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सवर्ण संगठनों के भारी विरोध के बाद यूजीसी के नियमों पर पलटी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में कमेटी बनाने का ऐलानभारत
6 नव॰ 2026, 6:15 pm (1 दिन पहले)· 0

सवर्ण संगठनों के भारी विरोध के बाद यूजीसी के नियमों पर पलटी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में कमेटी बनाने का ऐलान

यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को लेकर मचे बवाल के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा कमेटी बनाने की जानकारी दी है। अगले साल होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को लेकर देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इन नियमों पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है। सवर्ण समाज की लगातार नाराजगी और सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों के बाद सरकार ने नियमों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को इस बात की आधिकारिक जानकारी दी है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या बोले सॉलिसिटर जनरल और मुख्य न्यायाधीश

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार देश के प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थियों का पूरा ध्यान रखेगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी समुदाय का छात्र खुद को उपेक्षित, भयभीत या असुरक्षित महसूस न करे। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी स्पष्ट किया कि देश के हर एक युवा छात्र के हितों की रक्षा करना बेहद जरूरी है और नियम बनाते समय युवा पीढ़ी के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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कमेटी क्या काम करेगी और आगे की प्रक्रिया

सरकार की तरफ से गठित होने वाली यह कमेटी यूजीसी के इन नए नियमों के हर एक पहलू की गहराई से जांच करेगी। कमेटी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि इन समता नियमों की वजह से किसी भी वर्ग के छात्र के साथ अन्याय या प्रताड़ना न हो। इसके साथ ही सवर्ण समाज की तरफ से उठाई गई आपत्तियों और चिंताओं को भी कमेटी की रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इससे पहले इसी साल जनवरी में शीर्ष अदालत ने भी यह टिप्पणी की थी कि यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि समाज के हर वर्ग को निष्पक्ष न्याय मिले, और इसी आधार पर अदालत ने इन नियमों पर रोक लगा दी थी।

क्यों उठा सरकार को यू टर्न लेने का कदम

इन नए नियमों को लेकर सरकार के इस यू टर्न के पीछे राजनीतिक और सामाजिक दोनों कारण माने जा रहे हैं। सवर्ण समाज के संगठन लगातार इन नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और भारी रोष व्यक्त कर रहे थे। गौरतलब है कि अगले साल 2027 में देश के 7 प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। चूंकि सवर्ण वर्ग को भारतीय जनता पार्टी का एक मजबूत कोर वोटबैंक माना जाता है, इसलिए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि चुनावी माहौल के बीच सरकार इस वर्ग को किसी भी कीमत पर नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती है।

क्या था यूजीसी के नियमों का पूरा विवाद

विवाद की जड़ में यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए तैयार किए गए वे नए नियम थे, जिनका उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के छात्रों, फैकल्टी सदस्यों तथा कर्मचारियों को परिसरों में होने वाले जातिगत भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करना था। हालांकि, सवर्ण समाज का मुख्य विरोध इस बात को लेकर था कि इन प्रावधानों में सामान्य वर्ग के छात्रों को सुरक्षा देने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की गई थी। सवर्ण संगठनों का लगातार यह कहना था कि यदि किसी सवर्ण छात्र के साथ संस्थान के भीतर भेदभाव होता है, तो उसका समाधान इन नियमों के तहत नहीं हो पाएगा। यही कारण था कि सामान्य वर्ग और ईडब्ल्यूएस को इन नियमों में शामिल न किए जाने को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही थी और इन नियमों को पूरी तरह से रोलबैक करने की मांग की जा रही थी।

सवाल-जवाब

सरकार यूजीसी के किन नियमों पर विचार कर रही है?
सरकार यूजीसी के नए इक्विटी नियमों (इक्विटी रूल्स-2026) पर पुनर्विचार कर रही है।
इस मामले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को किसने दी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी।
सरकार द्वारा बनाई जाने वाली कमेटी क्या करेगी?
यह कमेटी नियमों के हर पहलू की समीक्षा करेगी और यह देखेगी कि इससे किसी भी वर्ग के छात्र प्रताड़ित न हों।
सवर्ण समाज इन नियमों का विरोध क्यों कर रहा था?
सवर्ण समाज का विरोध इसलिए था क्योंकि इन नियमों में सिर्फ एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों को सुरक्षा दी गई थी और सामान्य वर्ग के छात्रों को शामिल नहीं किया गया था।
अगले साल 2027 में कितने राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं?
अगले साल 2027 में देश के 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·1 दिन पहले

चुनाव आते ही सरकार को अचानक सबकी याद आ जाती है। वैसे उत्तराखंड और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में भी इसका कितना असर दिखेगा, यह देखने वाली बात होगी। क्या चुनाव के बाद यह कमेटी बस कागजों में ही दबी रह जाएगी?

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

चुनाव सिर पर हों तो सरकार को झुकना ही पड़ता है, वरना वोट बैंक नाराज हो जाता है।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·1 दिन पहले

रविकेश भाई, सात राज्यों के चुनाव 2027 में हैं, जैसा रिपोर्ट में लिखा है, तो दबाव तो दिखना ही था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

चुनाव सिर पर आते ही सरकार को सवर्णों की नाराजगी का डर सताने लगा है। अब कमेटी बनाकर मामला टालने की कोशिश हो रही है, पर कोर्ट में क्या होता है यह देखना दिलचस्प होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

करण भाई, बात सिर्फ चुनाव की नहीं है। सॉलिसिटर जनरल ने खुद कहा है कि हर छात्र का ध्यान रखा जाएगा, इसलिए इसे महज़ टालने की कोशिश कहना ठीक नहीं होगा।

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