गोवा में अंतिम मतदाता सूची से बाहर रह गए 97 नागरिकों को मताधिकार की मुख्यधारा में लाने की प्रशासनिक कवायद में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। मुख्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी ताजा स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, इन 97 मामलों में से 88 लोगों द्वारा भरा गया फॉर्म 6 औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। चुनावी तंत्र यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट में दर्ज होने से वंचित न रह जाए।
बाकी बचे 9 मामलों की वास्तविक स्थिति
प्रशासनिक पड़ताल के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि शेष बचे 9 मामलों में कानूनी और भौगोलिक कारणों से तुरंत पंजीकरण संभव नहीं हो सका। कुल मामलों में से 3 व्यक्ति पुर्तगाली पासपोर्ट धारक पाए गए हैं, जिससे भारतीय नागरिकता नियमों के तहत उनकी अर्हता प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त, अन्य 6 मतदाता वर्तमान में देश से बाहर रह रहे हैं। निर्वाचन तंत्र इन अप्रवासी नागरिकों से आगे की औपचारिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संपर्क साधने और संवाद बनाए रखने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने की पहल
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने 24 सितंबर को एक विस्तृत प्रेस नोट साझा किया था। इस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया था कि फरवरी 2026 में प्रकाशित की गई अंतिम मतदाता सूची में जो 97 लोग शामिल होने से चूक गए थे, उन्हें बीएलओ के जरिए सीधे जोड़ा जा रहा है। बूथ लेवल अधिकारियों ने प्रभावित नागरिकों के आवास पर दस्तक देकर विशेष रूप से फॉर्म 6 भरवाने की प्रक्रिया को अलग स्तर पर संचालित किया। इस दौरान कई पात्र लोगों के नाम तत्परता से दर्ज किए गए, जबकि अन्य आवेदनों पर सत्यापन प्रक्रिया जारी रखी गई।
समीक्षा बैठकों से बढ़ी प्रक्रिया की गति
मतदाताओं को जोड़ने की इस प्रशासनिक मुहिम को भारत निर्वाचन आयोग के स्तर पर भी मजबूती दी गई। 26 सितंबर को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आयोग ने रेखांकित किया था कि बीएलओ को वंचित मतदाताओं के घर जाकर आवेदन प्रपत्र संकलित करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 26 सितंबर तक 97 में से 81 व्यक्तियों ने फॉर्म 6 जमा कर दिया था, जिसकी संख्या अब अद्यतन स्थिति में बढ़कर 88 तक पहुंच चुकी है। बीएलओ द्वारा सीधे मतदाताओं के दरवाजे तक पहुंच बनाने से उन सभी निवासियों को बड़ी राहत मिली है, जो पहले किसी कारणवश अपना नाम जुड़वाने में असमर्थ रहे थे।



















