निकासी, पोषण प्रबंधन और रोगों की निगरानी करने से पेड़ों की समग्र प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे आगामी उत्पादन चक्र में उच्च गुणवत्ता वाले आम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सवाल-जवाब

बरसात के बाद आम के पेड़ों के तनों पर लेप क्यों लगाया जाता है?
बरसात के बाद तनों में नमी रहने से फफूंद और बीमारियों का खतरा रहता है, जिसे रोकने के लिए बुझा हुआ चूना या कॉपर सल्फेट युक्त लेप लगाया जाता है।
तनों पर सुरक्षात्मक लेप लगाते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
रसायन की मात्रा कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार रखें और यह ध्यान रखें कि घोल पेड़ों की पत्तियों और जड़ों पर न गिरे।
बगीचे में पानी जमा रहने से पेड़ों को क्या नुकसान हो सकता है?
खेत में पानी जमा रहने से आम के पेड़ों की जड़ों में सड़न और अन्य घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
पेड़ों में खाद डालने से पहले क्या करना चाहिए?
खाद डालने से पहले मिट्टी का परीक्षण करवाना चाहिए और उसकी जरूरत के अनुसार ही गोबर की सड़ी खाद या उर्वरक डालने चाहिए।
मिट्टी परीक्षण में किन तत्वों की कमी दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए?
यदि जांच में जिंक, बोरॉन, मैग्नीशियम या पोटाश की कमी पाई जाए, तो विशेषज्ञ की सलाह से उनका उपयोग करना चाहिए।
आम के पेड़ों की कौन-सी शाखाओं की छंटाई करनी चाहिए?
सूखी, टूटी, रोगग्रस्त, आपस में टकराने वाली और जमीन की तरफ झुकी हुई शाखाओं को साफ औजारों से काट देना चाहिए।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 मिनट पहले

मानसून के बाद किसानों को बागों की देखभाल पर सचमुच ध्यान देना चाहिए, वर्ना कीड़े और फंगस पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·2 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई, फंगस सच में सारा खेल बिगाड़ देती है समय पर लेप न लगाओ तो.

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