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तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार से मांगा जवाबगोवा
25 सित॰ 2026, 1:22 pm (56 मिनट पहले)· 0

तहलका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार से मांगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा यौन शोषण मामले में सुनाई गई 10 साल की कैद के खिलाफ तरुण तेजपाल की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को नोटिस जारी किया है। तेजपाल ने शीर्ष अदालत की शर्त के अनुसार आत्मसमर्पण कर दिया है।

तहलका पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली दस साल के कठोर कारावास की सजा के मामले में शीर्ष अदालत ने कदम आगे बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पत्रकार तरुण तेजपाल की उस विशेष याचिका पर संज्ञान लेते हुए गोवा सरकार को नोटिस थमा दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ तय दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी है। अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान तेजपाल का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने रखा।

शीर्ष अदालत में कपिल सिब्बल ने दी समर्पण की जानकारी

मामले की कार्यवाही शुरू होने पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत की पीठ को अवगत कराया कि न्यायिक निर्देशों का पूरी तरह पालन करते हुए उनके मुवक्किल ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन को आधिकारिक नोटिस जारी करने का फैसला सुनाया और कहा कि याचिका पर विस्तृत सुनवाई की अगली तारीख बहुत जल्द निर्धारित की जाएगी। इससे पहले अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक समर्पण का औपचारिक प्रमाण पत्र पेश नहीं होता, तब तक सजा निलंबन या अपील की मुख्य दलीलों पर सुनवाई संभव नहीं होगी।

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ट्रायल कोर्ट का बरी करने का फैसला हाईकोर्ट में पलटा

यह पूरा कानूनी विवाद साल 2013 की उस आपराधिक घटना से जुड़ा है, जिसमें एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट के अंदर अपनी कनिष्ठ महिला सहकर्मी के यौन शोषण और दुष्कर्म का आरोप तेजपाल पर लगा था। इस प्रकरण में शुरुआत में निचली अदालत ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, बाद में 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने निचली अदालत का फैसला पूरी तरह पलट दिया। हाईकोर्ट ने तेजपाल को आपराधिक कृत्य का दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा मुकर्रर कर दी थी।

जेल भेजने से पहले सरेंडर की समयसीमा तय की गई थी

हाईकोर्ट से दोषसिद्धि मिलने के बाद 62 वर्षीय पत्रकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाकर फौरी राहत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को उनकी अंतरिम राहत की मांग ठुकराते हुए दो हफ्ते की मोहलत दी थी और निर्देश दिया था कि वे पहले समर्पण करें। अदालत ने 22 सितंबर या उससे पहले सरेंडर प्रमाण पत्र दाखिल करने की अंतिम शर्त रखी थी। इन आदेशों के अनुपालन में तेजपाल ने 14 सितंबर को मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जहां से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें उत्तरी गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को किस मामले में नोटिस जारी किया?
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा तरुण तेजपाल को दी गई 10 साल के कठोर कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर गोवा सरकार को नोटिस जारी किया।
अदालत में तरुण तेजपाल की तरफ से कौन पेश हुए?
सुप्रीम कोर्ट में तरुण तेजपाल का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने रखा।
तरुण तेजपाल ने कब और कहां सरेंडर किया?
तेजपाल ने 14 सितंबर को मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत में सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल भेजा गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला सुनाया था?
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत के बरी करने के आदेश को पलटते हुए तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को क्या आदेश दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की तत्काल राहत याचिका खारिज करते हुए दो हफ्ते में सरेंडर करने और 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

कानून अपना काम कर रहा है, भले ही इतने साल लग गए। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि सजा बरकरार रहती है या नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 मिनट पहले

रोहन, कानून काम तो कर रहा है, पर क्या वाकई दस साल से ज्यादा का वक्त लगना न्याय कहा जा सकता है? देर से मिला इंसाफ भी तो सवाल खड़े करता है।

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